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केंद्रीय कारागार के शौचालय में लटका मिला उम्रकैदी का शव
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केंद्रीय कारागार फतेहगढ़ में पत्नी की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे बीमार उम्रकैदी का शव अस्पताल के शौचालय में गुरुवार की सुबह लटका मिला। पुलिस शव पोस्टमार्टम को भेज दिया।
जनपद मैनपुरी थाना भोगांव के गांव तिगवां निवासी जाहर सिंह (47) पुत्र श्यामलाल अपनी पत्नी सुनीता की हत्या कर शव छिपाने के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था। उसे मैनपुरी जिला जेल से 20 मई 2007 को केंद्रीय कारागार फतेहगढ़ भेजा गया था। तब से वह यहीं जेल में था। वह टीबी का मरीज था। जेल के अस्पताल में ही उसका इलाज चल रहा था। पिछले कुछ दिन से वह अस्पताल में भर्ती था।
सुबह वह अस्पताल के वार्ड में जब दिखाई नहीं दिया, तो कर्मचारियों ने अधिकारियों को सूचना दी। खोजबीन की गई तो सुबह 10 बजे उसका शव अस्पताल के पीछे के हिस्से में बने शौचालय में फंदे पर लटका मिला। वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने इसकी सूचना पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों को दी। पुलिस ने मौके पर पहुंच कर शव को फंदे से उतार लिया। तहसीलदार राजू की मौजूदगी में सेंट्रल जेल चौकी इंचार्ज जितेंद्र चौधरी ने शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया।
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सेंट्रल जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक एसएचएम रिजवी ने बताया कि कैदी जाहर टीबी की बीमारी से परेशान था। उसका बीमारी को लेकर दो बार कोर्स कराया गया था। बंदी ने बीमारी से तंग आकर अस्पताल के शौचालय में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। परिवार के लोगों को टीबी की बीमारी के बारे में क्यों जानकारी नहीं है। इस बारे में कुछ नहीं कह सकते हैं।
गौरतलब है कि गांव तिगवां निवासी जाहर सिंह की वर्ष 1995 में कन्नौज जिले की कोतवाली छिबरामऊ गांव प्रेमनगर निवासी सुनीता के साथ शादी हुई थी। उसका एक बड़ा भाई नाहर सिंह व बहन गीता है। जाहर ने वर्ष 1998 में दहेज की मांग न पूरी होने पर पत्नी सुनीता की हत्या कर दी थी। इस मामले में 17 अप्रैल 2007 को जाहर सिंह को मैनपुरी की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आजीवन कारावास व सात हजार जुर्माना जमा करने की सजा सुनाई थी। लगभग एक माह बाद ही जाहर को सेंट्रल जेल भेज दिया गया था।
गुरुवार को जाहर के जेल में फांसी लगाकर आत्महत्या करने की जानकारी पर आए भाई नाहर सिंह ने पोस्टमार्टम हाउस में जेल प्रशासन पर सवालिया निशान लगाए। उन्होंने बताया कि भाई को टीबी नहीं थी, जबकि जेल प्रशासन दो बार टीबी की बीमारी के इलाज का कोर्स कराने का दावा कर रहा है। नाहर सिंह ने बताया कि 23 फरवरी को वह भाई से अंतिम बार मिलने आए थे। तब भाई जाहर बिल्कुल ठीक था। उसके बाद 29 फरवरी को पत्नी कृष्णा देवी व बहन गीता देवी जाहर से मिलने आए थे। तब भी जाहर ने टीबी की बीमारी को लेकर कोई बात नहीं बताई थी। इतना ही नहीं वह जेल से बाहर निकलने के लिए सजा पूरी होने का इंतजार कर रहा था। तो ऐसे में वह आखिर क्यों फांसी लगाएगा?
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जनपद मैनपुरी थाना भोगांव के गांव तिगवां निवासी जाहर सिंह (47) पुत्र श्यामलाल अपनी पत्नी सुनीता की हत्या कर शव छिपाने के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था। उसे मैनपुरी जिला जेल से 20 मई 2007 को केंद्रीय कारागार फतेहगढ़ भेजा गया था। तब से वह यहीं जेल में था। वह टीबी का मरीज था। जेल के अस्पताल में ही उसका इलाज चल रहा था। पिछले कुछ दिन से वह अस्पताल में भर्ती था।
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सुबह वह अस्पताल के वार्ड में जब दिखाई नहीं दिया, तो कर्मचारियों ने अधिकारियों को सूचना दी। खोजबीन की गई तो सुबह 10 बजे उसका शव अस्पताल के पीछे के हिस्से में बने शौचालय में फंदे पर लटका मिला। वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने इसकी सूचना पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों को दी। पुलिस ने मौके पर पहुंच कर शव को फंदे से उतार लिया। तहसीलदार राजू की मौजूदगी में सेंट्रल जेल चौकी इंचार्ज जितेंद्र चौधरी ने शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया।
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सेंट्रल जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक एसएचएम रिजवी ने बताया कि कैदी जाहर टीबी की बीमारी से परेशान था। उसका बीमारी को लेकर दो बार कोर्स कराया गया था। बंदी ने बीमारी से तंग आकर अस्पताल के शौचालय में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। परिवार के लोगों को टीबी की बीमारी के बारे में क्यों जानकारी नहीं है। इस बारे में कुछ नहीं कह सकते हैं।
गौरतलब है कि गांव तिगवां निवासी जाहर सिंह की वर्ष 1995 में कन्नौज जिले की कोतवाली छिबरामऊ गांव प्रेमनगर निवासी सुनीता के साथ शादी हुई थी। उसका एक बड़ा भाई नाहर सिंह व बहन गीता है। जाहर ने वर्ष 1998 में दहेज की मांग न पूरी होने पर पत्नी सुनीता की हत्या कर दी थी। इस मामले में 17 अप्रैल 2007 को जाहर सिंह को मैनपुरी की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आजीवन कारावास व सात हजार जुर्माना जमा करने की सजा सुनाई थी। लगभग एक माह बाद ही जाहर को सेंट्रल जेल भेज दिया गया था।
गुरुवार को जाहर के जेल में फांसी लगाकर आत्महत्या करने की जानकारी पर आए भाई नाहर सिंह ने पोस्टमार्टम हाउस में जेल प्रशासन पर सवालिया निशान लगाए। उन्होंने बताया कि भाई को टीबी नहीं थी, जबकि जेल प्रशासन दो बार टीबी की बीमारी के इलाज का कोर्स कराने का दावा कर रहा है। नाहर सिंह ने बताया कि 23 फरवरी को वह भाई से अंतिम बार मिलने आए थे। तब भाई जाहर बिल्कुल ठीक था। उसके बाद 29 फरवरी को पत्नी कृष्णा देवी व बहन गीता देवी जाहर से मिलने आए थे। तब भी जाहर ने टीबी की बीमारी को लेकर कोई बात नहीं बताई थी। इतना ही नहीं वह जेल से बाहर निकलने के लिए सजा पूरी होने का इंतजार कर रहा था। तो ऐसे में वह आखिर क्यों फांसी लगाएगा?