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ग्रामीण की सोते समय गोली मार कर हत्या
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
Updated Mon, 03 Aug 2015 11:04 PM IST
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घर के बाहर सो रहे ग्रामीण की रविवार की रात गोली मार कर हत्या कर दी गई।
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घटना की जानकारी होने पर एसपी समेत आलाधिकारी मौके पर पहुंचे और मृतक के
परिजनों से जानकारी ली। मृतक के भाई ने पिता-पुत्रों समेत आठ लोगों के
खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई है। इसमें पुरानी रंजिश में हत्या किए
जाने का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में ले लिया है।
थाना अमृतपुर के गांव आसमपुर तिर्रफा निवासी राजेंद्र अवस्थी (45) की शादी नहीं हुई थी। वह अपनी मां राजरानी के साथ रहता था। उसके भाई रामप्रकाश और शिवप्रकाश अपने अलग मकानों में रहते है। राजेंद्र अवस्थी रविवार की रात घर के बाहर चारपाई पर सो रहा था। रात करीब 3 बजे गांव के ही कौशल अग्निहोत्री और उसके भाई व पिता असलहे लेकर आ
गए। हमलावरों ने चारपाई पर सो रहे राजेंद्र पर रात ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। फायरिंग की आवाज सुनकर भाई रामप्रकाश और उसके परिवार के अन्य लोग भी आ गए। हमलावरों ने इनको भी जानमाल की धमकी दी और भाग गए। सूचना मिलने पर एसओ राजबहादुर सिंह फोर्स के साथ पहुंचे। एसपी दिनेश कुमार पी, एएसपी रामभवन चौरसिया, सीओ
कालूराम दोहरे भी पहुंच गए। एसपी ने मृतक के परिवार वालों से घटना की जानकारी ली। मृतक के भाई रामप्रकाश ने घटना के बारे में बताया। उसने गांव के ही ओमकार अग्निहोत्री, इनके बेटे कौशल, दुर्गेश, कृष्णानंद, गांव बलीपट्टी रानीगांव निवासी अमरनाथ, इसके बेटे धनीराम, बनवारी के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई।
रामप्रकाश ने बताया कि 31 दिसंबर 2014 को कौशल अग्निहोत्री के संदिग्ध हालात में गोली लग गई थी। इस पर कौशल ने उसके भाई समेत चार के खिलाफ जानलेवा हमले की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जांच में पुलिस ने घटना को झूठा पाया और एफआर लगा दी थी। उसने बताया कि ओमकार के बहनोई अमरनाथ शुक्ला उर्फ गन्नी से विवाद होने पर वर्ष 1989 में
फायरिंग हो गई थी। जिसमें अमरनाथ शुक्ला घायल हो गए थे। इसमें भाई राजेंद्र के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। गवाहों की गवाही न हो पाने के कारण मुकदमा छुट गया था। रामप्रकाश ने बताया कि ओमकार उसकी बुआ के बेटा है। इन लोगों से लंबे समय से रंजिश चली आ रही है। पुलिस ने कौशल समेत दो लोगों को हिरासत में ले लिया है।
बदमाशों और ग्रामीणों में फायरिंग
घर के बाहर सो रहे राजेंद्र अवस्थी की हत्या के बाद फायरिंग की आवाज सुनकर परिवार के लोगों के अलावा अन्य ग्रामीण ने बदमाशों के आने की भनक पर हमलावरों की घेराबंदी की। इस दौरान हमलावरों ने ग्रामीणों पर भी फायर कर दिए। जवाब में ग्रामीणों ने हमलावरों पर फायर किए। हालांकि किसी अन्य के गोली नहीं लगी। जब ग्रामीण लौट कर आए तब तक राजेंद्र की मौत हो चुकी थी।
थाना अमृतपुर के गांव आसमपुर तिर्रफा निवासी राजेंद्र अवस्थी (45) की शादी नहीं हुई थी। वह अपनी मां राजरानी के साथ रहता था। उसके भाई रामप्रकाश और शिवप्रकाश अपने अलग मकानों में रहते है। राजेंद्र अवस्थी रविवार की रात घर के बाहर चारपाई पर सो रहा था। रात करीब 3 बजे गांव के ही कौशल अग्निहोत्री और उसके भाई व पिता असलहे लेकर आ
गए। हमलावरों ने चारपाई पर सो रहे राजेंद्र पर रात ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। फायरिंग की आवाज सुनकर भाई रामप्रकाश और उसके परिवार के अन्य लोग भी आ गए। हमलावरों ने इनको भी जानमाल की धमकी दी और भाग गए। सूचना मिलने पर एसओ राजबहादुर सिंह फोर्स के साथ पहुंचे। एसपी दिनेश कुमार पी, एएसपी रामभवन चौरसिया, सीओ
कालूराम दोहरे भी पहुंच गए। एसपी ने मृतक के परिवार वालों से घटना की जानकारी ली। मृतक के भाई रामप्रकाश ने घटना के बारे में बताया। उसने गांव के ही ओमकार अग्निहोत्री, इनके बेटे कौशल, दुर्गेश, कृष्णानंद, गांव बलीपट्टी रानीगांव निवासी अमरनाथ, इसके बेटे धनीराम, बनवारी के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई।
रामप्रकाश ने बताया कि 31 दिसंबर 2014 को कौशल अग्निहोत्री के संदिग्ध हालात में गोली लग गई थी। इस पर कौशल ने उसके भाई समेत चार के खिलाफ जानलेवा हमले की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जांच में पुलिस ने घटना को झूठा पाया और एफआर लगा दी थी। उसने बताया कि ओमकार के बहनोई अमरनाथ शुक्ला उर्फ गन्नी से विवाद होने पर वर्ष 1989 में
फायरिंग हो गई थी। जिसमें अमरनाथ शुक्ला घायल हो गए थे। इसमें भाई राजेंद्र के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। गवाहों की गवाही न हो पाने के कारण मुकदमा छुट गया था। रामप्रकाश ने बताया कि ओमकार उसकी बुआ के बेटा है। इन लोगों से लंबे समय से रंजिश चली आ रही है। पुलिस ने कौशल समेत दो लोगों को हिरासत में ले लिया है।
बदमाशों और ग्रामीणों में फायरिंग
घर के बाहर सो रहे राजेंद्र अवस्थी की हत्या के बाद फायरिंग की आवाज सुनकर परिवार के लोगों के अलावा अन्य ग्रामीण ने बदमाशों के आने की भनक पर हमलावरों की घेराबंदी की। इस दौरान हमलावरों ने ग्रामीणों पर भी फायर कर दिए। जवाब में ग्रामीणों ने हमलावरों पर फायर किए। हालांकि किसी अन्य के गोली नहीं लगी। जब ग्रामीण लौट कर आए तब तक राजेंद्र की मौत हो चुकी थी।