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सरकारी कारतूस बेचते धरा गया आरमोरर
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
Updated Wed, 06 May 2015 11:22 PM IST
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लखनऊ एसटीएफ ने भोलेपुर हनुमान मंदिर के पास से सरकारी कारतूस बेचते हुए
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अलीगढ़ के आरमोरर, फतेहगढ़ के सिपाही और पूर्व विधायक डाक्टर सिंह के
गुर्गे को धर दबोचा है। भारी मात्रा में कारतूस के साथ ही नगदी भी बरामद
किया है। ये तीनों फतेहगढ़ जेल में बंद शातिर अपराधी सुभाष ठाकुर के
गुर्गाें को कारतूस बेचने गए थे। एसपी ने आरोपी सिपाही को निलंबित कर दिया
है।
शहर में दो दिन से डेरा डाली एसटीएफ ने मंगलवार देर रात भोलेपुर स्थित हनुमान मंदिर के पास जाल बिछाया। कुछ देर बाद वहां बैग लिए एक व्यक्ति पहुंचा। वह दो मिनट तक इंतजार किया, तभी वहां बाइक से दो व्यक्ति पहुंचे। इन्होंने कोड वर्ड में एक-दूसरे की शिनाख्त की। पहले से चौकन्नी पुलिस ने तीनों को धर दबोचा। पैदल आने वाले के बैग की तलाशी ली तो उसमें 120 कारतूस 38 बोर एवं 29 कारतूस 303 बोर के मिले। बैग लेकर आने वाले ने अपना नाम रजनीश पांडेय
बताया, जो अलीगढ पुलिस लाइन में आरमोरर के पद पर तैनात है। उसके पास से 40 हजार रुपये भी बरामद हुए। बाइक
से आने वालों ने पूछताछ के दौरान अपना परिचय वाराणसी जिले के सिगरा थाना क्षेत्र के जगन्नाथपुर निवासी आशीष उर्फ प्रशांत मिश्रा एवं दूसरे ने कानपुर देहात जिले के गजमेर जसमापुर निवासी अनुज वर्मा के रूप में बताया। अनुज फतेहगढ़ पुलिस लाइन में सिपाही है। बाइक सवारों के पास से 10-10 हजार रुपये मिले। एसटीएफ ने बाइक को सीज कर दिया है।
एसटीएस टीम प्रभारी संदीप मिश्रा ने बताया कि पूछताछ में यह बात सामने आई है कि अलीगढ़ के आरमोरर और फतेहगढ़ के सिपाही की मिलीभगत से कारतूस का कारोबार चल रहा था। आशीष भदोही के पूर्व विधायक एवं फतेहगढ़ सेंट्रल जेल में सजा काट रहे उदयभान सिंह उर्फ डाक्टर सिंह का खास गुर्गा है। वह शातिर अपराधी सुभाष ठाकुर उर्फ बाबा के लिए कारतूस खरीद रहा था। वह फतेहगढ़ में ही रहकर पूर्व विधायक के गुर्गों के रुकने की व्यवस्था करता है।
एसटीएफ के मुताबिक आरमोरर रजनीश पांडेय ने पूछताछ में बताया कि उसका फतेहगढ़ के निलंबित आरमोरर सत्यप्रकाश तिवारी, लखीमपुर के आरमोरर मोहम्मद अनीस, झांसी के बर्खास्त आरमोरर अखिलेश पांडेय, कानपुर नगर के आरमोरर हुकुम सिंह और इटावा के आरमोरर राजेश मिश्रा से गठजोड़ है। फायरिंग के दौरान मिले खोखों को जिंदा कारतूसों में बदल कर अपराधियों को 300 से 400 रुपये की दर से बेचते हैं। एसटीएफ प्रभारी संदीप मिश्रा ने बताया कि पकड़े गए आरमोरर
के बताए नाम रडार पर लिए जाएंगे। दोषी होने पर इन पर कार्रवाई होगी। बताया कि सत्यप्रकाश जिस समय कानपुर में तैनात था उस समय सरकारी असलहे बेचते पकड़ा गया था। तभी से वह निलंबित है। बताया कि अभी तक की जांच में पता चला है कि कई जिलों के आरमोरर की मिलीभगत से यह काम चल रहा था। एसटीएफ टीम में नीरज पांडेय, धनंजय पांडेय, अरविंद अवस्थी, अमित सिंह आदि शामिल थे।
आरमोरर की मिलीभगत से चल रहा काला धंधा
आरमोरर की मिलीभगत से सरकारी कारतूस का धंधा तेजी से चल रहा है। इनका नेटवर्क बड़े अपराधियों के साथ ही कुछ प्रतिबंधित संगठनों से भी है। सेंट्रल जेल के अंदर बड़े अपराधियों की मौजूदगी की वजह से फतेहगढ़ इस काराबोर का हब बना है। इनका नेटवर्क आसपास के जिलों में भी फैला हुआ है। एसटीएफ टीम की पूछताछ में भी यह खुलासा हुआ है।
पूछताछ में आरमोरर रजनीश पांडेय ने पूरे गैंग का खुलासा किया है। उसके नेटवर्क में कानपुर सहित आसपास के जिलों के
तमाम आरमोरर हैं। अब एसटीएफ इस गैंग को रडार पर लेने की कोशिश में जुटी है। पकड़े गए लोगोें से पूछताछ के दौरान एसटीएफ को बताया है कि 10 मार्च 2015 को पूर्व विधायक उदयभान सिंह की दिल्ली में तारीख के दौरान उनके गुर्गों को 200 कारतूस इटावा स्टेशन पर बेचे गए थे। फिलहाल पुलिस के कारतूसों की बिक्री का भंडाफोड़ होने के बाद जिले
में हलचल मची है। फतेहगढ़ पुलिस ने जेल गए आरोपी आरमोरर रजनीश पांडेय, सिपाही अनुज वर्मा और आशीष उर्फ प्रशांत मिश्रा को रिमांड पर लेने की तैयारी शुरू कर दी है। एसपी विजय यादव ने बताया कि अभी तक की जांच में पता चला कि यहां पर सरकारी कारतूसों की बिक्री का मामला सामने नहीं आया है। फिर भी वह इसकी जांच करा रहे हैं।
अनुज की ही क्यों लगती थी ड्यूटी?
शातिर अपराधी सुभाष ठाकुर की पेशी के दौरान सिपाही अनुज की ड्यूटी की जानकारी पर एसटीएफ दंग रह गई। सूत्रों के अनुसार सुभाष की दिल्ली पेशी के दौरान सिपाही अनुज की ड्यूटी जरूर लगाई जाती है। बताते हैं कि इसके एवज में ड्यूटी लगाने वालों को इनाम दिया जाता था। इसकी भी जांच की जा रही है। बताया गया कि कुछ समय पहले सुभाष को दिल्ली पेशी पर ले जाते समय सिपाही की भेंट हो गई थी। तबसे वह इसके साथ जाने लगा।
मुंबई में हत्या के बाद हरकत में आई एसटीएफ
मुंबई के मीरा रोड पर करीब 20 दिन पहले हुई हत्या के बाद मुंबई पुलिस को इसके तार यूपी से जुड़े होने की सूचना मिली थी। इस पर मुंबई पुलिस ने सेंट्रल जेल में सुभाष ठाकुर से मिलने का प्रयास किया था लेकिन इसने मिलने से मना कर दिया था। मुंबई पुलिस का मानना था कि सुभाष के इशारे पर ही हत्या की गई थी। मुंबई पुलिस की जांच के बाद मामला एसटीएफ के पास आया। एसटीएफ को पता चला कि सुभाष के गुर्गाें ने ही यहां से कारतूस और असलहे मुहैया कराए गए थे।
इटावा के आरमोरर से मिल कर आया था
रजनीश पांडेय को अवैध रूप से पुलिस के कारतूसों को अपराधियों को बेचने की जानकारी पर एसटीएफ ने दबोचा है। जांच में पता चला कि रजनीश फतेहगढ़ आने से पहले इटावा के आरमोरर से मिल कर आया था। पूछताछ में रजनीश ने एसटीएफ को ये जानकारी दी।
दबंग कैदी भी भरते सुभाष ठाकुर की चिलम
फर्रुखाबाद। सेंट्रल जेल में आजीवन सजा काट रहे माफिया सुभाष ठाकुर की चिलम (खुशामद) दबंग कै दी भी भरते हैं। सुभाष उर्फ बाबा ठाकुर का जेल में खास जलजला है। उसके पेशी पर जाने के दौरान शातिर गुर्गे सुरक्षा के लिए ट्रेन में साथ यात्रा करते हैं। बनारस का रहने वाला सुभाष ठाकुर उर्फ बाबा सेंट्रल जेल में करीब 8 वर्षों से सजा काट रहा है। सेंट्रल जेल में उसका दबदबा है। सुभाष धार्मिक पर्वों पर जेल में ही दान पुण्य भी करता है। गायों की पूजा उसका खास शगल है। जेल
के अंदर उसका राज चलता है। दिल्ली में पेशी पर जाते समय बड़ी संख्या में उसके गुर्गे ट्रेन में साथ रहते हैं। वह इसलिए कि उसे हमेशा हत्या का भय बना रहता है। इनके गुर्गों को आरमोरराें के जरिए कारतूस पहुंचते हैं। हाल ही में मुंबई में हुई हत्या के बाद प्रदेश की एसटीएफ सुभाष ठाकुर के गुर्गों को तलाश करने में जुट गई थी। सुभाष मोबाइल के जरिए जेल से ही अपराध का काला साम्राज्य चला रहा है।
शहर में दो दिन से डेरा डाली एसटीएफ ने मंगलवार देर रात भोलेपुर स्थित हनुमान मंदिर के पास जाल बिछाया। कुछ देर बाद वहां बैग लिए एक व्यक्ति पहुंचा। वह दो मिनट तक इंतजार किया, तभी वहां बाइक से दो व्यक्ति पहुंचे। इन्होंने कोड वर्ड में एक-दूसरे की शिनाख्त की। पहले से चौकन्नी पुलिस ने तीनों को धर दबोचा। पैदल आने वाले के बैग की तलाशी ली तो उसमें 120 कारतूस 38 बोर एवं 29 कारतूस 303 बोर के मिले। बैग लेकर आने वाले ने अपना नाम रजनीश पांडेय
बताया, जो अलीगढ पुलिस लाइन में आरमोरर के पद पर तैनात है। उसके पास से 40 हजार रुपये भी बरामद हुए। बाइक
से आने वालों ने पूछताछ के दौरान अपना परिचय वाराणसी जिले के सिगरा थाना क्षेत्र के जगन्नाथपुर निवासी आशीष उर्फ प्रशांत मिश्रा एवं दूसरे ने कानपुर देहात जिले के गजमेर जसमापुर निवासी अनुज वर्मा के रूप में बताया। अनुज फतेहगढ़ पुलिस लाइन में सिपाही है। बाइक सवारों के पास से 10-10 हजार रुपये मिले। एसटीएफ ने बाइक को सीज कर दिया है।
एसटीएस टीम प्रभारी संदीप मिश्रा ने बताया कि पूछताछ में यह बात सामने आई है कि अलीगढ़ के आरमोरर और फतेहगढ़ के सिपाही की मिलीभगत से कारतूस का कारोबार चल रहा था। आशीष भदोही के पूर्व विधायक एवं फतेहगढ़ सेंट्रल जेल में सजा काट रहे उदयभान सिंह उर्फ डाक्टर सिंह का खास गुर्गा है। वह शातिर अपराधी सुभाष ठाकुर उर्फ बाबा के लिए कारतूस खरीद रहा था। वह फतेहगढ़ में ही रहकर पूर्व विधायक के गुर्गों के रुकने की व्यवस्था करता है।
एसटीएफ के मुताबिक आरमोरर रजनीश पांडेय ने पूछताछ में बताया कि उसका फतेहगढ़ के निलंबित आरमोरर सत्यप्रकाश तिवारी, लखीमपुर के आरमोरर मोहम्मद अनीस, झांसी के बर्खास्त आरमोरर अखिलेश पांडेय, कानपुर नगर के आरमोरर हुकुम सिंह और इटावा के आरमोरर राजेश मिश्रा से गठजोड़ है। फायरिंग के दौरान मिले खोखों को जिंदा कारतूसों में बदल कर अपराधियों को 300 से 400 रुपये की दर से बेचते हैं। एसटीएफ प्रभारी संदीप मिश्रा ने बताया कि पकड़े गए आरमोरर
के बताए नाम रडार पर लिए जाएंगे। दोषी होने पर इन पर कार्रवाई होगी। बताया कि सत्यप्रकाश जिस समय कानपुर में तैनात था उस समय सरकारी असलहे बेचते पकड़ा गया था। तभी से वह निलंबित है। बताया कि अभी तक की जांच में पता चला है कि कई जिलों के आरमोरर की मिलीभगत से यह काम चल रहा था। एसटीएफ टीम में नीरज पांडेय, धनंजय पांडेय, अरविंद अवस्थी, अमित सिंह आदि शामिल थे।
आरमोरर की मिलीभगत से चल रहा काला धंधा
आरमोरर की मिलीभगत से सरकारी कारतूस का धंधा तेजी से चल रहा है। इनका नेटवर्क बड़े अपराधियों के साथ ही कुछ प्रतिबंधित संगठनों से भी है। सेंट्रल जेल के अंदर बड़े अपराधियों की मौजूदगी की वजह से फतेहगढ़ इस काराबोर का हब बना है। इनका नेटवर्क आसपास के जिलों में भी फैला हुआ है। एसटीएफ टीम की पूछताछ में भी यह खुलासा हुआ है।
पूछताछ में आरमोरर रजनीश पांडेय ने पूरे गैंग का खुलासा किया है। उसके नेटवर्क में कानपुर सहित आसपास के जिलों के
तमाम आरमोरर हैं। अब एसटीएफ इस गैंग को रडार पर लेने की कोशिश में जुटी है। पकड़े गए लोगोें से पूछताछ के दौरान एसटीएफ को बताया है कि 10 मार्च 2015 को पूर्व विधायक उदयभान सिंह की दिल्ली में तारीख के दौरान उनके गुर्गों को 200 कारतूस इटावा स्टेशन पर बेचे गए थे। फिलहाल पुलिस के कारतूसों की बिक्री का भंडाफोड़ होने के बाद जिले
में हलचल मची है। फतेहगढ़ पुलिस ने जेल गए आरोपी आरमोरर रजनीश पांडेय, सिपाही अनुज वर्मा और आशीष उर्फ प्रशांत मिश्रा को रिमांड पर लेने की तैयारी शुरू कर दी है। एसपी विजय यादव ने बताया कि अभी तक की जांच में पता चला कि यहां पर सरकारी कारतूसों की बिक्री का मामला सामने नहीं आया है। फिर भी वह इसकी जांच करा रहे हैं।
अनुज की ही क्यों लगती थी ड्यूटी?
शातिर अपराधी सुभाष ठाकुर की पेशी के दौरान सिपाही अनुज की ड्यूटी की जानकारी पर एसटीएफ दंग रह गई। सूत्रों के अनुसार सुभाष की दिल्ली पेशी के दौरान सिपाही अनुज की ड्यूटी जरूर लगाई जाती है। बताते हैं कि इसके एवज में ड्यूटी लगाने वालों को इनाम दिया जाता था। इसकी भी जांच की जा रही है। बताया गया कि कुछ समय पहले सुभाष को दिल्ली पेशी पर ले जाते समय सिपाही की भेंट हो गई थी। तबसे वह इसके साथ जाने लगा।
मुंबई में हत्या के बाद हरकत में आई एसटीएफ
मुंबई के मीरा रोड पर करीब 20 दिन पहले हुई हत्या के बाद मुंबई पुलिस को इसके तार यूपी से जुड़े होने की सूचना मिली थी। इस पर मुंबई पुलिस ने सेंट्रल जेल में सुभाष ठाकुर से मिलने का प्रयास किया था लेकिन इसने मिलने से मना कर दिया था। मुंबई पुलिस का मानना था कि सुभाष के इशारे पर ही हत्या की गई थी। मुंबई पुलिस की जांच के बाद मामला एसटीएफ के पास आया। एसटीएफ को पता चला कि सुभाष के गुर्गाें ने ही यहां से कारतूस और असलहे मुहैया कराए गए थे।
इटावा के आरमोरर से मिल कर आया था
रजनीश पांडेय को अवैध रूप से पुलिस के कारतूसों को अपराधियों को बेचने की जानकारी पर एसटीएफ ने दबोचा है। जांच में पता चला कि रजनीश फतेहगढ़ आने से पहले इटावा के आरमोरर से मिल कर आया था। पूछताछ में रजनीश ने एसटीएफ को ये जानकारी दी।
दबंग कैदी भी भरते सुभाष ठाकुर की चिलम
फर्रुखाबाद। सेंट्रल जेल में आजीवन सजा काट रहे माफिया सुभाष ठाकुर की चिलम (खुशामद) दबंग कै दी भी भरते हैं। सुभाष उर्फ बाबा ठाकुर का जेल में खास जलजला है। उसके पेशी पर जाने के दौरान शातिर गुर्गे सुरक्षा के लिए ट्रेन में साथ यात्रा करते हैं। बनारस का रहने वाला सुभाष ठाकुर उर्फ बाबा सेंट्रल जेल में करीब 8 वर्षों से सजा काट रहा है। सेंट्रल जेल में उसका दबदबा है। सुभाष धार्मिक पर्वों पर जेल में ही दान पुण्य भी करता है। गायों की पूजा उसका खास शगल है। जेल
के अंदर उसका राज चलता है। दिल्ली में पेशी पर जाते समय बड़ी संख्या में उसके गुर्गे ट्रेन में साथ रहते हैं। वह इसलिए कि उसे हमेशा हत्या का भय बना रहता है। इनके गुर्गों को आरमोरराें के जरिए कारतूस पहुंचते हैं। हाल ही में मुंबई में हुई हत्या के बाद प्रदेश की एसटीएफ सुभाष ठाकुर के गुर्गों को तलाश करने में जुट गई थी। सुभाष मोबाइल के जरिए जेल से ही अपराध का काला साम्राज्य चला रहा है।