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एआरटीओ के लिपिक व सिपाहियों ने कार बेचने वाले युवक को पकड़ा

Tue, 18 Aug 2020 10:33 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 18 Aug 2020 10:33 PM IST
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crime
पवन को कार्यालय के अंदर ले जाते एआरटीओ के सिपाही। संवाद - फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। धोखाधड़ी कर कार बेचने वाले मालिक को एआरटीओ कार्यालय के लिपिक व सिपाहियों ने मोहम्मदाबाद क्षेत्र से दबोच लिया। पूछताछ के बाद उसे फतेहगढ़ कोतवाली पुलिस की सुपुर्दगी में दे दिया गया। एआरटीओ कार्यालय के लिपिक ने पकड़े गए युवक के खिलाफ धोखाधड़ी कर लोन चुकाए बिना कार बेचकर दूसरे के नाम ट्रांसफर कराने के आरोप में तहरीर दी है।
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एक फाइनेंस कंपनी के मैनेजर शरद गुप्ता ने 13 अगस्त को एआरटीओ शांतिभूषण से शिकायत की थी। इसमें बताया कि अमृतपुर तहसील के गांव कुबेरपुर कुतलूपुर निवासी पवन ने कंपनी से दस लाख रुपये का लोन लेकर कार खरीदी। चार जनवरी को कार का एआरटीओ कार्यालय में पंजीकरण कराया गया। फरवरी व मार्च की किस्त के बाद मासिक किस्त आना बंद हो गई।
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जब छानबीन की तो पता चला कि कार ईशेपुर के अमर सिंह को बेच दी गई जबकि फाइनेंस निरस्तीकरण के संबंध में उनकी ओर से 35 फार्म (नोड्यूज ) नहीं दिया गया। इसके बाद भी पवन ने दलाल के माध्यम से पटल के लिपिक से साठगांठ कर कार अमर सिंह के नाम ट्रांसफर करवा दी। नोड्यूज देेखे बिना लिपिक ने कार पर फाइनेंस निरस्तीकरण की रिपोर्ट कैसे दे दी।
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इस पर एआरटीओ ने लिपिक से मूल पत्रावली तलब की थी। कार्यालय से कार की मूल पत्रावली भी गायब थी। मंगलवार को लिपिक भीम कात्यान ने एआरटीओ के सिपाहियों की मदद से पवन को मोहम्मदाबाद क्षेत्र की एक शराब की दुकान के बाहर से पकड़ लिया। एआरटीओ शांतिभूषण पांडेय को पवन ने बताया कि वह असम में रहता है।
कार उसने अपने नाम से खरीदकर भांजे आनंद को दे दी थी। कार को बेचकर फाइनेंस कंपनी के एक कर्मचारी से मिलकर लोन का पांच लाख रुपये दे दिया था। उसकी रसीद उसके पास नहीं है। आरआई जीवन कुुमार के बुलाने पर फाइनेंस कंपनी के लोग भी एआरटीओ कार्यालय में पहुंचे और लिखित शिकायत की।

लिपिक भीम ने एआरटीओ के आदेश पर पवन के खिलाफ धोखाधड़ी की तहरीर पुलिस को दी। पुलिस पवन को कोतवाली ले गई। एआरटीओ शांतिभूषण पांडेय ने बताया कि पवन के साथ कई लोग मिले हुए थे। यह लोग एक गैंग बनाकर कार फाइनेंस कराकर उसके फर्जी नोड्यूज बनाकर कार को दूसरे को बेच देते थे। पवन ने अमर सिंह को कार बेची थी। उसने भी दूसरी फाइनेंस कंपनी में लोन कराने का प्रयास किया। लेकिन सफल नहीं हो पाया। इसमें शामिल दलाल के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई होगी।
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