{"_id":"5e35b8708ebc3e4b3c5da3b7","slug":"courageous-children-gave-courage-when-they-cried-innocently-farrukhabad-news-knp541916765","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोई मासूम सिसका तो किसी ने ढांढस बंधाकर बिताए 11 घंटे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोई मासूम सिसका तो किसी ने ढांढस बंधाकर बिताए 11 घंटे
विज्ञापन
सुभाष की पुत्री गौरी को गोद में लिए खड़ी महिला सिपाही सीमा।
- फोटो : FARRUKHABAD
क्षेत्र के गांव करथिया निवासी शातिर सुभाष ने बच्चों को बेटी के जन्मदिन की झूठी कहानी गढ़कर फंसाया था। बंकर में बंद मासूमों में से कई रोए तो कुछ साहसी बच्चों ने उन्हें ढांढस बंधाकर 11 घंटे बिताए। रजनी अपने बच्चों को लेने गई तो सुभाष ने उसे भगाते हुए फायर झोंक दिया था। तब लोगों को बच्चे बंधक बनाए जाने की जानकारी हुई।
करथिया निवासी सुभाष बाथम ने गांव में जो बच्चा मिला उसे बेटी के जन्मदिन के बहाने टॉफी और बिस्कुट का लालच देकर बुला ले गया। गांव के आनंद सिंह चंदेल की पांच वर्षीय बेटी आरबी ने बताया कि वह तो टाफी लेने गई थी। मुकेश श्रीवास्तव के पुत्र प्रशांत (7), बेटी नैंसी (5) व भांजे कृष्णा (10) ने बताया कि सुभाष के यहां डांस हो रहा था।
डांस देखने चले गए। तभी उसने तहखाने के अंदर डांस करने बात कहकर सभी को नीचे उतार दिया था। जब उन लोगों ने बाहर जाने को कहा तो बताया कि केक तो तहखाने में ही काटा जाएगा। अभी यहीं डांस करो। अंजली (14) छोटे भाई अरुण व बहन लवी के साथ अपने घर के बाहर खेल रही थी। तभी सुभाष उन्हें बुलाने आया।
विज्ञापन
अंजली की दादी मीरा देवी ने कहा कि वह बेटी का जन्म दिन तो कुछ दिनों पहले ही मना चुका है। इस पर सुभाष ने कहा कि वह वर्ष में दो बार बेटी का जन्मदिन मनाता है और बच्चों को बुला ले गया। इसी तरह सभी बच्चे उसने बंधक बना लिए।
करीब दो घंटे तक बच्चों के न आने पर गांव के पंछीलाल बाथम की पत्नी रजनी सुभाष के घर गईं और बेटी खुशी, मुस्कान व बेटे आदित्य को भेजने को कहा। इस पर उसने कहा बच्चे नहीं देगा, चाहे पुलिस बुला लो। इसके बाद तमंचे से फायर कर रजनी को गाली देते हुए भगा दिया। इसी के बाद पुलिस को 112 नंबर पर सूचना दी गई।
रूबी ने अंजली को ही सौंप दी थी अपनी बच्ची
सुभाष अपनी पत्नी रूबी को भी तहखाने में ही छोड़ गया था। रूबी ने अंजली को अपनी बेटी गौरी को गोद में दे दिया। सुभाष ने जब घर के आंगन में फायर कर गालीगलौज किया तो अंजली को बंधक बनाए जाने का अहसास हो गया। काफी देर होने पर छोटे बच्चे रोने लगे। अंजली, विनीत उन्हें चुप कराने का प्रयास करते रहे।
रूबी से अंजली ने कहा कि भूख से बच्चे रो रहे हैं। रूबी ने कुंडी खोलने को कहा, लेकिन अंजली ने कुंडी नहीं खोली और खिड़की से बिस्कुट के डिब्बे डलवाए। अंजली और विनीत छोटे बच्चों को बिस्कुट देते रहे। मुस्कान ने बताया कि उसे लग रहा था अब वह कैसे पहुंचेगी।
लक्ष्मी ने बताया कि जब सुभाष चीखता था तो वह डर जाती थी। उसे लगता था कि वह उन्हें पीटेगा। पारस ने बताया कि रूबी भी उन्हें धमका रही थी। कह रही थी कि कोई रोया तो समझ लो ठीक नहीं होगा। अक्षय कहता है कि डर से समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें और अब क्या होगा।
विज्ञापन
करथिया निवासी सुभाष बाथम ने गांव में जो बच्चा मिला उसे बेटी के जन्मदिन के बहाने टॉफी और बिस्कुट का लालच देकर बुला ले गया। गांव के आनंद सिंह चंदेल की पांच वर्षीय बेटी आरबी ने बताया कि वह तो टाफी लेने गई थी। मुकेश श्रीवास्तव के पुत्र प्रशांत (7), बेटी नैंसी (5) व भांजे कृष्णा (10) ने बताया कि सुभाष के यहां डांस हो रहा था।
विज्ञापन
डांस देखने चले गए। तभी उसने तहखाने के अंदर डांस करने बात कहकर सभी को नीचे उतार दिया था। जब उन लोगों ने बाहर जाने को कहा तो बताया कि केक तो तहखाने में ही काटा जाएगा। अभी यहीं डांस करो। अंजली (14) छोटे भाई अरुण व बहन लवी के साथ अपने घर के बाहर खेल रही थी। तभी सुभाष उन्हें बुलाने आया।
विज्ञापन
अंजली की दादी मीरा देवी ने कहा कि वह बेटी का जन्म दिन तो कुछ दिनों पहले ही मना चुका है। इस पर सुभाष ने कहा कि वह वर्ष में दो बार बेटी का जन्मदिन मनाता है और बच्चों को बुला ले गया। इसी तरह सभी बच्चे उसने बंधक बना लिए।
करीब दो घंटे तक बच्चों के न आने पर गांव के पंछीलाल बाथम की पत्नी रजनी सुभाष के घर गईं और बेटी खुशी, मुस्कान व बेटे आदित्य को भेजने को कहा। इस पर उसने कहा बच्चे नहीं देगा, चाहे पुलिस बुला लो। इसके बाद तमंचे से फायर कर रजनी को गाली देते हुए भगा दिया। इसी के बाद पुलिस को 112 नंबर पर सूचना दी गई।
रूबी ने अंजली को ही सौंप दी थी अपनी बच्ची
सुभाष अपनी पत्नी रूबी को भी तहखाने में ही छोड़ गया था। रूबी ने अंजली को अपनी बेटी गौरी को गोद में दे दिया। सुभाष ने जब घर के आंगन में फायर कर गालीगलौज किया तो अंजली को बंधक बनाए जाने का अहसास हो गया। काफी देर होने पर छोटे बच्चे रोने लगे। अंजली, विनीत उन्हें चुप कराने का प्रयास करते रहे।
रूबी से अंजली ने कहा कि भूख से बच्चे रो रहे हैं। रूबी ने कुंडी खोलने को कहा, लेकिन अंजली ने कुंडी नहीं खोली और खिड़की से बिस्कुट के डिब्बे डलवाए। अंजली और विनीत छोटे बच्चों को बिस्कुट देते रहे। मुस्कान ने बताया कि उसे लग रहा था अब वह कैसे पहुंचेगी।
लक्ष्मी ने बताया कि जब सुभाष चीखता था तो वह डर जाती थी। उसे लगता था कि वह उन्हें पीटेगा। पारस ने बताया कि रूबी भी उन्हें धमका रही थी। कह रही थी कि कोई रोया तो समझ लो ठीक नहीं होगा। अक्षय कहता है कि डर से समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें और अब क्या होगा।