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कोरोना से जंग: डीएम ने दो वर्ष का बीस प्रतिशत वेतन किया दान
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उमाशंकर श्रीवास्तव। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। अब से ठीक एक वर्ष पहले कोरोना महामारी के रूप में देश के सामने बड़ी चुनौती आ खड़ी हुई थी। प्रधानमंत्री के आह्वान पर 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के बाद 25 मार्च से संपूर्ण लॉकडाउन हो गया था। इस दौर में पुलिस-प्रशासन, चिकित्सकों के साथ ही समाज के हर वर्ग ने इस चुनौती से निपटने में अपनी परवाह न करते हुए बड़ा योगदान दिया। इसमें ही शामिल हैं जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह और पियानो वादक गौरी मिश्रा।
डीएम ने मुख्यमंत्री राहत कोष में दो वर्ष के लिए अपने वेतन का 20 प्रतिशत हिस्सा दान कर दिया। साथ ही क्वारंटीन सेंटर, एल-1 व एल-2 अस्पताल का निरीक्षण व्यवस्था बनाते रहे। गौरी ने राष्ट्रपति से पुरस्कार में मिले एक लाख रुपये प्रधानमंत्री राहत कोष में दान कर दिए।
साल 2020 में पैदा हुए असहज हालात सालों साल याद किए जाएंगे। 25 मार्च 20 को लॉकडाउन लगा तो पूरा देश ठहर गया। सड़क पर सन्नाटा और जिंदगी घरों में कैद हो गई। सड़क पर सिर्फ पुलिस, प्रशासन और अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग के लोग ही दिख रहे थे। महामारी का खौफ इतना कि अपनों ने ही दूरियां बना लीं। कमाई रुकी तो लोगों के सामने आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया। जिला प्रशासन की सतर्कता से लॉकडाउन के दौरान कोई मरीज यहां नहीं मिला। पहला संक्रमित लॉकडाउन खत्म होने के डेढ़ माह बाद मिला। वह मुंबई से लौटा प्रवासी था।
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इसके बाद जिला प्रशासन और चौकन्ना हुआ। कई बार तो कोरोना योद्धा बने जिलाधिकारी एल-1 व एल-2 अस्पताल में पीपीई किट पहनकर संक्रमित मरीजों के बीच पहुंचे। इसके बाद उन्होंने मरीजों के प्रति संवेदना दिखाते हुए अपने वेतन का 20 प्रतिशत हिस्सा मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा कर दिया। यह धनराशि लगातार दो साल तक वेतन से कटौती कर जमा होगी। मोहल्ला राजीव गांधी नगर निवासी नन्हीं परी पियानो वादक गौरी मिश्रा (कक्षा 9) को बाल पुरस्कार देकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मानित किया था।
इस दौरान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने एक लाख रुपये का चेक देकर पुरस्कृत किया था। उम्र में कम गौरी ने ऊंची सोच का परिचय देते हुए इनाम में मिले एक लाख रुपये देश सेवा में लगाने का संकल्प लिया और प्रधानमंत्री राहत कोष में दान कर मिसाल कायम की। (संवाद)
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डीएम ने मुख्यमंत्री राहत कोष में दो वर्ष के लिए अपने वेतन का 20 प्रतिशत हिस्सा दान कर दिया। साथ ही क्वारंटीन सेंटर, एल-1 व एल-2 अस्पताल का निरीक्षण व्यवस्था बनाते रहे। गौरी ने राष्ट्रपति से पुरस्कार में मिले एक लाख रुपये प्रधानमंत्री राहत कोष में दान कर दिए।
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साल 2020 में पैदा हुए असहज हालात सालों साल याद किए जाएंगे। 25 मार्च 20 को लॉकडाउन लगा तो पूरा देश ठहर गया। सड़क पर सन्नाटा और जिंदगी घरों में कैद हो गई। सड़क पर सिर्फ पुलिस, प्रशासन और अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग के लोग ही दिख रहे थे। महामारी का खौफ इतना कि अपनों ने ही दूरियां बना लीं। कमाई रुकी तो लोगों के सामने आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया। जिला प्रशासन की सतर्कता से लॉकडाउन के दौरान कोई मरीज यहां नहीं मिला। पहला संक्रमित लॉकडाउन खत्म होने के डेढ़ माह बाद मिला। वह मुंबई से लौटा प्रवासी था।
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इसके बाद जिला प्रशासन और चौकन्ना हुआ। कई बार तो कोरोना योद्धा बने जिलाधिकारी एल-1 व एल-2 अस्पताल में पीपीई किट पहनकर संक्रमित मरीजों के बीच पहुंचे। इसके बाद उन्होंने मरीजों के प्रति संवेदना दिखाते हुए अपने वेतन का 20 प्रतिशत हिस्सा मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा कर दिया। यह धनराशि लगातार दो साल तक वेतन से कटौती कर जमा होगी। मोहल्ला राजीव गांधी नगर निवासी नन्हीं परी पियानो वादक गौरी मिश्रा (कक्षा 9) को बाल पुरस्कार देकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मानित किया था।
इस दौरान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने एक लाख रुपये का चेक देकर पुरस्कृत किया था। उम्र में कम गौरी ने ऊंची सोच का परिचय देते हुए इनाम में मिले एक लाख रुपये देश सेवा में लगाने का संकल्प लिया और प्रधानमंत्री राहत कोष में दान कर मिसाल कायम की। (संवाद)

डॉ.प्रभात वर्मा। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD