{"_id":"e4a9a78d147350671fd5f3573b5ea0f8","slug":"car-gas-kit-fire-burning-factory-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कार की गैस किट में लगी आग, कारखाना जला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कार की गैस किट में लगी आग, कारखाना जला
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
Updated Mon, 01 Jun 2015 11:26 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शमसाबाद में बाडी मेकर के कारखाने में रविवार की रात खड़ी गैस किट लगी कार
विज्ञापन
को स्टार्ट करते ही आग लग गई। धू धूकर जल उठी कार में बैठे कारखाना मालिक
झुलस गए और पुत्र ने कार से कूदकर जान बचाई। आग के विकराल होने पर कारखाना
मालिक ने परिवार समेत आवास की दूसरी मंजिल पर पहुंच कर जान बचाई। जानकारी
मिलने पर पहुंची ने पड़ोस में खाली पड़े प्लाट से सीढ़ी लगाकर परिवार के
लोगों को बाहर निकाला। करीब ढाई घंटे बाद आग पर काबू पाया गया।
इस अग्निकांड में कारखाने में खड़े वाहन और जनरेटर जल गए। इस घटना में लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।
थाना शमसाबाद के पास हरिओम शर्मा का ट्रैक्टर-ट्राली बाडी बनाने का कारखाना है। इसके ऊपर ही वह परिवार समेत रहते हैं। हरिओम के मुताबिक रविवार रात करीब 10 बजे अपनी सैंट्रो कार से परिवार के साथ दिल्ली जाने को थे। वह और बेटा कार में बैठ गया, जबकि पत्नी व बेटी नीचे आ रही थीं। इस दौरान उन्होंने कार स्टार्ट की तो पीछे लगी एलपीजी किट में
आग लग गई। कार जलने लगी तो पीछे बैठा बेटा राजा कार से कूद गया लेकिन पिता हरिओम कार में ही फंस गए, जिससे वह झुलस गए। जैसे-तैसे वह बाहर निकले। तब तक आग ने पूरे कारखाने को चपेट में ले लिया। आग के कारण वह मुख्य गेट से नहीं निकल सके। इस पर वह परिवार के साथ छत की ओर भागे खड़े। उनकी सूचना पर पुलिस घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस भी मुख्य गेट से अंदर नहीं घुस सकी। इस पर कारखाना के पास खाली पड़े प्लाट में सीढ़ी लगाकर छत
पर पहुंची। पुलिस ने हरिओम शर्मा, उनके पुत्र राजा, पुत्री ज्योति, पत्नी पूजा और नौकर प्रमोद कुमार को सीढ़ी के सहारे कारखाने से बाहर निकाला। रात करीब 12.30 बजे मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड ने करीब ढाई घंटे की मशक्कत के बाद
आग पर काबू पाया लेकिन तब तक कारखाना में रखा सारा सामान जल गया। हरिओम शर्मा को नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया। हरिओम ने बताया कि आग में एक कार, एक ट्रैक्टर, तीन बड़े जनरेटर, एक बाइक, दो टायर और मशीनें जल गईं। उन्होंने बताया कि करीब 30 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
करीब से मौत का मंजर देख सिहर उठे
बाडी मेकर कारखाने में लगी भीषण आग ने परिजनों को दूसरी मंजिल पर कैद कर दिया। घर से निकलने का रास्ता बंद होने से परिजनों को आंखों के सामने मौत नाचती नजर आई। हालांकि पुलिस ने सीढ़ी के माध्यम से परिवार वालों को बचा लिया लेकिन हरिओम शर्मा घटना को याद कर सिहर उठते हैं। वह कहते हैं कि भगवान की कृपा और पुलिस कर्मियों की हिम्मत से वह लोग जिंदा जलने से बच पाए हैं।
थाने के पास गैराज में आग लगने के बाद हरिओम शर्मा का पूरा परिवार दूसरी मंजिल पर पहुंच गया था। नीचे लगी भीषण आग उन्हें कुछ कदम दूर मौत का अहसास करा रही थी। मौके पर पहुंची पुलिस ने जब पूरे परिवार को सकुशल सीढ़ी के सहारे बाहर निकाल लिया तो जान में जान आई। हालांकि आग का मंजर याद कर वह अभी भी सिहर उठते हैं। शर्मा कहते हैं कि जब वह पूरे परिवार के साथ दूसरी मंजिल के कमरे में पहुंचे तो यही बेचैनी थी कि आखिर कैसे बचेंगे। पुलिस ने
साहस का परिचय देते हुए पूरे परिवार को बचा लिया। हरिओम की पत्नी पूजा देवी कहती हैं कि नीचे आग की लपटें देख उनकी सांसें हलक में अटकी थीं। आधा घंटा तक वह भगवान को ही याद करती रहीं। पुत्र राजा बोले कि अगर पुलिस देर से आती तो वह लोग भी नहीं बचते। क्योंकि आसपास कोई मकान भी नहीं बने थे। ऐसे में आगे कुआं और पीछे खाई वाली बात थी।
सिलेंडर फटता तो होता बड़ा हादसा
शमसाबाद। सैंट्रों कार में लगी गैस किट में आग लगने से कारखाना में तो भीषण आग लग ही गई थी। लेकिन गनीमत यह रही कि गैस किट फटी नहीं। अगर ऐसा होता तो बड़ा हादसा भी हो सकता था।
फायर ब्रिगेड ढाई घंटे लेट पहुंची
कारखाना में रविवार रात करीब 10 बजे आग लगी। सूचना मिलने के बावजूद फायर ब्रिगेड रात करीब 12.30 बजे घटनास्थल पर पहुंची। कारखाना मालिक हरिओम शर्मा कहते हैं कि अगर फायर ब्रिगेड समय से आ जाती तो ज्यादा नुकसान नहीं होता।
इस अग्निकांड में कारखाने में खड़े वाहन और जनरेटर जल गए। इस घटना में लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।
थाना शमसाबाद के पास हरिओम शर्मा का ट्रैक्टर-ट्राली बाडी बनाने का कारखाना है। इसके ऊपर ही वह परिवार समेत रहते हैं। हरिओम के मुताबिक रविवार रात करीब 10 बजे अपनी सैंट्रो कार से परिवार के साथ दिल्ली जाने को थे। वह और बेटा कार में बैठ गया, जबकि पत्नी व बेटी नीचे आ रही थीं। इस दौरान उन्होंने कार स्टार्ट की तो पीछे लगी एलपीजी किट में
आग लग गई। कार जलने लगी तो पीछे बैठा बेटा राजा कार से कूद गया लेकिन पिता हरिओम कार में ही फंस गए, जिससे वह झुलस गए। जैसे-तैसे वह बाहर निकले। तब तक आग ने पूरे कारखाने को चपेट में ले लिया। आग के कारण वह मुख्य गेट से नहीं निकल सके। इस पर वह परिवार के साथ छत की ओर भागे खड़े। उनकी सूचना पर पुलिस घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस भी मुख्य गेट से अंदर नहीं घुस सकी। इस पर कारखाना के पास खाली पड़े प्लाट में सीढ़ी लगाकर छत
पर पहुंची। पुलिस ने हरिओम शर्मा, उनके पुत्र राजा, पुत्री ज्योति, पत्नी पूजा और नौकर प्रमोद कुमार को सीढ़ी के सहारे कारखाने से बाहर निकाला। रात करीब 12.30 बजे मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड ने करीब ढाई घंटे की मशक्कत के बाद
आग पर काबू पाया लेकिन तब तक कारखाना में रखा सारा सामान जल गया। हरिओम शर्मा को नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया। हरिओम ने बताया कि आग में एक कार, एक ट्रैक्टर, तीन बड़े जनरेटर, एक बाइक, दो टायर और मशीनें जल गईं। उन्होंने बताया कि करीब 30 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
करीब से मौत का मंजर देख सिहर उठे
बाडी मेकर कारखाने में लगी भीषण आग ने परिजनों को दूसरी मंजिल पर कैद कर दिया। घर से निकलने का रास्ता बंद होने से परिजनों को आंखों के सामने मौत नाचती नजर आई। हालांकि पुलिस ने सीढ़ी के माध्यम से परिवार वालों को बचा लिया लेकिन हरिओम शर्मा घटना को याद कर सिहर उठते हैं। वह कहते हैं कि भगवान की कृपा और पुलिस कर्मियों की हिम्मत से वह लोग जिंदा जलने से बच पाए हैं।
थाने के पास गैराज में आग लगने के बाद हरिओम शर्मा का पूरा परिवार दूसरी मंजिल पर पहुंच गया था। नीचे लगी भीषण आग उन्हें कुछ कदम दूर मौत का अहसास करा रही थी। मौके पर पहुंची पुलिस ने जब पूरे परिवार को सकुशल सीढ़ी के सहारे बाहर निकाल लिया तो जान में जान आई। हालांकि आग का मंजर याद कर वह अभी भी सिहर उठते हैं। शर्मा कहते हैं कि जब वह पूरे परिवार के साथ दूसरी मंजिल के कमरे में पहुंचे तो यही बेचैनी थी कि आखिर कैसे बचेंगे। पुलिस ने
साहस का परिचय देते हुए पूरे परिवार को बचा लिया। हरिओम की पत्नी पूजा देवी कहती हैं कि नीचे आग की लपटें देख उनकी सांसें हलक में अटकी थीं। आधा घंटा तक वह भगवान को ही याद करती रहीं। पुत्र राजा बोले कि अगर पुलिस देर से आती तो वह लोग भी नहीं बचते। क्योंकि आसपास कोई मकान भी नहीं बने थे। ऐसे में आगे कुआं और पीछे खाई वाली बात थी।
सिलेंडर फटता तो होता बड़ा हादसा
शमसाबाद। सैंट्रों कार में लगी गैस किट में आग लगने से कारखाना में तो भीषण आग लग ही गई थी। लेकिन गनीमत यह रही कि गैस किट फटी नहीं। अगर ऐसा होता तो बड़ा हादसा भी हो सकता था।
फायर ब्रिगेड ढाई घंटे लेट पहुंची
कारखाना में रविवार रात करीब 10 बजे आग लगी। सूचना मिलने के बावजूद फायर ब्रिगेड रात करीब 12.30 बजे घटनास्थल पर पहुंची। कारखाना मालिक हरिओम शर्मा कहते हैं कि अगर फायर ब्रिगेड समय से आ जाती तो ज्यादा नुकसान नहीं होता।