{"_id":"580265394f1c1b4a2c28f945","slug":"buddhist-stupa-in-the-temple-on-the-fragmentary","type":"story","status":"publish","title_hn":"जीर्ण शीर्ण अवस्था में बौद्ध स्तूप पर बना मंदिर।","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जीर्ण शीर्ण अवस्था में बौद्ध स्तूप पर बना मंदिर।
अमर उजाला ब्यूरो/फर्रुखाबाद
Updated Sat, 15 Oct 2016 10:49 PM IST
विज्ञापन
संकिसा में हो रहे बौद्ध महोत्सव में मंचासीन अतिथि।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
संकिसा में दो दिवसीय बुद्ध महोत्सव शनिवार से शुरू हो गया है। यहां सुबह से ही बौद्ध भिक्षुओं का आना शुरू हो गया है। वर्मा, श्रीलंका, दक्षिण कोरिया समेत कई अन्य देशों से बौद्घ अनुयायी यहां डेरा डाले हैं। संकिसा में मेले लगा है। चारों तरफ तथागत की जय-जयकार हो रही है। रविवार को यहां मुख्य कार्यक्रम होगा।
शरद पूर्णिमा महोत्सव के तहत संकिसा में चलने वाले दो दिवसीय कार्यक्रम को लेकर शनिवार सुबह से ही बौद्ध भिक्षुयों का यहां आगमन शुरू हो गया। इलाके में गेरुआ वस्त्र धारण किए तमाम भिक्षु दिखाई पड़ रहे हैं। शनिवार के कार्यक्रम की शुरुआत उप जिलाधिकारी सदर सुरेंद्र सिंह ने फीता काटकर किया।
उन्होंने कहा कि तथागत की वजह से संकिसा विश्व के मानचित्र पर पर्यटन के रूप में उभरा है। भगवान बुद्घ ने यहां आकर कुछ समय तक अखंड साधना की थी। उनकी इस साधना के कारण संकिसा तीर्थ बन गया है।
विज्ञापन
एसडीएम ने कहा कि कभी यहां पूजा-अर्चना को लेकर विवाद हुआ करता था लेकिन इस विवाद को धीरे-धीरे लोगों ने समझा और उसे समाप्त कर दिया। असलियत में देखा जाए तो बुद्घ किसी एक के नहीं, बल्कि पूरे विश्व के अध्यात्म सम्राट हैं।
इस अवसर पर कर्मवीर शाक्य, शिवशरन शाक्य, लालबिहारी, भारती बौद्घ समेत भारी संख्या में बौद्घ अनुयायी मौजूद रहे।
शरद पूर्णिमा महोत्सव के तहत संकिसा में चलने वाले दो दिवसीय कार्यक्रम को लेकर शनिवार सुबह से ही बौद्ध भिक्षुयों का यहां आगमन शुरू हो गया। इलाके में गेरुआ वस्त्र धारण किए तमाम भिक्षु दिखाई पड़ रहे हैं। शनिवार के कार्यक्रम की शुरुआत उप जिलाधिकारी सदर सुरेंद्र सिंह ने फीता काटकर किया।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि तथागत की वजह से संकिसा विश्व के मानचित्र पर पर्यटन के रूप में उभरा है। भगवान बुद्घ ने यहां आकर कुछ समय तक अखंड साधना की थी। उनकी इस साधना के कारण संकिसा तीर्थ बन गया है।
विज्ञापन
एसडीएम ने कहा कि कभी यहां पूजा-अर्चना को लेकर विवाद हुआ करता था लेकिन इस विवाद को धीरे-धीरे लोगों ने समझा और उसे समाप्त कर दिया। असलियत में देखा जाए तो बुद्घ किसी एक के नहीं, बल्कि पूरे विश्व के अध्यात्म सम्राट हैं।
इस अवसर पर कर्मवीर शाक्य, शिवशरन शाक्य, लालबिहारी, भारती बौद्घ समेत भारी संख्या में बौद्घ अनुयायी मौजूद रहे।