{"_id":"657b48bb57866c5d93064113","slug":"biochemistry-machine-broken-liver-and-kidney-tests-stopped-farrukhabad-news-c-222-1-frk1001-6179-2023-12-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Farrukhabad News: बायोकेमिस्ट्री मशीन खराब, लीवर व किडनी की जांचें बंद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Farrukhabad News: बायोकेमिस्ट्री मशीन खराब, लीवर व किडनी की जांचें बंद
विज्ञापन
फर्रुखाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया महिला अस्पताल के जिम्मेदारों की लापरवाही से चार दिन से लैब में लगी बायोकेमिस्ट्री मशीन खराब है। इससे लीवर, किडनी समेत 16 जांचें बंद हैं। रोजाना औसतन करीब 90 मरीजों की जांच के लिए भटकना पड़ रहा है।
लोहिया महिला अस्पताल की लैब में आने वाले मरीजों के लिए अलग से जांच की व्यवस्था की गई है। इसमें लगी बायोकेमिस्ट्री मशीन के सॉफ्टवेयर में सोमवार सुबह ही तकनीकि दिक्कत आ गई थी। इसके बाद लैब के जिम्मेदारों ने अस्पताल प्रशासन को सूचना दी। चार दिन बीतने के बाद भी बुधवार शाम तक मशीन को सही नहीं किया जा सका। इससे किडनी, लीवर, कार्डियो, इन्फेक्शन, बच्चों का इन्फेक्शन, पीलिया, गठिया समेत करीब 16 बीमारियों की जांच होना बंद हो गई हैं।
इन बीमारियों से औसतन रोजाना 90 मरीजों का आना होता है। बावजूद इसके अस्पताल प्रशासन ने इस मशीन को सही कराने की जरूरत नहीं समझी। महिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को लैब के कर्मचारी पुरुष अस्पताल में भेजते हैं। यहां भीड़ होने की वजह से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
विज्ञापन
स्थिति यह है कि परेशानी से बचने के लिए कई महिला मरीज निजी लैब में जाने को मजबूर होते हैं। सीएमएस डॉ. कैलाश दुल्हानी ने पहले मशीन खराब होने से अनभिज्ञता जताई। जब तीन दिन से खराब होने की जानकारी दी गई, तो बताया कि वह अभी दिखवाकर सही कराने के लिए इंजीनियर को बुलाएंगे।
विज्ञापन
लोहिया महिला अस्पताल की लैब में आने वाले मरीजों के लिए अलग से जांच की व्यवस्था की गई है। इसमें लगी बायोकेमिस्ट्री मशीन के सॉफ्टवेयर में सोमवार सुबह ही तकनीकि दिक्कत आ गई थी। इसके बाद लैब के जिम्मेदारों ने अस्पताल प्रशासन को सूचना दी। चार दिन बीतने के बाद भी बुधवार शाम तक मशीन को सही नहीं किया जा सका। इससे किडनी, लीवर, कार्डियो, इन्फेक्शन, बच्चों का इन्फेक्शन, पीलिया, गठिया समेत करीब 16 बीमारियों की जांच होना बंद हो गई हैं।
विज्ञापन
इन बीमारियों से औसतन रोजाना 90 मरीजों का आना होता है। बावजूद इसके अस्पताल प्रशासन ने इस मशीन को सही कराने की जरूरत नहीं समझी। महिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को लैब के कर्मचारी पुरुष अस्पताल में भेजते हैं। यहां भीड़ होने की वजह से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
विज्ञापन
स्थिति यह है कि परेशानी से बचने के लिए कई महिला मरीज निजी लैब में जाने को मजबूर होते हैं। सीएमएस डॉ. कैलाश दुल्हानी ने पहले मशीन खराब होने से अनभिज्ञता जताई। जब तीन दिन से खराब होने की जानकारी दी गई, तो बताया कि वह अभी दिखवाकर सही कराने के लिए इंजीनियर को बुलाएंगे।