फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Farrukhabad News ›   Ambulance playing with the lives of patients with incomplete resources

Farrukhabad News: अधूरे संसाधनों संग मरीजों की जान से खेल रहीं एंबुलेंस

Wed, 09 Aug 2023 11:28 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 09 Aug 2023 11:28 PM IST
विज्ञापन
Ambulance playing with the lives of patients with incomplete resources
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

फर्रुखाबाद। जनपद में जिस तरह झोलाछाप नर्सिंगहोम चला रहे है, उसी तरह अधूरे संसाधनों के साथ निजी एंबुलेंस भी मरीजों की जान से खेल रहीं हैं। अधिकांश पर न तो पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती है और न ही लाइफ सेविंग उपकरण। मिलीभगत के खेल में टैक्स भी चोरी हो रहा है।

स्वास्थ्य विभाग व एआरटीओ की मिलीभगत से जिले में करीब 300 निजी एंबुलेंस संचालित हैं। यह एंबुलेंस कस्बों से शहर और शहर के निजी व सरकारी अस्पतालों से गैर-जनपद के अस्पतालों में मरीजों को ले जा रही हैं। अधिकांश एंबुलेंस में न तो आक्सीजन सिलिंडर है और न ही जीवन रक्षक दवाएं।
विज्ञापन

कई एंबुलेंस में तो बिना आक्सीजन के रखे सिलिंडर मानकों को धोखा दे रहे हैं। नियमानुसार एंबुलेंस में पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती होनी चाहिए, लेकिन अधिकांश में प्रशिक्षित स्टाफ नहीं है। सही मायने में तो एंबुलेंस का नाम देकर टैक्सी की तरह फर्राटा भरकर मोटी कमाई की जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

खास बात तो यह है कि बिना पंजीकरण अस्पताल चलाने वाले झोलाछाप भी मरीजों को गंभीर हालत में रेफर कर अपनी ही एंबुलेंस से गैर जनपद भेज देते हैं। इससे अस्पताल में परिजन हंगामा भी नहीं कर पाते और एंबुलेंस से उन्हें दोहरी कमाई भी हो जाती है।
साथ ही कई बार गंभीर मरीज बिना ऑक्सीजन व जीवनरक्षक दवाओं के अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं। अधिकतर ग्रामीण मरीज जानकारी के अभाव में परिजन एंबुलेंस संचालकों से कुछ कह भी नहीं पाते।
कम खर्च पर होता पंजीकरण, टैक्स भी फ्री
एंबुलेंस चलाना कमाई का अच्छा जरिया बन गया है। इसका एआरटीओ में कम कीमत पर पंजीकरण हो जाता है। इसके बाद कहीं भी मरीज ले जाने पर रोड टैक्स, टोल टैक्स की भी पूरी छूट मिलती है। अधूरे मानकों पर एबुलेंस चलाकर मरीजों के परिजनों से मनमाने रुपये वसूले जा रहे हैं।

यह होते हैं मानक
एंबुलेंस में जीवन रक्षक दवाएं व उपकरणों सहित टाइप ए में 33, टाइप बी में 34, टाइप सी में 63 व टाइप डी में 70 बिंदुओं पर मानक निर्धारित हैं। इसमें स्ट्रेचर, पैरा मेडिकल स्टाफ, आक्सीजन, सक्शन मशीन, बीपी मशीन, थर्मामीटर, आक्सीमीटर, इंजेक्शन, नेबुलाइजेशन, कैथेटर, वोमिटिंग बैग, यूरिन बोतल, गैस्टिक ट्यूब व दवाएं आदि शामिल हैं।
डीएम के आदेश पर भी एंबुलेंस की जांच नहीं
जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह ने गत माह दोनों विभागों के अधिकारियों से संयुक्त टीम बनाकर जनपद में सभी निजी एंबुलेंस की जांच कर मानक पूरे न होने पर कार्रवाई करने के आदेश दिए थे। इसके बावजूद जांच व कार्रवाई न होने से डीएम का आदेश बेअसर साबित हो रहा है।

एक दूसरे पर थोप रहे जिम्मेदारी
एंबुलेंस के नोडल अधिकारी डिप्टी सीएमओ डॉ.आरसी माथुर ने बताया कि एआरटीओ से एंबुलेंस की सूची मांगी गई थी, लेकिन उपलब्ध नहीं कराई गई। उन्होंने जांच कमेटी में एआरटीओ से एक जिम्मेदार को नियुक्त करने को कहा था। इससे सभी मानकों की मौके पर जांच कर कार्रवाई की जा सके। अभी तक जांच कमेटी न बन पाने से चेकिंग अभियान नहीं चलाया जा सका। स्वत: जांच कराने वाले एंबुलेंस के मानक चेक कर रिपोर्ट बना दी जाती है।

दूसरी ओर एआरटीओ बृजेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि कुल 161 पंजीकृत एंबुलेंस की सूची स्वास्थ्य विभाग को भेजी जा चुकी है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट पर ही फिटनेस व नवीनीकरण किया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed