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सास के कहने से नहीं हो सकता ‘तलाक’
Farrukhabad
Updated Thu, 11 Jul 2013 05:31 AM IST
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फर्रुखाबाद। मर्चेंट नेवी इंजीनियर की मौत के बाद उसकी जायदाद को लेकर सास-बहू में छिड़ा विवाद नए मोड़ पर आ गया है। मरकजी दाऊल इफ्ता के मुफ्ती ने फतवे जारी किया है कि सास के कहने भर से तलाक नहीं माना जा सकता है। उसने यह भी कहा कि सास की ओर से तलाक के संबंध में पेश की गई गवाही को भी नहीं माना जा सकता।
मालूम हो कि फतेहगढ़ के सिविल लाइन निवासी सैय्यद शकील अहमद मर्चेंट नेवी में इलेक्ट्रिकल इंजीनियर थे। उनकी शादी करीब 13 साल पहले यासमीन रईस के साथ हुई। दो साल पहले सिंगापुर में नौकरी के दौरान सैय्यद शकील अहमद की मौत हो गई। मर्चेंट नेवी के साथ ही विभिन्न इंश्योरेंस कंपनियों की ओर से मुआवजे के संबंध में पत्र भेजे गए। मुआवजा को लेकर शकील की पत्नी और मां के बीच विवाद हो गया। मां ने मुआवजे की मांग की तो पत्नी ने आपत्ति लगा दी। सिंगापुर स्थित भारतीय उच्चायोग के जरिए यह मामला जिला प्रशासन के पास पहुंचा। मामले की जांच तहसीलदार सदर आरपी चौधरी को सौंपी गई। उन्होंने शकील की मां की ओर से लगाए गए दस्तावेजों के संबंध में शकील की पत्नी यासमीन का भी पक्ष जानने की कोशिश की। इस दौरान यासमीन ने दारुल इफ्ता दरगाह बरेली पहुंच कर फतवा लेने के लिए सवाल डाला। सवाल में कहा गया कि क्या सास के कहने और बतौर गवाह छोटे बेटे को पेश करने से तलाक मान लिया जाएगा। उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए यह भी बताया था कि शौहर की मौत के बाद उनके फतेहा आदि कार्यक्रमों में वह मौजूद रही और इद्दत भी गुजारी। सास के कहने से महर भी माफ किए। इस पर मरकजी दारुल इफ्ता के मुफ्ती मुहम्मद अफजाल रिजवी ने फतवा जारी किया। इसमें कहा कि तलाक के लिए शौहर का इकरार और गवाहों की शरई गवाही की मान्य होती है। सास के कहने भर से तलाक नहीं माना जाएगा। गवाही को भी मान्यता नहीं दी जा सकती है। इस फतवे को मृतक की पत्नी यासमीन रईस ने जांच अधिकारी को उपलब्ध करा दिया है।
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मालूम हो कि फतेहगढ़ के सिविल लाइन निवासी सैय्यद शकील अहमद मर्चेंट नेवी में इलेक्ट्रिकल इंजीनियर थे। उनकी शादी करीब 13 साल पहले यासमीन रईस के साथ हुई। दो साल पहले सिंगापुर में नौकरी के दौरान सैय्यद शकील अहमद की मौत हो गई। मर्चेंट नेवी के साथ ही विभिन्न इंश्योरेंस कंपनियों की ओर से मुआवजे के संबंध में पत्र भेजे गए। मुआवजा को लेकर शकील की पत्नी और मां के बीच विवाद हो गया। मां ने मुआवजे की मांग की तो पत्नी ने आपत्ति लगा दी। सिंगापुर स्थित भारतीय उच्चायोग के जरिए यह मामला जिला प्रशासन के पास पहुंचा। मामले की जांच तहसीलदार सदर आरपी चौधरी को सौंपी गई। उन्होंने शकील की मां की ओर से लगाए गए दस्तावेजों के संबंध में शकील की पत्नी यासमीन का भी पक्ष जानने की कोशिश की। इस दौरान यासमीन ने दारुल इफ्ता दरगाह बरेली पहुंच कर फतवा लेने के लिए सवाल डाला। सवाल में कहा गया कि क्या सास के कहने और बतौर गवाह छोटे बेटे को पेश करने से तलाक मान लिया जाएगा। उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए यह भी बताया था कि शौहर की मौत के बाद उनके फतेहा आदि कार्यक्रमों में वह मौजूद रही और इद्दत भी गुजारी। सास के कहने से महर भी माफ किए। इस पर मरकजी दारुल इफ्ता के मुफ्ती मुहम्मद अफजाल रिजवी ने फतवा जारी किया। इसमें कहा कि तलाक के लिए शौहर का इकरार और गवाहों की शरई गवाही की मान्य होती है। सास के कहने भर से तलाक नहीं माना जाएगा। गवाही को भी मान्यता नहीं दी जा सकती है। इस फतवे को मृतक की पत्नी यासमीन रईस ने जांच अधिकारी को उपलब्ध करा दिया है।
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