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एनयूएलएम की सुस्त चाल से महिलाएं नहीं बन पा रहीं स्वावलंबी
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फर्रुखाबाद। राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन योजना की सुस्त चाल के चलते महिलाएं स्वावलंबी नहीं बन पा रही हैं। चार साल में निर्धारित 350 लक्ष्य के सापेक्ष अभी तक सिर्फ 132 स्वयं सहायता समूह का ही गठन किया गया है। यही नहीं मात्र 39 समूहों को ही रिवाल्विंग फंड दिया गया है।
राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत महिलाओं और युवतियों के दस सदस्यीय समूह गठित करके उन्हें सिलाई, कढ़ाई और ब्यूटीशियन समेत विभिन्न ट्रेडों में तीन माह का प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद प्रत्येक समूह के खाते में दस हजार रुपये का रिवाल्विंग फंड दिया जाता है। इसके साथ ही महिलाओं को रोजगार स्थापित करने के लिए दो से दस लाख तक का ऋण भी दिए जाने का प्राविधान है। लेकिन फर्रुखाबाद के राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन कार्यालय का हाल काफी सुस्त है। वैसे तो हर साल 100 समूह गठित करने का लक्ष्य दिया जाता है लेकिन वर्ष 2018-19 में लक्ष्य घटाकर 50 कर दिया गया। यानी चार साल में 350 समूहों को गठित करने का लक्ष्य मिला लेकिन जिले में अभी तक सिर्फ 132 समूह ही गठित किए गए हैं।
डूडा सूत्रों की मानें तो डूडा कार्यालय में बीते दिनों आयोजित समीक्षा बैठक में एनयूएलएम की सुस्त चाल को देखकर अफसरों को सुधार के निर्देश भी दिए गए थे। लेकिन इसमें सुधार होता दिख नहीं रहा है। इस संबंध में मिशन प्रबंधक मेघा गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2018-19 में लक्ष्य घटाकर 50 कर दिया गया है। जिसमें अभी तक 132 समूहों का गठन कर 39 समूहों को रिवाल्विंग फंड ही दिया गया है। वित्तीय वर्ष खत्म होने तक लक्ष्य पूरा कर दिया जाएगा।
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वित्तीय वर्ष लक्ष्य पूर्ति
2015-16 100 15
2016-17 100 42
2017-18 100 60
2018-19 100 15
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राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत महिलाओं और युवतियों के दस सदस्यीय समूह गठित करके उन्हें सिलाई, कढ़ाई और ब्यूटीशियन समेत विभिन्न ट्रेडों में तीन माह का प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद प्रत्येक समूह के खाते में दस हजार रुपये का रिवाल्विंग फंड दिया जाता है। इसके साथ ही महिलाओं को रोजगार स्थापित करने के लिए दो से दस लाख तक का ऋण भी दिए जाने का प्राविधान है। लेकिन फर्रुखाबाद के राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन कार्यालय का हाल काफी सुस्त है। वैसे तो हर साल 100 समूह गठित करने का लक्ष्य दिया जाता है लेकिन वर्ष 2018-19 में लक्ष्य घटाकर 50 कर दिया गया। यानी चार साल में 350 समूहों को गठित करने का लक्ष्य मिला लेकिन जिले में अभी तक सिर्फ 132 समूह ही गठित किए गए हैं।
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डूडा सूत्रों की मानें तो डूडा कार्यालय में बीते दिनों आयोजित समीक्षा बैठक में एनयूएलएम की सुस्त चाल को देखकर अफसरों को सुधार के निर्देश भी दिए गए थे। लेकिन इसमें सुधार होता दिख नहीं रहा है। इस संबंध में मिशन प्रबंधक मेघा गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2018-19 में लक्ष्य घटाकर 50 कर दिया गया है। जिसमें अभी तक 132 समूहों का गठन कर 39 समूहों को रिवाल्विंग फंड ही दिया गया है। वित्तीय वर्ष खत्म होने तक लक्ष्य पूरा कर दिया जाएगा।
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वित्तीय वर्ष लक्ष्य पूर्ति
2015-16 100 15
2016-17 100 42
2017-18 100 60
2018-19 100 15