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पंचायत की दुकानों के आवंटन में 7 लाख का गबन
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 14 Jan 2018 12:13 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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नगर पंचायत की दुकानों के आवंटन को जमा हुई जमानत राशि में 6.63 लाख रुपये के गबन का मामला सामने आया है। दुकानों की आवंटन प्रक्रिया में 50 लोगों ने आवेदन किया था। पंचायत के खाते में प्रति आवेदन 40 हजार रुपये जमानत राशि के हिसाब से करीब 20 लाख रुपये जमा हुए। जांच में खाते में कुल 13.39 लाख रुपये जमा होने का पता चला। बकाया रुपये कहां गए, इसका कोई हिसाब-किताब नहीं है। नवनिर्वाचित अध्यक्ष के दुकान आवंटन प्रक्रिया निरस्त करने पर पूरे मामले का खुलासा हुआ। नगर पंचायत अध्यक्ष प्रीती माहेश्वरी का कहना है कि जमानत राशि में गोलमाल का मामला सामने आया है। जांच में दोषियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।
नगर पंचायत कमालगंज के नलकूप नंबर एक और दो एक ही परिसर में है। यहां खाली पड़ी जमीन पर पूर्व अध्यक्ष राजबेटी शंखवार के कार्यकाल में 2015-16 में 10 दुकानों का निर्माण कराया गया था। ताकि दुकानों को उठाकर नगर पंचायत की आय बढ़ाई जा सके। इन दुकानों की आवंटन प्रक्रिया 2017 में शुरू हुई। 12 से 18 अक्तूबर तक चली आवंटन प्रक्रिया में 54 लोगों ने 50-50 रुपये जमा कर फार्म लिए थे। इसमें 50 लोगों ने 40-40 हजार रुपये जमानत राशि जमा की थी। कुल 20 लाख 2700 नगर पंचायत में जमा हुआ। 20 अक्तूबर को लकी ड्रा से दुकानों का आवंटन होना था। इस दौरान विधायक नागेंद्र सिंह राठौर ने गलत तरीके से लिए गए आवेदन का आरोप लगाकर आपत्ति लगाई। तभी नगर निकाय चुनाव के कारण दुकानों के आवंटन प्रक्रिया को रोक दिया गया। नवनिर्वाचित अध्यक्ष प्रीती माहेश्वरी ने शपथ लेने के बाद दुकान आवंटन प्रक्रिया को निरस्त कर दिया और जमा हुए रुपये आवेदकों को वापस करने के निर्देश दिए। तब सरकारी खाता देखा गया तो उसमें 20 लाख 2700 के स्थान पर 13.39 लाख रुपये जमा होने का मामला सामने आया। 6.63 लाख रुपये खाते में जमा नहीं किए गए। तब घोटाला सामने आया। इससे कार्यालय के कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
नगर पंचायत की दुकानों के लिए पूर्व चेयरमैन राजबेटी शंखवार ने खुद भी आवेदन किया और अपने मिलने वालों का आवेदन कराया था। इसके अलावा पूर्व चेयरमैन गोपीराम के पुत्र दीनदयाल, कोटेददार सुमंत कुमार समेत 54 लोगों ने आवेदन किया था। इसमें 50 ने जमानत राशि जमा की थी। अपने चहेतों के आवेदन कराए जाने पर विधायक ने आपत्ति उठाकर आवंटन पर रोक लगवाई थी।
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अधिशासी अधिकारी के निर्देश पर लगभग 6.60 लाख रुपये कर्मचारियों को वेतन दिए जाने के लिए रोक लिया था। जो वेतन के रुप में कर्मचारियों को बांट दिया गया। वह जमा नहीं हुआ। और कोई जानकारी नहीं है।
पवन श्रीवास्तव, लिपिक
जो रुपया खाते में जमा नहीं है, वह रुपया कर्मचारियों में वेतन के रूप में बांट दिया गया था। इसके अलावा कोई जानकारी नहीं है। केएन रावत, अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत
दुकान आवंटन की जमा हुई जमानत राशि में गोलमाल का मामला सामने आया है। इस कारण पत्रावली तलब की है। अभी तक पूरे अभिलेख नहीं मिले है। इसकी जांच कराई जाएगी। जो दोषी होकर उसके खिलाफ गबन की रिपोर्ट दर्ज होगी। प्रीती माहेश्वरी,
कर्मचारियों को वेतन उनके खातों में सीधे भेजा जाता है। नगद में भुगतान करने का कोई प्रावधान नहीं है। वेतन के लिए मद अलग होती है। सरकारी धन खाते में पूरा जमा नहीं किया गया, यह गबन की श्रेणी में आता है। इसकी जांच की जाएगी। जो दोषी होंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। अजीत कुमार,एसडीएम सदर
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नगर पंचायत कमालगंज के नलकूप नंबर एक और दो एक ही परिसर में है। यहां खाली पड़ी जमीन पर पूर्व अध्यक्ष राजबेटी शंखवार के कार्यकाल में 2015-16 में 10 दुकानों का निर्माण कराया गया था। ताकि दुकानों को उठाकर नगर पंचायत की आय बढ़ाई जा सके। इन दुकानों की आवंटन प्रक्रिया 2017 में शुरू हुई। 12 से 18 अक्तूबर तक चली आवंटन प्रक्रिया में 54 लोगों ने 50-50 रुपये जमा कर फार्म लिए थे। इसमें 50 लोगों ने 40-40 हजार रुपये जमानत राशि जमा की थी। कुल 20 लाख 2700 नगर पंचायत में जमा हुआ। 20 अक्तूबर को लकी ड्रा से दुकानों का आवंटन होना था। इस दौरान विधायक नागेंद्र सिंह राठौर ने गलत तरीके से लिए गए आवेदन का आरोप लगाकर आपत्ति लगाई। तभी नगर निकाय चुनाव के कारण दुकानों के आवंटन प्रक्रिया को रोक दिया गया। नवनिर्वाचित अध्यक्ष प्रीती माहेश्वरी ने शपथ लेने के बाद दुकान आवंटन प्रक्रिया को निरस्त कर दिया और जमा हुए रुपये आवेदकों को वापस करने के निर्देश दिए। तब सरकारी खाता देखा गया तो उसमें 20 लाख 2700 के स्थान पर 13.39 लाख रुपये जमा होने का मामला सामने आया। 6.63 लाख रुपये खाते में जमा नहीं किए गए। तब घोटाला सामने आया। इससे कार्यालय के कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
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नगर पंचायत की दुकानों के लिए पूर्व चेयरमैन राजबेटी शंखवार ने खुद भी आवेदन किया और अपने मिलने वालों का आवेदन कराया था। इसके अलावा पूर्व चेयरमैन गोपीराम के पुत्र दीनदयाल, कोटेददार सुमंत कुमार समेत 54 लोगों ने आवेदन किया था। इसमें 50 ने जमानत राशि जमा की थी। अपने चहेतों के आवेदन कराए जाने पर विधायक ने आपत्ति उठाकर आवंटन पर रोक लगवाई थी।
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अधिशासी अधिकारी के निर्देश पर लगभग 6.60 लाख रुपये कर्मचारियों को वेतन दिए जाने के लिए रोक लिया था। जो वेतन के रुप में कर्मचारियों को बांट दिया गया। वह जमा नहीं हुआ। और कोई जानकारी नहीं है।
पवन श्रीवास्तव, लिपिक
जो रुपया खाते में जमा नहीं है, वह रुपया कर्मचारियों में वेतन के रूप में बांट दिया गया था। इसके अलावा कोई जानकारी नहीं है। केएन रावत, अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत
दुकान आवंटन की जमा हुई जमानत राशि में गोलमाल का मामला सामने आया है। इस कारण पत्रावली तलब की है। अभी तक पूरे अभिलेख नहीं मिले है। इसकी जांच कराई जाएगी। जो दोषी होकर उसके खिलाफ गबन की रिपोर्ट दर्ज होगी। प्रीती माहेश्वरी,
कर्मचारियों को वेतन उनके खातों में सीधे भेजा जाता है। नगद में भुगतान करने का कोई प्रावधान नहीं है। वेतन के लिए मद अलग होती है। सरकारी धन खाते में पूरा जमा नहीं किया गया, यह गबन की श्रेणी में आता है। इसकी जांच की जाएगी। जो दोषी होंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। अजीत कुमार,एसडीएम सदर