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टेंडर से बचने को वर्कआर्डर पर 21 राजकीय नलकूपों का निर्माण
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नलकूप विभाग में बंदरबांट के खेल में वर्षों से टेंडर प्रक्रिया को ही दरकिनार किया जा रहा है। सीडीओ के आदेश पर तीन माह से चल रही जांच अब अंतिम दौर में है। तीन वर्ष में करोड़ों की लागत से 21 राजकीय नलकूपों का निर्माण वर्कआर्डर पर ही कराया गया। उसमें भी चहेती फर्मों को काम दिया गया। इसके अलावा भी कई वित्तीय अनियमितताएं पकड़ी गईं। इससे जिम्मेदारों सहित 12 कर्मचारी कार्रवाई की रडार पर आ गए हैं।
नलकूप विभाग में फर्जी वर्कआर्डर पर चहेती फर्म को भुगतान करने की शिकायत पर 25 जुलाई को मुख्य विकास अधिकारी डा.राजेंद्र पैंसिया ने छापा मारा। स्टोर व वर्कआर्डर से संबंधित कोई अभिलेख न दिखाए जाने पर उन्होंने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी। कमेटी ने अभिलेख देखे तो कैशबुक सहित अनियमितताओं की परतें खुलती चली गईं।
इसके बाद 25 बिंदुओं पर सूचना मांगी गईं तो कई बार नलकूप विभाग ने गुमराह किया। अब जांच अंतिम दौर में है। सूत्रों से पता चला है कि तीन वर्ष में 21 नलकूपों का निर्माण कराया गया। करीब तीन करोड़ के काम में एक भी टेंडर नहीं हुआ। लाखों के काम एक ही फर्म को कई दिनांक में 20 हजार से कम के वर्कआर्डर पर दे दिए गए।
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कुछ चहेती फर्मों से ही यह काम कराकर सरकारी धन का बंदरबांट किया गया। इसमें जीएसटी भी नहीं जमा किया गया। इसके अलावा रिबोर, नलकूपों की मरम्मत आदि करोड़ों के कार्य भी वर्कआर्डर के जरिए ही कराए गए। इस पूरे प्रकरण में साहब व लिपिक सहित एक दर्जन जिम्मेदार कार्रवाई के लपेटे में हैं।
कर्मचारी के परिजनों की फर्म पर भी हुआ काम
नलकूप विभाग के एक कर्मचारी की पत्नी व बेटे के नाम से फर्म को लाखों का काम वर्कआर्डर पर दिया गया। उसे विभागीय अधिकारी बचाने के प्रयास में जुटे हैं। जांच टीम को सूचना देने के नाम पर गुमराह किया जा रहा है।
सहायक अभियंता अमर सिंह ने बताया कि सीडीओ के आदेश पर शिवा इंजीनियरिंग वर्क्स व नारायण इंटरप्राइजेज को नोटिस भेजकर संचालक का नाम मांगा गया था। नोटिस का कोई जवाब न मिलने पर दोनों फर्मों को काम देना बंद कर दिया गया है। कर्मचारी के परिजनों के नाम कौन सी फर्म है, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।
सेटिंग के जरिये बचने का दावा
नलकूप विभाग के कुछ कर्मचारी कार्रवाई के घेरे में हैं। इसके बावजूद उनके हौसले कम नहीं हुए। विभागीय सूत्रों के अनुसार वह कर्मचारी अपनी पहुंच व सेटिंग के बलबूते कार्रवाई न होने का दावा कर रहे हैं। इसको लेकर आपस में ही नोकझोंक तक की नौबत आ चुकी है।
कार्यमुक्त होने के बाद भी स्टोर जेई डटा
नलकूप विभाग के स्टोर का चार्ज अवर अभियंता रूपकिशोर के पास था। जांच शुरू होने के बाद उनका स्थानांतरण हुआ। करीब दो माह पूर्व उन्हें कार्यमुक्त भी कर दिया गया। इसके बावजूद किसी अन्य जेई को चार्ज न देकर वही स्टोर में काबिज हैं। इसके अलावा वर्षों के डटे प्रभारियों का स्थानांतरण तो दूर की बात पटल परिवर्तन तक नहीं किया गया।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
मुख्य विकास अधिकारी डा.राजेंद्र पैंसिया ने बताया कि जांच रिपोर्ट तैयार की जा रही है। सरकारी धन के दुरुपयोग व वित्तीय अनियमितता में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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नलकूप विभाग में फर्जी वर्कआर्डर पर चहेती फर्म को भुगतान करने की शिकायत पर 25 जुलाई को मुख्य विकास अधिकारी डा.राजेंद्र पैंसिया ने छापा मारा। स्टोर व वर्कआर्डर से संबंधित कोई अभिलेख न दिखाए जाने पर उन्होंने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी। कमेटी ने अभिलेख देखे तो कैशबुक सहित अनियमितताओं की परतें खुलती चली गईं।
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इसके बाद 25 बिंदुओं पर सूचना मांगी गईं तो कई बार नलकूप विभाग ने गुमराह किया। अब जांच अंतिम दौर में है। सूत्रों से पता चला है कि तीन वर्ष में 21 नलकूपों का निर्माण कराया गया। करीब तीन करोड़ के काम में एक भी टेंडर नहीं हुआ। लाखों के काम एक ही फर्म को कई दिनांक में 20 हजार से कम के वर्कआर्डर पर दे दिए गए।
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कुछ चहेती फर्मों से ही यह काम कराकर सरकारी धन का बंदरबांट किया गया। इसमें जीएसटी भी नहीं जमा किया गया। इसके अलावा रिबोर, नलकूपों की मरम्मत आदि करोड़ों के कार्य भी वर्कआर्डर के जरिए ही कराए गए। इस पूरे प्रकरण में साहब व लिपिक सहित एक दर्जन जिम्मेदार कार्रवाई के लपेटे में हैं।
कर्मचारी के परिजनों की फर्म पर भी हुआ काम
नलकूप विभाग के एक कर्मचारी की पत्नी व बेटे के नाम से फर्म को लाखों का काम वर्कआर्डर पर दिया गया। उसे विभागीय अधिकारी बचाने के प्रयास में जुटे हैं। जांच टीम को सूचना देने के नाम पर गुमराह किया जा रहा है।
सहायक अभियंता अमर सिंह ने बताया कि सीडीओ के आदेश पर शिवा इंजीनियरिंग वर्क्स व नारायण इंटरप्राइजेज को नोटिस भेजकर संचालक का नाम मांगा गया था। नोटिस का कोई जवाब न मिलने पर दोनों फर्मों को काम देना बंद कर दिया गया है। कर्मचारी के परिजनों के नाम कौन सी फर्म है, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।
सेटिंग के जरिये बचने का दावा
नलकूप विभाग के कुछ कर्मचारी कार्रवाई के घेरे में हैं। इसके बावजूद उनके हौसले कम नहीं हुए। विभागीय सूत्रों के अनुसार वह कर्मचारी अपनी पहुंच व सेटिंग के बलबूते कार्रवाई न होने का दावा कर रहे हैं। इसको लेकर आपस में ही नोकझोंक तक की नौबत आ चुकी है।
कार्यमुक्त होने के बाद भी स्टोर जेई डटा
नलकूप विभाग के स्टोर का चार्ज अवर अभियंता रूपकिशोर के पास था। जांच शुरू होने के बाद उनका स्थानांतरण हुआ। करीब दो माह पूर्व उन्हें कार्यमुक्त भी कर दिया गया। इसके बावजूद किसी अन्य जेई को चार्ज न देकर वही स्टोर में काबिज हैं। इसके अलावा वर्षों के डटे प्रभारियों का स्थानांतरण तो दूर की बात पटल परिवर्तन तक नहीं किया गया।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
मुख्य विकास अधिकारी डा.राजेंद्र पैंसिया ने बताया कि जांच रिपोर्ट तैयार की जा रही है। सरकारी धन के दुरुपयोग व वित्तीय अनियमितता में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।