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जीका वायरस का खतरा, अलर्ट जारी
Updated Tue, 16 Oct 2018 10:56 PM IST
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फर्रुखाबाद। राजस्थान और बिहार में जीका वायरस के दस्तक देने के बाद जिले में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है। इस वायरस से संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से डेंगू व चिकनगुनिया होता है। जिले में अभी तक इस वायरस से निपटने के लिए कोई इंतजाम नहीं है।
गर्भ ठहरने के दो तीन महीने में महिला इससे संक्रमित होती है तो उसके गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क का विकास प्रभावित होता है। इससे प्रभावित बच्चे का आकार छोटा और दिमाग अविकसित हो सकता है। यह शरीर के अंगों पर हमला करता है और लोग लकवे का शिकार हो सकते हैं। जीका वायरस वाला मच्छर सुबह शाम ज्यादा सक्रिय होता है।
लक्षण
- ज्वाइंट पेन, आंखें लाल होना, उल्टी आना, बेचैनी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। मरीजों को बेड रेस्ट लेना चाहिए।
बचाव
- घर में मच्छर न पनपने दें, मच्छरदानी का इस्तेमाल करें। जो महिलाएं लंबी यात्रा से लौटी हैं, खासतौर से उन जगहों से जहां वायरस फैला है, वो अगले आठ सप्ताह तक गर्भधारण करने से बचें। घर की खिड़कियों और दरवाजों पर जाली जरूर लगवाएं। जाली वाले दरवाजे हमेशा बंद रखें। अगर आपको डायबिटीज, हाइपरटेंशन, इम्यूनिटी डिसऑर्डर जैसी दिक्कतें हैं तो यात्रा करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें। यात्रा से आने के दो सप्ताह के अंदर आपको हल्का बुखार होता है तो भी डॉक्टर से मिले।
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सैकड़ों लोग प्रतिदिन करते हैं राजस्थान व बिहार की यात्रा
जिले से प्रतिदिन सैकड़ों लोग राजस्थान व बिहार जाते हैं। इसका अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि अकेले शहर से ही कई अवैध स्लीपर बसे प्रतिदिन जयपुर रवाना होती हैं। इसके अलावा ट्रेन आदि से भी कई लोग जाते हैं।
लखनऊ में ही हो सकता है जांच
जिले में जीका वायरस की जांच करने की व्यवस्था किसी भी अस्पताल में नहीं है। इसकी जांच के लिए मरीज को लखनऊ मेडिकल कॉलेज जाना पड़ेगा। जहां मरीज का पांच एमएल खून लेकर उसका आरटीपीसीआर टेस्ट किया जाएगा।
जीका वायरस के संबंध में गाइडलाइन जारी कर दी गई हैं। अभी तक जिले में इसका कोई मामला सामने नहीं आया है। फिलहाल लोगों को मच्छरों से पूरी तरह बचाव करना चाहिए। - अरुण कुमार, सीएमओ
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गर्भ ठहरने के दो तीन महीने में महिला इससे संक्रमित होती है तो उसके गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क का विकास प्रभावित होता है। इससे प्रभावित बच्चे का आकार छोटा और दिमाग अविकसित हो सकता है। यह शरीर के अंगों पर हमला करता है और लोग लकवे का शिकार हो सकते हैं। जीका वायरस वाला मच्छर सुबह शाम ज्यादा सक्रिय होता है।
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लक्षण
- ज्वाइंट पेन, आंखें लाल होना, उल्टी आना, बेचैनी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। मरीजों को बेड रेस्ट लेना चाहिए।
बचाव
- घर में मच्छर न पनपने दें, मच्छरदानी का इस्तेमाल करें। जो महिलाएं लंबी यात्रा से लौटी हैं, खासतौर से उन जगहों से जहां वायरस फैला है, वो अगले आठ सप्ताह तक गर्भधारण करने से बचें। घर की खिड़कियों और दरवाजों पर जाली जरूर लगवाएं। जाली वाले दरवाजे हमेशा बंद रखें। अगर आपको डायबिटीज, हाइपरटेंशन, इम्यूनिटी डिसऑर्डर जैसी दिक्कतें हैं तो यात्रा करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें। यात्रा से आने के दो सप्ताह के अंदर आपको हल्का बुखार होता है तो भी डॉक्टर से मिले।
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सैकड़ों लोग प्रतिदिन करते हैं राजस्थान व बिहार की यात्रा
जिले से प्रतिदिन सैकड़ों लोग राजस्थान व बिहार जाते हैं। इसका अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि अकेले शहर से ही कई अवैध स्लीपर बसे प्रतिदिन जयपुर रवाना होती हैं। इसके अलावा ट्रेन आदि से भी कई लोग जाते हैं।
लखनऊ में ही हो सकता है जांच
जिले में जीका वायरस की जांच करने की व्यवस्था किसी भी अस्पताल में नहीं है। इसकी जांच के लिए मरीज को लखनऊ मेडिकल कॉलेज जाना पड़ेगा। जहां मरीज का पांच एमएल खून लेकर उसका आरटीपीसीआर टेस्ट किया जाएगा।
जीका वायरस के संबंध में गाइडलाइन जारी कर दी गई हैं। अभी तक जिले में इसका कोई मामला सामने नहीं आया है। फिलहाल लोगों को मच्छरों से पूरी तरह बचाव करना चाहिए। - अरुण कुमार, सीएमओ