फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Farrukhabad News ›   ‘वेंटीलेटर’ पर सीएचसी को ‘ऑक्सीजन’ की जरूरत

‘वेंटीलेटर’ पर सीएचसी को ‘ऑक्सीजन’ की जरूरत

Sat, 13 Oct 2018 12:06 AM IST
Updated Sat, 13 Oct 2018 12:06 AM IST
विज्ञापन
‘वेंटीलेटर’ पर सीएचसी को ‘ऑक्सीजन’ की जरूरत
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

फर्रुखाबाद। जिनके कंधों पर लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने की जिम्मेदारी है, वह सीएचसी खुद ही बीमार है। डाक्टरों के अभाव में यह ‘वेंटीलेटर’ पर है। जिले के इकलौते हाईवे पर दो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। दोनों की ही हालत दयनीय है। यहां पर किसी भी इमरजेंसी केस को भर्ती करने से पहले ही हाथ खड़े कर दिए जाते हैं। दोनों ही जगह हड्डी रोग विशेषज्ञ व सर्जन नहीं हैं। पूरे जिले में किसी भी सीएचसी में अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था नहीं है।


फतेहगढ़ स्थित कौशलेंद्र सिंह अस्पताल समेत जिले में दस सीएचसी हैं। इनमें से किसी भी सीएचसी पर पर्याप्त स्टाफ व सुविधाएं नहीं हैं। इटावा-बरेली हाईवे पर स्थित मोहम्मदाबाद सीएचसी के प्रभारी डॉक्टर सोमेश अग्निहोत्री हैं। नवाबगंज सीएचसी की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी उन्हीं के पास है। उनके अलावा मोहम्मदाबाद में एक अन्य डॉक्टर के साथ एक डॉक्टर संविदा पर है। यहां पर न ही कोई सर्जन है न कोई महिला डॉक्टर। गर्भवती महिलाओं के प्रसव की जिम्मेदारी एएनएम की है। यहां पर कोई हड्डी रोग विशेषज्ञ नहीं है। जबकि हाईवे पर आए दिन हादसे होते रहते हैं।
विज्ञापन


घायल के पहुंचने पर उसे लोहिया अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। यहां से लोहिया अस्पताल तक पहुंचने में कम से कम 45 मिनट का समय लगता है। इसी हाईवे पर दूसरे सीएचसी राजेपुर के हालात भी यहां से जुदा नहीं हैं। यहां पर छह डाक्टरों में से तीन ही तैनात हैं। इसमें एक चिकित्साधीक्षक डॉ. प्रमित राजपूत व एक अन्य फिजीशियन हैं। इसके अलावा एक महिला डॉक्टर जूही पाल हैं। यहां भी कोई हड्डी रोग विशेष डाक्टर व सर्जन नहीं हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन




जिले में फर्रुखाबाद शहर के अलाव दूसरा बड़ा नगर कायमगंज है। यहां पर स्थित सीएचसी के हालात भी ठीक नहीं हैं। पिछले 10 साल से यहां पर हड्डी रोग विशेषज्ञ नहीं है। कभी फार्मासिस्ट तो कभी वार्ड ब्वाय यहां पर मरीजों का प्लास्टर करके दवा दे देते हैं। साथ ही पिछले पांच साल से कोई सर्जन भी नहीं है। इस अस्पताल में प्रतिदिन 300 से 500 मरीज ओपीडी में आते हैं। महिला डाक्टर की बात की जाए तो डॉक्टर मधु अग्रवाल की तैनाती यहां पर है। रात में वह अस्पताल में नहीं होती हैं। इससे प्रसूताओं को समस्या होती है। करीब 12 साल पहले आई अल्ट्रासाउंड मशीन रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने से बंद है। इससे अब तक महज एक ही अल्ट्रासाउंड हुआ है। इस सीएचसी में भी कुल चार ही डॉक्टर हैं।


जिले के अन्य सीएचसी के हालात भी खराब हैं। फतेहगढ़ स्थित कौशलेंद्र अस्पताल में कोई डॅाक्टर तैनात नहीं है। यह अस्पताल लगभग बंद होने की कगार पर है। इसी तरह कंपिल सीएचसी में एक डॉक्टर पीएस विमल की तैनाती है। बरौन सीएचसी के एमओआईसी डॉ. अनुज त्रिपाठी के पास कई जगह के चार्ज हैं। नवाबगंज सीएचसी में डॉ. सोमेश के अलावा महिला चिकित्सक डॅा. कल्पना राजपूत की तैनाती है। सीएचसी में सुविधाएं नहीं होने से लोहिया अस्पताल में भीड़ बड़ जाती है। यहां पर प्रतिदिन औसतन ओपीडी 1000 से 1500 के बीच रहती है। लोगों का मानना है कि सीएचसी में इलाज ही सही से नहीं हो पाता है। इसलिए लोहिया अस्पताल में भीड़ बढ़ जाती है। यहां पर सर्दी जुकाम, बुखार आदि के ही 300 से 400 मरीज प्रतिदिन आते हैं। लोहिया अस्पताल भी स्टाफ की कमी से जूझ रहा है।



विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी है। इसके चलते सीएचसी पर हड्डी रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। इसके लिए शासन को कई बार पत्र भेजा गया है। विशेषज्ञ डाक्टर आते ही सीएचसी पर तैनाती की जाएगी। -अरुण कुमार, सीएमओ फर्रुखाबाद


-छह डाक्टर होने चाहिए तैनात, काम चल रहा एक या दो से
-हड्डी रोग विशेषज्ञ व सर्जन नहीं, अल्ट्रासाउंड की नहीं है व्यवस्था
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed