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दूध उत्पादन में नंबर वन रहने वाला फर्रुखाबाद हो गया फिसड्डी
Updated Tue, 02 Oct 2018 11:24 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फर्रुखाबाद। साल 2011-12 में दूध उत्पादन में प्रदेश में प्रथम स्थान पाने वाले दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ की हालत खराब हो चुकी है। सात साल पहले 80 हजार लीटर एकत्र होने वाल दूध आज तीन हजार पर ही सिमट गया है। 650 समितियों की संख्या घटकर अब 55 ही रह गई है। कर्मचारियों का वेतन तक ठीक से नहीं निकल पा रहा है।
किसानों को दूध का उचित मूल्य मिले। इसके लिए दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ की स्थापना हुई थी। इसकी समितियां गांवों में बनाई गईं। उन समितियोें पर किसान दूध लेकर जाता था। किसानोें को 15 दिन में भुगतान करने का नियम था, लेकिन यह समितियां मनमाने तरीके से काम करती रहीं। किसानोें को कभी समय से दूध का भुगतान नहीं होता था, अगर हुआ भी तो उन्हें उचित दाम नहीं मिलते थे। करीब 650 समितियों से दूध दुग्ध संघ के पांचाल घाट स्थित चिलिंग प्लांट पर एकत्र होता था। साल 2011-12 दुग्ध संघ में करीब 80 हजार लीटर दूध एकत्र होने लगा था। इसके चलते फर्रुखाबाद दूध उत्पादन में प्रदेश में नंबर वन हो गया था।
टैंकरों से दूध मेरठ भेजा जाता था। समितियों को प्रत्येक माह करीब 1.20 करोड़ रुपये का भुगतान होता था। इस बीच बाजार में प्राइवेट डेरियों ने दस्तक दे दी। किसान को वहां तत्काल भुगतान मिलने लगा। इसके चलते किसानों ने दुग्ध संघ की समितियों से दूरी बना ली, और धीरे-धीरे समितियां बंद होती चली गईं। अब महज 55 समितियां ही काम कर रही हैं। इनसे मात्र तीन हजार लीटर दूध एकत्र हो पा रहा है। इससे दुग्ध संघ की हालत पतली हो गई है।
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कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने से भी लगा झटका
दूध का कलेक्शन घटने से शासन ने साल 2016 में एक साथ 15 कर्मचारियों को सेवानिवृत्त कर दिया था। अब महज चार सुपरवाइजर ही काम रहे हैं। पहले यहां 15 सुपरवाइजर थे, जो फील्ड में जाकर लोगों से संपर्क कर दूध का कलेक्शन बढ़ाते थे। समितियों से दूध एकत्र करने के लिए जिले के 15 मार्गों पर वाहन जाते थे। अब केवल पांच मार्गों पर ही ये वाहन जाते हैं।
कर्मचारियों की संख्या एक साथ कम होने से दूध एकत्र नहीं हो पा रहा है। प्राइवेट डेरियां आने से भी समस्या आई है। भुगतान संबंधी नियम शासन से तय होते हैं। उनमें बदलाव स्थानीय स्तर पर नहीं हो सकता है। कर्मचारी रखना भी मेरे हाथ में नहीं है। इन सभी दिक्कतों की वजह से ही दूध का कलेक्शन घटा है। स्थिति सुधारने के भी प्रयास किए जा रहे हैं। - संजय सिंह, स्थानीय इकाई प्रभारी दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ, फर्रुखाबाद
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फर्रुखाबाद। साल 2011-12 में दूध उत्पादन में प्रदेश में प्रथम स्थान पाने वाले दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ की हालत खराब हो चुकी है। सात साल पहले 80 हजार लीटर एकत्र होने वाल दूध आज तीन हजार पर ही सिमट गया है। 650 समितियों की संख्या घटकर अब 55 ही रह गई है। कर्मचारियों का वेतन तक ठीक से नहीं निकल पा रहा है।
किसानों को दूध का उचित मूल्य मिले। इसके लिए दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ की स्थापना हुई थी। इसकी समितियां गांवों में बनाई गईं। उन समितियोें पर किसान दूध लेकर जाता था। किसानोें को 15 दिन में भुगतान करने का नियम था, लेकिन यह समितियां मनमाने तरीके से काम करती रहीं। किसानोें को कभी समय से दूध का भुगतान नहीं होता था, अगर हुआ भी तो उन्हें उचित दाम नहीं मिलते थे। करीब 650 समितियों से दूध दुग्ध संघ के पांचाल घाट स्थित चिलिंग प्लांट पर एकत्र होता था। साल 2011-12 दुग्ध संघ में करीब 80 हजार लीटर दूध एकत्र होने लगा था। इसके चलते फर्रुखाबाद दूध उत्पादन में प्रदेश में नंबर वन हो गया था।
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टैंकरों से दूध मेरठ भेजा जाता था। समितियों को प्रत्येक माह करीब 1.20 करोड़ रुपये का भुगतान होता था। इस बीच बाजार में प्राइवेट डेरियों ने दस्तक दे दी। किसान को वहां तत्काल भुगतान मिलने लगा। इसके चलते किसानों ने दुग्ध संघ की समितियों से दूरी बना ली, और धीरे-धीरे समितियां बंद होती चली गईं। अब महज 55 समितियां ही काम कर रही हैं। इनसे मात्र तीन हजार लीटर दूध एकत्र हो पा रहा है। इससे दुग्ध संघ की हालत पतली हो गई है।
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कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने से भी लगा झटका
दूध का कलेक्शन घटने से शासन ने साल 2016 में एक साथ 15 कर्मचारियों को सेवानिवृत्त कर दिया था। अब महज चार सुपरवाइजर ही काम रहे हैं। पहले यहां 15 सुपरवाइजर थे, जो फील्ड में जाकर लोगों से संपर्क कर दूध का कलेक्शन बढ़ाते थे। समितियों से दूध एकत्र करने के लिए जिले के 15 मार्गों पर वाहन जाते थे। अब केवल पांच मार्गों पर ही ये वाहन जाते हैं।
कर्मचारियों की संख्या एक साथ कम होने से दूध एकत्र नहीं हो पा रहा है। प्राइवेट डेरियां आने से भी समस्या आई है। भुगतान संबंधी नियम शासन से तय होते हैं। उनमें बदलाव स्थानीय स्तर पर नहीं हो सकता है। कर्मचारी रखना भी मेरे हाथ में नहीं है। इन सभी दिक्कतों की वजह से ही दूध का कलेक्शन घटा है। स्थिति सुधारने के भी प्रयास किए जा रहे हैं। - संजय सिंह, स्थानीय इकाई प्रभारी दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ, फर्रुखाबाद