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राममंदिर के लिए होगा श्री सीताराम नाम जप महायज्ञ
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अयोध्या। फटिक शिला आश्रम में राममंदिर के लिए 17 फरवरी से श्री सीताराम राम जप महायज्ञ होने जा रहा है। इस महायज्ञ में देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु जुटेंगे। 54 कुंडीय महायज्ञ में 1500 नाम जापकों द्वारा राम नाम की संकीर्तन किया जाएगा। 26 फरवरी तक होने वाले इस आयोजन की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। यज्ञ मंडप का निर्माण कार्य प्रगति पर हैं।
फटिक शिला के महंत सुखदेव दास ने बताया कि तपोस्वी संत फटिक शिला आश्रम के संस्थापक नारायण दास जी महाराज उर्फ बगही बाबा की 103वीं जयंती व गुरुभाई रामाज्ञादास की स्मृति मेें यह आयोजन हो रहा है। श्री सीताराम नाम जप महायज्ञ में राममंदिर निर्माण की भी कामना की जाएगी, क्योंकि बगही बाबा का जीवन राममंदिर के लिए समर्पित रहा।
उन्होंने बताया कि इससे पूर्व 1987 में अनवरत 10 दिनों तक 800 नाम जापकों द्वारा सीताराम नाम महायज्ञ किया गया था। इसके बाद 1990 में 4 हजार नाम जापकों द्वारा 1992 में 25 हजार नाम जापकों द्वारा तथा 1997 में भी 25 हजार नाम जापकों द्वारा नाम संकीर्तन का आयोजन हुआ था जिसमें देश-विदेश के लाखों भक्त ने शिरकत किया था।
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बताया कि इस वर्ष 54 कीर्तन कुंज में 1500 नाम जापकों द्वारा नाम संकीर्तन का आयोजन हुआ जिसके जरिए भव्य राममंदिर निर्माण की कामना की जाएगी। इस आयोजन में नेपाल, हालैंड सहित मध्यप्रदेश, बिहार, वृंदावन व उत्तर प्रदेश के करीब 20 जिलों से हजारों की संख्या में भक्त मौजूद रहेंगे। आयोजन समिति से जुड़े डॉ. राघवेश दास वेदांती ने बताया कि यह आयोजन राममंदिर निर्माण की कामना से हो रहा है। बगही बाबा ने राममंदिर आंदोलन में अहम भूमिका निभाई थी, राममंदिर का निर्माण उनका भी स्वप्न रहा जो अब साकार होने को है।
बगही बाबा ने राममंदिर के लिए किया था अनशन
महंत सुखदेव दास ने बताया कि बगही बाबा ने फटिक शिला की स्थापना की थी। वे 1978 में अयोध्या आए और सरयू तट पर अपनी धूनी रमाई। उन्होंने आश्रम में 3 जुलाई 1985 को नाम संकीर्तन की शुरुआत की जो अनवरत जारी है। 1990 व 1992 के दौरान राममंदिर आंदोलन में उनकी अहम भूमिका रही। 1992 में बाबरी विध्वंस की घटना के बाद उन्होंने 6 दिनों तक आमरण अनशन सरयू तट पर फटिक शिला आश्रम में किया था। तत्कालीन गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवैद्यनाथ, महंत रामचंद्रदास परमहंस, डॉ. रामविलास दास वेदांती सहित अन्य संतों के साथ राममंदिर आंदोलन को निर्णायक दिशा देने में बगही बाबा की अहम भूमिका रही।
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फटिक शिला के महंत सुखदेव दास ने बताया कि तपोस्वी संत फटिक शिला आश्रम के संस्थापक नारायण दास जी महाराज उर्फ बगही बाबा की 103वीं जयंती व गुरुभाई रामाज्ञादास की स्मृति मेें यह आयोजन हो रहा है। श्री सीताराम नाम जप महायज्ञ में राममंदिर निर्माण की भी कामना की जाएगी, क्योंकि बगही बाबा का जीवन राममंदिर के लिए समर्पित रहा।
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उन्होंने बताया कि इससे पूर्व 1987 में अनवरत 10 दिनों तक 800 नाम जापकों द्वारा सीताराम नाम महायज्ञ किया गया था। इसके बाद 1990 में 4 हजार नाम जापकों द्वारा 1992 में 25 हजार नाम जापकों द्वारा तथा 1997 में भी 25 हजार नाम जापकों द्वारा नाम संकीर्तन का आयोजन हुआ था जिसमें देश-विदेश के लाखों भक्त ने शिरकत किया था।
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बताया कि इस वर्ष 54 कीर्तन कुंज में 1500 नाम जापकों द्वारा नाम संकीर्तन का आयोजन हुआ जिसके जरिए भव्य राममंदिर निर्माण की कामना की जाएगी। इस आयोजन में नेपाल, हालैंड सहित मध्यप्रदेश, बिहार, वृंदावन व उत्तर प्रदेश के करीब 20 जिलों से हजारों की संख्या में भक्त मौजूद रहेंगे। आयोजन समिति से जुड़े डॉ. राघवेश दास वेदांती ने बताया कि यह आयोजन राममंदिर निर्माण की कामना से हो रहा है। बगही बाबा ने राममंदिर आंदोलन में अहम भूमिका निभाई थी, राममंदिर का निर्माण उनका भी स्वप्न रहा जो अब साकार होने को है।
बगही बाबा ने राममंदिर के लिए किया था अनशन
महंत सुखदेव दास ने बताया कि बगही बाबा ने फटिक शिला की स्थापना की थी। वे 1978 में अयोध्या आए और सरयू तट पर अपनी धूनी रमाई। उन्होंने आश्रम में 3 जुलाई 1985 को नाम संकीर्तन की शुरुआत की जो अनवरत जारी है। 1990 व 1992 के दौरान राममंदिर आंदोलन में उनकी अहम भूमिका रही। 1992 में बाबरी विध्वंस की घटना के बाद उन्होंने 6 दिनों तक आमरण अनशन सरयू तट पर फटिक शिला आश्रम में किया था। तत्कालीन गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवैद्यनाथ, महंत रामचंद्रदास परमहंस, डॉ. रामविलास दास वेदांती सहित अन्य संतों के साथ राममंदिर आंदोलन को निर्णायक दिशा देने में बगही बाबा की अहम भूमिका रही।