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सऊदी अरब में कबूतरबाजी का शिकार अयोध्या का युवक

Sat, 06 Feb 2016 12:11 AM IST
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 06 Feb 2016 12:11 AM IST
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बाबू बहुत परेशान हैं, हमका बचाय लेव, हमार शक्ल पहचान न पाउबौ, सब धौंस गवा है। उनका पैसा दै दौ, नाही तो हम मर जाबै। यह मर्मांतक पीड़ा है नौकरी के नाम पर अयोध्या से सऊदी अरब गए कबूतरबाजी में फंसे युवक दिनेश (26) की, जिसे सुनकर उसके परिवार में कोहराम मच गया है।
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पिता अपने लाडले को सकुशल वापस लाने के लिए परेशान है तो पुलिस भी सहायता के बजाए उसे दिल्ली व लखनऊ जाने की सलाह दे रही है। धर्मनगरी के दुराही कुआं निवासी छंगू प्रसाद रोते हुए अपने बच्चे के विदेश में फंसे होने की कहानी शुक्रवार को बयां की।
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बताया कि दंतधावन कुंड तिराहे पर सैलून की दुकान चलाकर परिवार की जीविका चलाते हैं। पांच पुत्र व एक पुत्री हैं, जिसमें सबसे छोटा पुत्र दिनेश है। पांच वर्ष पूर्व उसका विवाह अंबेडकरनगर जिले के ग्राम बसौहरी में हुआ था। उसके दो पुत्र पांच वर्ष का दिव्यांश व एक वर्ष का प्रियांश है।
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बताया कि उसके चचिया ससुर संजय जो ससुराल के बगल ही रहते हैं, सऊदी अरब में कई वर्षों से ड्राइवरी की नौकरी करते हैं। उन्होंने दिनेश को भी पैसा कमाने के लिए वहां ड्राइवरी के लिए बुलाया। इस पर पासपोर्ट बनवाया और जब बीजा सऊदी अरब से भिजवाया गया तो बीते 16 दिसंबर 2015 को दिनेश हवाई जहाज से सऊदी अरब गया।

बताया कि 17 दिसंबर को दिनेश सऊदी अरब के गयाम एयरपोर्ट पर पहुंचा तो उसे एक व्यक्ति मिला, जिसने उसका पासपोर्ट, लाइसेंस, पहचान पत्र सभी अपने पास रख लिया और उसे एयरपोर्ट के पास ही एक कमरे में पांच दिनों तक रखा। कहा कि ड्राइवरी की पोस्ट खाली होने पर तुम्हें काम पर लगाता हूं।

पांच दिन बाद उस व्यक्ति ने कमरे से निकाल 80 किलोमीटर दूर रियाद कस्बे में ले जाकर उसे एक दूसरे व्यक्ति के हाथों सौंप दिया। यहां पर उन लोगों ने उसे बंधक बनाकर जंगल व रेगिस्तान में भेड़, बकरी चराने और कबूतर की बीट साफ कराने का काम कराया जाने लगा।

बंधुआ मजदूरों की तरह हाड़तोड़ मेहनत कराकर उसे परेशान किया जा रहा है। बताया कि उसका मोबाइल पानी में गिरकर खराब हो जाने से दिनेश ने चोरी से किसी के फोन पर अपनी दशा बताई तो 10 हजार रुपये चचिया ससुर के पास भिजवाया गया लेकिन वह भी उसे नहीं मिला।

बताया कि गुरुवार रात करीब आठ बजे संजय का फोन आया तो उनसे बेटे की स्थिति बताई तो संजय ने कहा कि 90 हजार रुपया भेजो तभी वह छूट सकता है। बताया कि सुबह साढ़े सात बजे फोन आया जिसमें दिनेश फूट-फूट कर रोने लगा। अपनी पीड़ा बताई और कहा कि हमको बचा लो नहीं तो हम मर जाएंगे।


घर के सभी सदस्य परेशान हैं। समझ में नहीं आ रहा कि  विदेश से बच्चे को कैसे सकुशल वापस लाएं। बताया कि थाना रामजन्मभू्िम में शिकायत दर्ज कराने गए तो पुलिस ने दिल्ली व लखनऊ में दर्ज कराने की सलाह दी है। फूट-फूट कर रोते हुए कहते हैं कि कम पढ़े लिखे होने के कारण समझ नहीं आता कि अपने लाडले को सकुशल वापस कैसे लाएं।
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