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एसओ रौनाही पर दर्ज होगा प्रकीर्णवाद
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 31 Jul 2015 11:29 PM IST
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रौनाही थानाध्यक्ष बृजेश चंद्र तिवारी अदालत के आदेश की अवमानना के मामले में फंस गए हैं। कोर्ट ने उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करते हुए प्रकीर्ण वाद दर्ज करने का आदेश दिया है। साथ ही विभागीय कार्रवाई के लिए आदेश की प्रति एसएसपी व डीआईजी को भेजने का आदेश दिया है।
यह आदेश मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट देवकांत शुक्ल की अदालत से हुआ है। मामले में अगली सुनवाई चार अगस्त को होगी। अधिवक्ता रवींद्र बहादुर सिंह ने बताया कि रौनाही थाने में दर्ज एनसीआर संख्या 94 सन 2012 की विवेचना करने का आदेश 8 फरवरी 2013 को अदालत ने संबंधित थानाध्यक्ष को दिया था।
कई साल बीतने के बाद मामले में न तो किसी का बयान लिया गया और न ही कोई कार्रवाई हुई। प्रगति आख्या के लिए अर्जी दी गई तो कोर्ट ने थानाध्यक्ष रौनाही से 18 जनरी 2015 को आख्या मांगी। तब से 16 पेशियां लगातार आख्या के लिए नियत हुईं, लेकिन थानाध्यक्ष इसके लिए समय नहीं निकाल सके।
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बीते 17 जून को अदालत ने एसओ को नोटिस देते हुए इस आशय का स्पष्टीकरण मांगा कि क्यों न अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाए। इसे भी एसओ ने नजरअंदाज कर दिया। अब अदालत ने मामले में अवमानना की कार्रवाई शुरू करते हुए प्रकीर्ण वाद दर्ज करने का आदेश दिया है। लापरवाही पर विभागीय कार्रवाई के लिए आदेश की प्रति एसएसपी व डीआईजी को भेजने का आदेश दिया है।
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यह आदेश मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट देवकांत शुक्ल की अदालत से हुआ है। मामले में अगली सुनवाई चार अगस्त को होगी। अधिवक्ता रवींद्र बहादुर सिंह ने बताया कि रौनाही थाने में दर्ज एनसीआर संख्या 94 सन 2012 की विवेचना करने का आदेश 8 फरवरी 2013 को अदालत ने संबंधित थानाध्यक्ष को दिया था।
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कई साल बीतने के बाद मामले में न तो किसी का बयान लिया गया और न ही कोई कार्रवाई हुई। प्रगति आख्या के लिए अर्जी दी गई तो कोर्ट ने थानाध्यक्ष रौनाही से 18 जनरी 2015 को आख्या मांगी। तब से 16 पेशियां लगातार आख्या के लिए नियत हुईं, लेकिन थानाध्यक्ष इसके लिए समय नहीं निकाल सके।
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बीते 17 जून को अदालत ने एसओ को नोटिस देते हुए इस आशय का स्पष्टीकरण मांगा कि क्यों न अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाए। इसे भी एसओ ने नजरअंदाज कर दिया। अब अदालत ने मामले में अवमानना की कार्रवाई शुरू करते हुए प्रकीर्ण वाद दर्ज करने का आदेश दिया है। लापरवाही पर विभागीय कार्रवाई के लिए आदेश की प्रति एसएसपी व डीआईजी को भेजने का आदेश दिया है।