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एनडी विवि में खुलेगा प्रदेश का पहला ऐच्छिक पशु शिशु शोध केंद्र

Sun, 13 May 2018 11:32 PM IST
Updated Sun, 13 May 2018 11:32 PM IST
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एनडी विवि में खुलेगा प्रदेश का पहला ऐच्छिक पशु शिशु शोध केंद्र
एनडी विवि में खुलेगा प्रदेश का पहला ऐच्छिक पशु शिशु शोध केंद्र
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फैजाबाद। प्रदेश के पशुपालकों व किसानों के लिए एक अच्छी खबर है। इनको जल्द ही मनचाही प्रजातियों व लिंग के पशु शिशु सीमेन मिल सकेंगे। इसके लिए आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय स्ट्रेंथनिग ऑफ फ्रोजन सीमेन बैंक फॉर इंडिजेनस एनिमल्ज नामक शोध केंद्र खोलने जा रहा है। इसकी तैयारियां फाइनल स्टेज पर हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से एक करोड़ 61 लाख रुपये की डीपीआर बनाकर शासन को भेजी गयी है। शासन से स्वीकृति मिलते ही योजना पर काम शुरू हो जाएगा।
खास यह है कि विश्वविद्यालय का ऐच्छिक पशु शिशु सीमेन केंद्र देश का पहला शोध केंद्र होगा। इसमें वैज्ञानिकों की ओर से ऐच्छिक पशु शिशु सीमेन तैयार करके पशुपालकों व किसानों को दिया जाएगा। मौजूदा समय में दुग्ध क्रांति के चक्कर में छुट्टा नर पशुओं के चलते खेती पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इससे निजात दिलाने के लिए एनडी विश्वविद्यालय के कुलपति बीएस संधू की ओर से प्रयास किया गया है। कुलपति की ओर से विश्वविद्यालय के पशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन महाविद्यालय के वैज्ञानिकों को देश में हुए ऐच्छिक पशु सीमेन बनाने व इसका सफल प्रयोग करने के निर्देश दिए थे। कुलपति के निर्देशों के अनुरूप विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने सफलता प्राप्त कर ली है। शोध के बाद अब एनडी विश्वविद्यालय इसको अमली जामा पहनाने जा रहा है। विश्वविद्यालय की ओर से पशु शिशु शोध केंद्र खोलने की एक करोड़ रुपये का डीपीआर बनाकर शासन को भेजी है। विश्वविद्यालय के पास पहले से इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है। इसलिए सिर्फ मशीनों व विभिन्न प्रजाति की नस्लों के उम्दा जानकारों की खरीद के लिए विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनी है। जानवरों व मशीनों को खरीदने के बाद विश्वविद्यालय अपनी डेरी पर पशुओं की पालेगा। साथ ही अपनी पुरानी प्रयोगशाला में शोध के कार्यों को संपन्न करेगा।
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विशेष प्रजातियों के सीमेन तैयार करना होगी प्राथमिकता
विश्वविद्यालय में स्ट्रेंथनिग ऑफ फ्रोजन सीमेन बैंक फॉर इंडिजेनस एनिमल्ज केंद्र की प्राथमिकता विशेष प्रजातियों के सीमेन तैयार करने की होगी। परियोजना के अंतर्गत भैंस की गुर्रा नस्ल, गाय की साहीवाल व गिरी बकरी की सिरोही व बरबरी प्रजाति के सीमेन तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा गाय व भैंसों की मादा पशु सीमेन व बकरी के नर पशु सीमेन बनाना भी प्राथमिकता में शामिल है। इसके अलावा गाय, भैंस व बकरी की नई नस्लों के सीमेन बनाने पर भी शोध किए जाएंगे।
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सीमेन के अनुरूप होंगी 90 प्रतिशत संभावनाएं
परियोजना के मुख्य अंवेषक डॉ. सुशांत श्रीवास्तव का दावा है कि जिस नस्ल या लिंग का सीमेन दिया जाएगा उसी के अनुरूप पशु शिशु जन्म लेंगे। इसकी संभावनाएं 90 प्रतिशत होंगी। उन्होंने बताया है कि गाय व भैंस के मादा पशुओं के जन्म दर में वैज्ञानिक तकनीकि से वृद्धि प्राप्त किए जाने के कारण दुग्ध उत्पादन के लिए उच्च नस्लों की पशु प्रजातियां उपलब्ध हो सकेंगी। दूसरी ओर कृषि के साथ-साथ पशुपालन से कृषकों को अतिरिक्त आय प्राप्त हो सकेगी। साथ ही नर पशुओं की जन्मदर में कमी आने से छुट्टा जानवरों की संख्या कम होगी।


विश्वविद्यालय मेें स्ट्रेंथनिग ऑफ फ्रोजन सीमेन बैंक फॉर इंडिजेनस एनिमल्ज परियोजना के लिए शासन को डीपीआर भेजी गयी है। उम्मीद है कि शासन की ओर से जल्द बजट का एलाटमेंट कर दिया जाएगा। यह योजना किसानों की आय दुगनी करने, किसानों को छुट्टा जानवरों से मुक्ति दिलान व मनमाफिक गाय, भैंस व बकरी की प्रजाति के लिए काफी कारगर साबित होगी।- जे एस संधू, कुलपति, एनडी यूनिवर्सिटी, फैजाबाद
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