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Etawah News: कुष्ठ रोग की वजह न बन जाए कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता
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इटावा। कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता कुष्ठ रोग की वजह बन रही है। वैक्टीरिया (माइक्रो वैक्टीरिया लैक्ट्री) का पनपना भी इस रोग की मुख्य वजहों में से एक है। त्वचा पर एक या इससे अधिक लाल चकत्ते, फीका रंग, दाग या धब्बे में सुन्नपन हो, पसीना न आता हो, खुजली, जलन व चुभन न होने पर कुष्ठ रोग हो सकता है।
भौहों व कानों के ऊपर सूजन अथवा गांठ होना, त्वचा पर दाने या तेलीय चमक दिखाई पड़ना यह भी कुष्ठ रोग के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। यह जानकारी जिला कुष्ठ अधिकारी डॉ. बलराज ने कुष्ठ रोग दिवस पर दी। बताया कि यह रोग जैनेटिक नहीं होता। कुष्ठ रोग में शरीर में सुन्नपन, चकत्ते होते हैं, लेकिन सफेद दाग कुष्ठ रोग नहीं होता। हाथ पैर में सूखापन, सुन्नपन एवं कमजोरी होने पर भी कुष्ठ रोग की जांच करानी चाहिए।
इसमें किसी तरह की झिझक अथवा शर्म महसूस नहीं करनी चाहिए। कुष्ठ रोग अभिशाप नहीं है। लिहाजा जांच और उपचार कराकर कुष्ठ रोग से मुक्ति पा सकते हैं। मल्टी ड्रग थेरेपी (एमडीटी) से कुष्ठ रोग का इलाज संभव है। सभी सरकारी अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों में उपचार निशुल्क मिलता है।
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डॉ. बलराज ने बताया कि जिले में इस समय 62 कुष्ठ रोगियों का इलाज चल रहा है। इनमें पैसि बेसलरी (पीबी) के आठ मरीज हैं, जिनका छह महीने इलाज चलता है। मल्टी बेसलरी (एमबी) के 54 मरीज हैं, इनका एक साल इलाज चलता है। अप्रैल से दिसंबर तक 24 कुष्ठ रोगी दवा खाकर ठीक हो चुके हैं। कहा कि कुष्ठ रोगी से कोई भेदभाव न करें। इसी को लेकर गांधी जी की पुण्य तिथि के अवसर पर स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान शुरू हो रहा है, जो 13 फरवरी तक चलेगा। इसमें लोगों को कुष्ठ रोग के प्रति जागरूक किया जाएगा।
बताया कि सितंबर में चले एक्टिव केस एंड रेगुलर स्क्रीनिंग (एसीएंडआरएस) अभियान के तहत सात मरीज खोजे गए थे। जबकि 21 दिसंबर से लेकर चार जनवरी तक लेप्रोसी केस डिटेक्शन कैंपेन (एलसीडीसी) के दौरान तीन मरीज खोजे गए थे। बताया कि आशा को कुष्ठ रोगी की जांच और इलाज के बाद पीबी मरीज (छह महीने) के ठीक होने पर 400 रुपये तथा पीबी (एक साल) में ठीक होने पर 600 रुपये प्रति मरीज दिए जाते हैं।
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भौहों व कानों के ऊपर सूजन अथवा गांठ होना, त्वचा पर दाने या तेलीय चमक दिखाई पड़ना यह भी कुष्ठ रोग के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। यह जानकारी जिला कुष्ठ अधिकारी डॉ. बलराज ने कुष्ठ रोग दिवस पर दी। बताया कि यह रोग जैनेटिक नहीं होता। कुष्ठ रोग में शरीर में सुन्नपन, चकत्ते होते हैं, लेकिन सफेद दाग कुष्ठ रोग नहीं होता। हाथ पैर में सूखापन, सुन्नपन एवं कमजोरी होने पर भी कुष्ठ रोग की जांच करानी चाहिए।
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इसमें किसी तरह की झिझक अथवा शर्म महसूस नहीं करनी चाहिए। कुष्ठ रोग अभिशाप नहीं है। लिहाजा जांच और उपचार कराकर कुष्ठ रोग से मुक्ति पा सकते हैं। मल्टी ड्रग थेरेपी (एमडीटी) से कुष्ठ रोग का इलाज संभव है। सभी सरकारी अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों में उपचार निशुल्क मिलता है।
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डॉ. बलराज ने बताया कि जिले में इस समय 62 कुष्ठ रोगियों का इलाज चल रहा है। इनमें पैसि बेसलरी (पीबी) के आठ मरीज हैं, जिनका छह महीने इलाज चलता है। मल्टी बेसलरी (एमबी) के 54 मरीज हैं, इनका एक साल इलाज चलता है। अप्रैल से दिसंबर तक 24 कुष्ठ रोगी दवा खाकर ठीक हो चुके हैं। कहा कि कुष्ठ रोगी से कोई भेदभाव न करें। इसी को लेकर गांधी जी की पुण्य तिथि के अवसर पर स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान शुरू हो रहा है, जो 13 फरवरी तक चलेगा। इसमें लोगों को कुष्ठ रोग के प्रति जागरूक किया जाएगा।
बताया कि सितंबर में चले एक्टिव केस एंड रेगुलर स्क्रीनिंग (एसीएंडआरएस) अभियान के तहत सात मरीज खोजे गए थे। जबकि 21 दिसंबर से लेकर चार जनवरी तक लेप्रोसी केस डिटेक्शन कैंपेन (एलसीडीसी) के दौरान तीन मरीज खोजे गए थे। बताया कि आशा को कुष्ठ रोगी की जांच और इलाज के बाद पीबी मरीज (छह महीने) के ठीक होने पर 400 रुपये तथा पीबी (एक साल) में ठीक होने पर 600 रुपये प्रति मरीज दिए जाते हैं।