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ट्रेनें कैसे और कहां से मिलेंगीं, हमें पता ही नहीं
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बिहार के निवासी चितरंजन कुमार यादव ने बताया कि दिल्ली में चप्पल कारखाने में काम करते थे। अखबारों और टीवी पर तो देख रहे हैं कि मजदूरों को ले जाने के लिए ट्रेनें चल रही हैं,
लेकिन ये नहीं बताया जाता कि वहां तक पहुंचे कैसे। स्टेशन तक पहुंचने का भी तो कोई साधन नहीं है। चार दिन पहले दिल्ली से 10 साथियों के साथ पैदल चले थे। रास्ते में कई जगह पुलिस ने रोका।
पुलिस ने रास्ते में ट्रक में कानपुर तक के लिए बैठा दिया। कानपुर के आगे इसी तरह कोई साधन मिल गया तो बैठ जाएंगे नहीं पैदल ही आगे बढ़ेंगे। लॉकडाउन में काम बंद होने से पैसे भी खत्म हो गए थे।
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हरियाणा से बिहार लौट रहे जितेंद्र कुमार ने बताया कि ट्रेन चलने की जानकारी नहीं है। काम बंद होने से कंपनी ने पैसा भी देना बंद कर दिया। जो पैसा था उससे अभी तक खाया अब दिक्कत बढ़ने लगी थी।
वहां राशनकार्ड भी नहीं है। पैदल ही घर के लिए चल दिए। आगरा में पुलिस ने ट्रक में बैठा दिया। ट्रक वाले ने कोई पैसा नहीं लिया।
सरकार अगर मजदूरों के लिए ट्रेनें चला रही है तो कंपनियों से संपर्क करे, मजदूरों को घर पहुंचने में आसानी हो जाएगी।
यतेंद्र ने बताया कि राजस्थान से बिहार लौट रहे हैं। सरकार दिल्ली से ट्रेन चला रही है। राजस्थान से कोई ट्रेन नहीं चली। अगर चली होगी तो हमें इसकी जानकारी नहीं है। बिहार जाना है, आगरा तक पैदल आए हैं।
ट्रक वाले ने कानपुर तक बैठा लिया है। कंपनी में मजदूरी करते हैं, कंपनी बंद होने से अब खाने की दिक्कत भी हो गई थी। छह लोग लौट रहे हैं। रास्ते में शाम को पुलिस ने खाना भी खिला दिया था, सुबह से कुछ नहीं खाया है।
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लेकिन ये नहीं बताया जाता कि वहां तक पहुंचे कैसे। स्टेशन तक पहुंचने का भी तो कोई साधन नहीं है। चार दिन पहले दिल्ली से 10 साथियों के साथ पैदल चले थे। रास्ते में कई जगह पुलिस ने रोका।
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पुलिस ने रास्ते में ट्रक में कानपुर तक के लिए बैठा दिया। कानपुर के आगे इसी तरह कोई साधन मिल गया तो बैठ जाएंगे नहीं पैदल ही आगे बढ़ेंगे। लॉकडाउन में काम बंद होने से पैसे भी खत्म हो गए थे।
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हरियाणा से बिहार लौट रहे जितेंद्र कुमार ने बताया कि ट्रेन चलने की जानकारी नहीं है। काम बंद होने से कंपनी ने पैसा भी देना बंद कर दिया। जो पैसा था उससे अभी तक खाया अब दिक्कत बढ़ने लगी थी।
वहां राशनकार्ड भी नहीं है। पैदल ही घर के लिए चल दिए। आगरा में पुलिस ने ट्रक में बैठा दिया। ट्रक वाले ने कोई पैसा नहीं लिया।
सरकार अगर मजदूरों के लिए ट्रेनें चला रही है तो कंपनियों से संपर्क करे, मजदूरों को घर पहुंचने में आसानी हो जाएगी।
यतेंद्र ने बताया कि राजस्थान से बिहार लौट रहे हैं। सरकार दिल्ली से ट्रेन चला रही है। राजस्थान से कोई ट्रेन नहीं चली। अगर चली होगी तो हमें इसकी जानकारी नहीं है। बिहार जाना है, आगरा तक पैदल आए हैं।
ट्रक वाले ने कानपुर तक बैठा लिया है। कंपनी में मजदूरी करते हैं, कंपनी बंद होने से अब खाने की दिक्कत भी हो गई थी। छह लोग लौट रहे हैं। रास्ते में शाम को पुलिस ने खाना भी खिला दिया था, सुबह से कुछ नहीं खाया है।