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दुष्कर्मी को मिली अंतिम सांस तक जेल में रहने की सजा
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पांच साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म करने वाले मुंहबोले मामा को कोर्ट ने अंतिम सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई है। खास बात यह कि पॉक्सो एक्ट की विशेष कोर्ट ने यह फैसला महज चार महीनों में सुनवाई पूरी करके सुनाया है।
सजा के साथ दुष्कर्मी पर दो लाख रुपये अर्थदंड भी लगाया है। यह पूरी रकम पीड़िता को उसके इलाज और पुनर्वासन के लिए दी जाएगी।
राज्य की ओर से मामले के पैरवीकर्ता विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो) दशरथ सिंह चौहान ने बताया कि यह जघन्य अपराध भरथना थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी परिवार की पांच साल की बेटी के साथ हुआ था।
बढ़पुरा थाना क्षेत्र के जरहौली गांव का रहने वाले दोषी ज्ञान सिंह उर्फ छोटू पुत्र प्रेमनारायण की बहन उक्त पीड़ित परिवार के गांव में ब्याही है। इसी नाते से मासूम बच्ची उसे छोटू मामा कहकर पुकारती थी।
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इस मामले में बच्ची के अनुसूचित जाति वर्ग के पिता ने पिछले साल 25 अक्तूबर को भरथना थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि एक दिन पूर्व उसकी बेटी और पत्नी घर पर थीं। वह बाहर था।
शाम करीब सात बजे जब वह घर लौटा तो पत्नी ने बताया कि बेटी लापता है। परिवार के लोगों के साथ बेटी को तलाश किया तो रात करीब 10 बजे उसकी बेटी गांव के बाहर एक खेत में रोती हुई मिली। उसके खून बह रहा था।
बेटी ने बताया था कि उसे छोटू मामा लेकर आया था और उसके साथ बुरा काम किया है। इसके बाद उसे यहां छोड़कर भाग गया। पिता की सूचना पर पुलिस मासूम को अस्पताल ले गई। पुलिस ने ज्ञानसिंह उर्फ छोटू के खिलाफ धारा 376एबी और पॉक्सो एक्ट की धारा 5/6 के तहत मामला दर्ज किया था।
पुलिस ने अभियुक्त को गिरफ्तार कर कोर्ट में आरोप पत्र प्रस्तुत किया था। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट)/अपर सत्र न्यायाधीश दिनेश कुमार चौरसिया ने साक्ष्यों व गवाहों के बयान पर ज्ञान सिंह को दोषी पाया और सोमवार को उसे अंतिम सांस तक के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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सजा के साथ दुष्कर्मी पर दो लाख रुपये अर्थदंड भी लगाया है। यह पूरी रकम पीड़िता को उसके इलाज और पुनर्वासन के लिए दी जाएगी।
राज्य की ओर से मामले के पैरवीकर्ता विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो) दशरथ सिंह चौहान ने बताया कि यह जघन्य अपराध भरथना थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी परिवार की पांच साल की बेटी के साथ हुआ था।
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बढ़पुरा थाना क्षेत्र के जरहौली गांव का रहने वाले दोषी ज्ञान सिंह उर्फ छोटू पुत्र प्रेमनारायण की बहन उक्त पीड़ित परिवार के गांव में ब्याही है। इसी नाते से मासूम बच्ची उसे छोटू मामा कहकर पुकारती थी।
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इस मामले में बच्ची के अनुसूचित जाति वर्ग के पिता ने पिछले साल 25 अक्तूबर को भरथना थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि एक दिन पूर्व उसकी बेटी और पत्नी घर पर थीं। वह बाहर था।
शाम करीब सात बजे जब वह घर लौटा तो पत्नी ने बताया कि बेटी लापता है। परिवार के लोगों के साथ बेटी को तलाश किया तो रात करीब 10 बजे उसकी बेटी गांव के बाहर एक खेत में रोती हुई मिली। उसके खून बह रहा था।
बेटी ने बताया था कि उसे छोटू मामा लेकर आया था और उसके साथ बुरा काम किया है। इसके बाद उसे यहां छोड़कर भाग गया। पिता की सूचना पर पुलिस मासूम को अस्पताल ले गई। पुलिस ने ज्ञानसिंह उर्फ छोटू के खिलाफ धारा 376एबी और पॉक्सो एक्ट की धारा 5/6 के तहत मामला दर्ज किया था।
पुलिस ने अभियुक्त को गिरफ्तार कर कोर्ट में आरोप पत्र प्रस्तुत किया था। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट)/अपर सत्र न्यायाधीश दिनेश कुमार चौरसिया ने साक्ष्यों व गवाहों के बयान पर ज्ञान सिंह को दोषी पाया और सोमवार को उसे अंतिम सांस तक के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।