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बाढ़ से बिगड़ी सड़कों की हालत एक साल बाद भी नहीं सुधरी
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बाढ़ के बाद सड़क के किनारे और नीचे की मिट्टी हटने से हो गई है खोखली।
- फोटो : ETAWAH
चकरनगर (इटावा)। सड़कों की मरम्मत कराने के प्रशासन के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। बीहड़ क्षेत्र में बाढ़ में बही कयांछी-भरेह संगम सड़क आठ माह बाद भी नहीं बनाई गईं हैं। अधिकारी बजट न होने का बहाना बनाकर जनता के जख्मों पर नमक छिड़क रहे हैं।
वर्ष 2021 में यमुना और चंबल नदियों की बाढ़ ने कांयछी गांव से भरेह संगम तक सड़क कई जगह बह गई थी। कई जगह सड़क नीचे से खोखली हो गई है। भरेह गांव के प्रधान राघवेंद्र सिंह सेंगर, हरौली प्रधान मनीष दीक्षित, पथर्रा प्रधान भूप सिंह निषाद ने बताया सड़क की मरम्मत के लिए मंत्रियों से लेकर अधिकारियों तक समस्या लेकर गए लेकिन हर जगह केवल आश्वासन ही मिला।
चकरनगर-भरेह से 50 गांव के लोगों का आवागमन होता है। इस सड़क से हाईवे के लिए भी सीधा रास्ता है। अधिशाषी अभियंता लोक निर्माण विभाग एसके गौतम ने बताया कि बाढ़ में क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत के लिए बाढ़ राहत कोष से पैसा नहीं मिला है। मुख्य मार्ग बाढ़ में मिट्टी बह जाने खोखले हो गया है। मरम्मत के लिए अतिरिक्त बजट की आवश्यकता है। विभाग के पास जो बजट है उसी से रखरखाव किया जा रहा है।
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वर्ष 2021 में यमुना और चंबल नदियों की बाढ़ ने कांयछी गांव से भरेह संगम तक सड़क कई जगह बह गई थी। कई जगह सड़क नीचे से खोखली हो गई है। भरेह गांव के प्रधान राघवेंद्र सिंह सेंगर, हरौली प्रधान मनीष दीक्षित, पथर्रा प्रधान भूप सिंह निषाद ने बताया सड़क की मरम्मत के लिए मंत्रियों से लेकर अधिकारियों तक समस्या लेकर गए लेकिन हर जगह केवल आश्वासन ही मिला।
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चकरनगर-भरेह से 50 गांव के लोगों का आवागमन होता है। इस सड़क से हाईवे के लिए भी सीधा रास्ता है। अधिशाषी अभियंता लोक निर्माण विभाग एसके गौतम ने बताया कि बाढ़ में क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत के लिए बाढ़ राहत कोष से पैसा नहीं मिला है। मुख्य मार्ग बाढ़ में मिट्टी बह जाने खोखले हो गया है। मरम्मत के लिए अतिरिक्त बजट की आवश्यकता है। विभाग के पास जो बजट है उसी से रखरखाव किया जा रहा है।
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