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Etawah News: बेमौसम तरबूज की फसल से कमाया मोटा मुनाफा
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इटावा। महेवा ब्लॉक के गुलाबपुरा गांव निवासी हरिश्चंद्र ने खेती-किसानी में अलग प्रयोग किया है। अमूमन गर्मियों में होने वाली तरबूज की फसल उन्होंने हल्की सर्दी में उगाकर मोटा मुनाफा कमाया। मात्र 10 हजार रुपये लगाकर उन्होंने 1.20 लाख रुपये की फसल बेची है।
किसान हरिश्चंद्र ने कन्नौज के एक्सीलेंस सेंटर फॉर वेजीटेबल्स की मदद से दो हजार रुपये के बीज लिए थे। इसके बाद मालचिंग विधि से इसकी बुआई की। इस विधि के लिए उन्होंने दो हजार रुपये की पॉलिथीन खरीदी। फसल की बुआई सितंबर के मध्य में की गई। 65 दिन में फसल तैयार हो गई। पहली पैदावार करीब 15 क्विंटल निकली। इसके बाद दो बार और तुड़ाई कराई, जिसमें करीब 45 क्विंटल पैदावार निकली। तीन बार की तुड़ाई में करीब 60 क्विंटल तरबूज मिल चुका है। बाजार में इसकी बिक्री 20 रुपये प्रति किलो के भाव से की। इससे 1.20 लाख रुपये मिले। जनवरी के मध्य तक फल आएंगे, यानि एक बार तुड़ाई और हो सकेगी।
हरिश्चंद्र ने बताया कि उन्होंने खेत पर ही गोबर की खाद तैयार की और उसी की मदद से फसल तैयार की। उनकी फसल पूरी तरह आर्गेनिक है। एक बार भी न तो कीटनाशक का छिड़काव किया और न ही रसायनिक खाद ही इस्तेमाल किया गया। यही कारण है कि फसल के दाम भी अच्छे मिले। मंगलवार से उन्होंने अपने खेत में खीरे की बुआई भी शुरू कराई है। यह फसल भी अमूमन जनवरी के आखिरी में बोई जाती है। लेकिन वह अगेती खेती के जरिये इस फसल को कर रहे हैं। समय से पहले फसल तैयार होगी तो उसके दाम भी अच्छे मिलेंगे।
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आर्गेनिक खेती के लिए किसानों को जागरूक कर रहे
किसान हरिश्चंद्र खुद तो आर्गेनिक खेती करते ही हैं साथ ही दूसरे किसानों को भी इसके लिए जागरूक कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस समय उनके खेत में टमाटर की फसल भी हो रही है। उसमें भी वह गोबर से बनी खाद ही डालते हैं। अभी तक उन्होंने पांच लोगों को गोबर से खाद बनाने का प्लांट लगवाया है। इससे उन किसानों की आमदनी भी बढ़ी है।
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किसान हरिश्चंद्र ने कन्नौज के एक्सीलेंस सेंटर फॉर वेजीटेबल्स की मदद से दो हजार रुपये के बीज लिए थे। इसके बाद मालचिंग विधि से इसकी बुआई की। इस विधि के लिए उन्होंने दो हजार रुपये की पॉलिथीन खरीदी। फसल की बुआई सितंबर के मध्य में की गई। 65 दिन में फसल तैयार हो गई। पहली पैदावार करीब 15 क्विंटल निकली। इसके बाद दो बार और तुड़ाई कराई, जिसमें करीब 45 क्विंटल पैदावार निकली। तीन बार की तुड़ाई में करीब 60 क्विंटल तरबूज मिल चुका है। बाजार में इसकी बिक्री 20 रुपये प्रति किलो के भाव से की। इससे 1.20 लाख रुपये मिले। जनवरी के मध्य तक फल आएंगे, यानि एक बार तुड़ाई और हो सकेगी।
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हरिश्चंद्र ने बताया कि उन्होंने खेत पर ही गोबर की खाद तैयार की और उसी की मदद से फसल तैयार की। उनकी फसल पूरी तरह आर्गेनिक है। एक बार भी न तो कीटनाशक का छिड़काव किया और न ही रसायनिक खाद ही इस्तेमाल किया गया। यही कारण है कि फसल के दाम भी अच्छे मिले। मंगलवार से उन्होंने अपने खेत में खीरे की बुआई भी शुरू कराई है। यह फसल भी अमूमन जनवरी के आखिरी में बोई जाती है। लेकिन वह अगेती खेती के जरिये इस फसल को कर रहे हैं। समय से पहले फसल तैयार होगी तो उसके दाम भी अच्छे मिलेंगे।
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आर्गेनिक खेती के लिए किसानों को जागरूक कर रहे
किसान हरिश्चंद्र खुद तो आर्गेनिक खेती करते ही हैं साथ ही दूसरे किसानों को भी इसके लिए जागरूक कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस समय उनके खेत में टमाटर की फसल भी हो रही है। उसमें भी वह गोबर से बनी खाद ही डालते हैं। अभी तक उन्होंने पांच लोगों को गोबर से खाद बनाने का प्लांट लगवाया है। इससे उन किसानों की आमदनी भी बढ़ी है।