फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Etawah News ›   struggle and people love makes mulayam dharti putra

संघर्षों और अपनों के प्यार ने बनाया धरती पुत्र

Tue, 11 Oct 2022 12:58 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 11 Oct 2022 12:58 AM IST
विज्ञापन
struggle and people love makes mulayam  dharti putra
इटावा। सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के निधन की सूचना पर गांव के बुजुर्ग उनके आवास के पास बने तालाब की चहारदीवार पर बैठकर उनके संघर्षों की चर्चाएं करते रहे। उन्होंने कहा कि संघर्ष और अपनों के प्यार ने ही उन्हें धरती पुत्र बनाया।
विज्ञापन

गांव के रामबहादुर (77) ने कहा कि करहल के जैन इंटर कॉलेज में हम कक्षा छह में थे, तब नेता जी कक्षा 12 में थे। नेता जी में शुरुआत से लोगों की बात उठाने का जज्बा था। वह स्कूल में भी साथियों को कोई परेशानी होने पर शिक्षकों और अभिभावकों के सामने खुलकर कह देते थे। नेता जी को बचपन से ही कुश्ती का शौक था।
विज्ञापन

वह गांव के चंदगीराम स्टेडियम की खाली पड़ी जमीन पर बने अखाड़े और उनके आवास के सामने खेतों में कुएं पर कुश्ती करते थे। यहां उन्होंने अपने साथ उस गांव के कई युवाओं को भी कुश्ती के दाव पेंच सिखाए।
विज्ञापन
विज्ञापन

यहीं पर चर्चा कर रहे गांव के ही रमेश चंद (60) बोले कि नेता जी ऐसे ही धरती पुत्र नहीं कहलाए। उन्होंने अपनों के लिए संघर्ष किया है। बताया कि 1980 में चुनावी माहौल था। उस दौरान एक दावत में गांव के लोग छिमारा गए थे।
यहां विरोधियों ने हमला कर दिया। हम लोग किसी तरह नेता जी और खुद को बचाकर गांव लाए थे। साथ में ही बैठे गांव के रामस्वरूप (70) ने कहा कि नेता जी ने पूरे गांव में कभी किसी को पराये जैसा महसूस ही नहीं होने दिया। किसी के घर में भी मुसीबत होते ही वह दौड़े चले आते थे।
गांव के शिवबरन सिंह मैनपुरी कोर्ट में कर्मचारी हैं। उन्होंने बताया कि हमारे पिता बालिस्टर नेता जी के बचपन के मित्र थे। दोनों के बीच इतना लगाव था कि पिता जी से छोटे-छोटे कार्यक्रमों में भी नेजा जी मिलने चले आते थे। होली की फाग में हमेशा पिता जी को गले लगाकर उनके हालचाल लेते थे।
हम छोटी बिरादरी के यह कभी एहसास ही नहीं होने दिया
सैफई। नेता जी किसी जाति बरादरी को नहीं मानते थे, वह जन जन के नेता थे। यह बात नेता जी की मौत से दुखी उनके बचपन के साथी और सैफई प्रधान रामफल बाल्मिकी ने कही। उन्होंने कहा कि जब पहली बार नेता जी मुख्यमंत्री बनकर आए तो उड़न खटोला देखकर महिलाओं ने घूंघट कर लिया था। जब नेता जी उड़न खटोला से उतरे तो मेरी मां और उनकी उम्र की महिलाओं से बोले कि अरे चाची हम अभेयो आपके लला मुलायम ही हैं। प्रधान ने बताया कि 1971 में उनके पिता बीमार थे। कैंसर से उनकी हालत बिगड़ गई थी। जानकारी मिलते ही नेता जी लखनऊ से सीधे घर पर मिलने आ गए थे। उन्होंने पिता जी को बेहतर उपचार का भारोस दिया था।

नेता जी कर्मस्थली रही है जसवंतनगर
जसवंतनगर। सैफई से आठ किलोमीटर दूर जसवंतनगर नेता जी की कर्मस्थली रही है। 1967 के बाद लगातार सात बार जसवंतनगर की सीट से विधायक रहे थे। अस्वस्थ होने की वजह से वह दो वर्ष से अपनी कर्मस्थली नहीं आ सके थे। निधन की जानकारी मिलते ही नगरवासी फफकने लगे। शोक में बाजार बंद हो गया और लोग सैफई की ओर दौड़ने लगे। रामलीला समिति जसवंतनगर द्वारा आयोजित समस्त कार्यक्रम भी निरस्त कर दिए गए। समिति के मंत्री हीरालाल गुप्ता ने बताया कि जसवंतनगर के लोगों से 55 वर्षों पुराना नाता था। यहां के गांवों गलियों तक में उनकी अपनी पहचान थी। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed