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कलशयात्रा के साथ भागवत कथा शुरू
अमर उजाला ब्यूरो, इटावा
Updated Thu, 11 Feb 2016 11:37 PM IST
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गांव कुंवरा में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ समारोह का शुभारंभ मंगल कलश यात्रा के साथ हुआ। इस दौरान गाजे बाजे के साथ निकली कलश यात्रा का जगह-जगह स्वागत किया गया। समारोह का शुभारंभ मंगल कलश यात्रा गाजे बाजे के साथ विभिन्न देवस्थानों पर विधि विधान से पूजन से हुआ।
भक्तों ने कलश को सिर पर धारण कर विभिन्न मार्गों पर जयघोष करते हुए माहौल को भक्तिमय बनाया। कलश यात्रा में परीक्षित श्री भागवत पुराण को धारण कर सबसे आगे रहे। वही उनके पीछे महिलाएं कलश धारण करके चल रही थी।पांडाल में मंगल कलश स्थापित करवाकर कथावाचक प.मनोज अवस्थी ने श्री गणेश पूजन के साथ कथा शुभारंभ की।
उधर, जसवंतनगर में खटखटा बाबा कुटिया परिसर में हो रही श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन कथावाचक स्वामी श्रीप्रकाश चैतन्य महाराज ने सुदामा चरित्र का वर्णन कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने कहा सुदामा ने कृष्ण से कभी कुछ मांगा नहीं, लेकिन उनकी अटूट भक्ति ने उन्हें सब कुछ दिला दिया। कथावाचक ने कहा कि सुदामा गरीब थे, लेकिन वह किसी से कुछ मांगने नहीं गए।
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वह गरीबी से जूझते रहे लेकिन गोविंद का स्मरण नहीं छोड़ा। उनकी इसी भक्ति सेगोविंद ने उन्हें मालामाल कर दिया। कथा के दौरान महिला व पुरुषों ने भक्ति गीतों पर खूब नृत्य किया। इससे पूर्व यज्ञाचार्य श्रीप्रकाश द्विवेदी ने मत्रोंच्चार के बीच हवन पूजन करवाया।
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भक्तों ने कलश को सिर पर धारण कर विभिन्न मार्गों पर जयघोष करते हुए माहौल को भक्तिमय बनाया। कलश यात्रा में परीक्षित श्री भागवत पुराण को धारण कर सबसे आगे रहे। वही उनके पीछे महिलाएं कलश धारण करके चल रही थी।पांडाल में मंगल कलश स्थापित करवाकर कथावाचक प.मनोज अवस्थी ने श्री गणेश पूजन के साथ कथा शुभारंभ की।
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उधर, जसवंतनगर में खटखटा बाबा कुटिया परिसर में हो रही श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन कथावाचक स्वामी श्रीप्रकाश चैतन्य महाराज ने सुदामा चरित्र का वर्णन कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने कहा सुदामा ने कृष्ण से कभी कुछ मांगा नहीं, लेकिन उनकी अटूट भक्ति ने उन्हें सब कुछ दिला दिया। कथावाचक ने कहा कि सुदामा गरीब थे, लेकिन वह किसी से कुछ मांगने नहीं गए।
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वह गरीबी से जूझते रहे लेकिन गोविंद का स्मरण नहीं छोड़ा। उनकी इसी भक्ति सेगोविंद ने उन्हें मालामाल कर दिया। कथा के दौरान महिला व पुरुषों ने भक्ति गीतों पर खूब नृत्य किया। इससे पूर्व यज्ञाचार्य श्रीप्रकाश द्विवेदी ने मत्रोंच्चार के बीच हवन पूजन करवाया।