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471 ग्राम पंचायतों में खरीदे गए प्रोजेक्टर का नहीं हो रहा सदुपयोग

Thu, 23 Jul 2020 11:03 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 23 Jul 2020 11:03 PM IST
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Purchased projectors for 471 panchayats, but not given internet
4सरकारी पैसे का बिना समझे सोचे किस तरह से दुरुपयोग होता है इसकी बानगी 471 ग्राम पंचायतों के लिए खरीदे गए प्रोजेक्टर और डिवाइस को देखने से मिलती है।
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डिजिटल इंडिया के नाम पर 1.97 करोड़ की राशि खर्च कर ये उपकरण खरीद तो लिए गए, लेकिन इंटरनेट और वाईफाई की सुविधा नहीं दी गई। ऐसे में इनका सदुपयोग नहीं हो पा रहा है।
वर्ष 2017-18 में जिले की 471 ग्राम पंचायतोें में प्रोजेक्टर और डिवाइस खरीदे गए थे। करीब 42 हजार रुपये का एक प्रोजेक्टर डिवाइस के हिसाब से 1 करोड 97 लाख 82 हजार रुपये खर्च किए गए।
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बेसिक शिक्षा परिषदीय विद्यालयों में ऑनलाइन उपस्थिति के लिए डिवाइस दी भी र्गइं। प्रोजेक्टर का उपयोग विद्यालयों में पढ़ाई लिखाई एवं गांव में सामाजिक जागरुकता के लिए किया जाना था।
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प्रोजेक्टर और डिवाइस तो गांव पहुंच गए पर सबसे बड़ी समस्या तब आई जब इनके लिए इंटरनेट कनेक्शन अथवा वाईफाई की सुविधा नहीं दी गई। गांव में बिजली के आने जाने का कोई समय नहीं होता इसलिए बिजली का कोई वैकल्पिक इंतजाम करना चाहिए था।
वह भी नहीं किया गया। फलस्वरूप प्रोजेक्टर से गांव में डिजिटल क्रांति का सपना अधूरा ही रह गया। ग्राम प्रधानों ने इन प्रोजेक्टर को जनसेवा केंद्रों के माध्यम से संचालित करने का प्रस्ताव रखा था। यह भी तय किया गया था कि जनसेवा केंद्र के संचालक अपने संसाधनों से प्रोजेक्टर चलवाएंगे।
इसके लिए उन्हें तीन हजार रुपये मासिक खर्चा दिया जाएगा। तत्कालीन जिलाधिकारी सेल्वा कुमारी जे के कार्यकाल में लागू यह व्यवस्था भी उनके तबादले के साथ ही बंद हो गई।
शासन के एक करोड़ से अधिक रुपये इस योजना में खर्च हो गया परंतु उसका कोई नतीजा नहीं निकला।
ग्राम प्रधान संगठन के प्रांतीय नेता कौशल किशोर पांडेय का कहना है कि योजनाएं तो बनाईं जाती हैं, परंतु उनका क्रियान्वयन सही ढंग से नहीं होता। यही कारण है कि धरातल पर ऐसी योजनाएं फेल हो जाती हैं।

प्रोजेक्टर और डिवाइस के साथ लैपटॉप, जेनरेटर और वाईफाई कनेक्शन की सुविधा भी दे दी जाती तो अच्छे परिणाम सामने आतेे। विकल्प के तौर पर जनसेवा केंद्रों को भी इसकी जिम्मेदारी दी जा सकती थी। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रशासन को इस बारे में ठोस रणनीति बनानी चाहिए।
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