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केपी सिंह की पत्नी शांति बनीं डीसीडीएफ की सभापति
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निर्वाचित सभापति शांती देवी उपसभापित मिथलेश के साथ पूर्व दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री केपी सिंह च?
- फोटो : ETAWHA
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इटावा। पूर्व दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री केपी सिंह चौहान की पत्नी शांति देवी गुरुवार को डीसीडीएफ की सभापति चुनीं गईं। उपसभापति पद पर उपदेश सिंह यादव उर्फ छुन्ना की पत्नी मिथलेश कुमारी को चुना गया। दोनों ही पदों पर निर्विरोध निर्वाचन हुए। पिछले बार केपी सिंह सभापति और उपदेश उपसभापति थे।
जिला सहकारी विकास संघ (डीसीडीएफ) के सभापति और उपसभापति पद के लिए गुरुवार सुबह शांति देवी ने सभापति और मिथलेश कुमारी ने उपसभापति पद के लिए चुनाव अधिकारी/ अतिरिक्त मजिस्ट्रेट सत्य प्रकाश के समक्ष नामांकन पत्र जमा किया।
एक-एक नामांकन होने से दोनों पदों पर निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा कर दी गई। प्रसपा समर्थक संचालकों के साथ आने से सपा के करीबी केपी सिंह चौहान ने दोनों ही पदों पर कब्जा कर लिया। बुधवार को हुए संचालक के चुनाव में 13 मेें ज्यादातर संचालक सपा और प्रसपा समर्थक चुने गए थे। भाजपा ने अपने पांच संचालक जीतने का दावा किया था लेकिन प्रसपा और सपा के साथ आने से भाजपा सभापति और उपसभापति पद पर दावेदारी से पीछे हट गई।
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चुनाव प्रक्रिया संपादित कराने के लिए डीसीडीएफ के सचिव रजपाल सिंह भदौरिया, एएसपी सिटी रामयश सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट सत्येंद्रनाथ शुक्ला एवं पुलिस बल मौजूद रहा।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल यादव में प्रदेशस्तर पर भले ही राजनीतिक तल्खी चल रही है लेकिन इटावा के डीसीडीएफ की कुर्सी के लिए दोनों दलों के नेता करीब आ गए।
डीसीडीएफ के सभापति और उपसभापति पद पर कई वर्ष से सपा का कब्जा है। पिछली बाद सपा नेता केपी सिंह चौहान सभापति चुने गए थे। इस बार भाजपा ने भी मजबूती से संचालक पदों पर दावेदारी पेश की थी।
संचालक पद के परिणाम आने के बाद भाजपा नेताओं ने पांच संचालक जीतने का दावा भी किया था। भाजपा को उम्मीद थी कि अगर प्रसपा और सपा में दूरी हुई तो वह बाजी मार लेगी किंतु कुर्सी जाती देख सपा और प्रसपा नेता एक हो गए। सुबह केपी सिंह चौहान प्रसपा नेता के होटल पहुंचे, कई संचालक भी उनके साथ थे।
यहीं रणनीति बनीं। इसके बाद दोनों दलों के नेता सभापति और उपसभापति का नामांकन कराने पहुंचे।
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जिला सहकारी विकास संघ (डीसीडीएफ) के सभापति और उपसभापति पद के लिए गुरुवार सुबह शांति देवी ने सभापति और मिथलेश कुमारी ने उपसभापति पद के लिए चुनाव अधिकारी/ अतिरिक्त मजिस्ट्रेट सत्य प्रकाश के समक्ष नामांकन पत्र जमा किया।
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एक-एक नामांकन होने से दोनों पदों पर निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा कर दी गई। प्रसपा समर्थक संचालकों के साथ आने से सपा के करीबी केपी सिंह चौहान ने दोनों ही पदों पर कब्जा कर लिया। बुधवार को हुए संचालक के चुनाव में 13 मेें ज्यादातर संचालक सपा और प्रसपा समर्थक चुने गए थे। भाजपा ने अपने पांच संचालक जीतने का दावा किया था लेकिन प्रसपा और सपा के साथ आने से भाजपा सभापति और उपसभापति पद पर दावेदारी से पीछे हट गई।
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चुनाव प्रक्रिया संपादित कराने के लिए डीसीडीएफ के सचिव रजपाल सिंह भदौरिया, एएसपी सिटी रामयश सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट सत्येंद्रनाथ शुक्ला एवं पुलिस बल मौजूद रहा।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल यादव में प्रदेशस्तर पर भले ही राजनीतिक तल्खी चल रही है लेकिन इटावा के डीसीडीएफ की कुर्सी के लिए दोनों दलों के नेता करीब आ गए।
डीसीडीएफ के सभापति और उपसभापति पद पर कई वर्ष से सपा का कब्जा है। पिछली बाद सपा नेता केपी सिंह चौहान सभापति चुने गए थे। इस बार भाजपा ने भी मजबूती से संचालक पदों पर दावेदारी पेश की थी।
संचालक पद के परिणाम आने के बाद भाजपा नेताओं ने पांच संचालक जीतने का दावा भी किया था। भाजपा को उम्मीद थी कि अगर प्रसपा और सपा में दूरी हुई तो वह बाजी मार लेगी किंतु कुर्सी जाती देख सपा और प्रसपा नेता एक हो गए। सुबह केपी सिंह चौहान प्रसपा नेता के होटल पहुंचे, कई संचालक भी उनके साथ थे।
यहीं रणनीति बनीं। इसके बाद दोनों दलों के नेता सभापति और उपसभापति का नामांकन कराने पहुंचे।