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Etawah News: जमीन ही नहीं, कहां बने हाईटेक नर्सरी
Mon, 27 Mar 2023 12:15 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
Updated Mon, 27 Mar 2023 12:15 AM IST
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इटावा। जिले में दो हाईटेक नर्सरी विकसित होने की उम्मीदों को झटका लगा है। प्रदेश सरकार की इस योजना के जरिये 200 महिलाओं को सीधे तौर पर रोजगार उपलब्ध होना था। ग्रामीण क्षेत्र में कृषि विज्ञान केंद्र और उद्यान विभाग की जमीन न होने के कारण पेच फंस गया है। शासन ने फिलहाल प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
इन हाईटेक नर्सरी की मदद से किसानों को मदद मिलनी थी। अभी किसान टमाटर, बैंगन, मिर्च, खरबूजा, तरबूज, तरोई, लौकी, कद्दू, शिमला मिर्च आदि की फसल करने से पहले पौध तैयार करते हैं। बीज बोने और पौध तैयार होने में 20 से 25 दिन लगते हैं। जो किसान अगेती फसल करना चाहते हैं उनके लिए 20 से 25 दिन का समय काफी अहम होता है। दरअसल, अगेती फसल जितनी जल्दी बाजार में आ जाती है, किसानों को उसके दाम उतने अच्छे मिलते हैं।
किसानों की इस समस्या को दूर करने के लिए सरकार ने प्रदेश के हर जिले में हाईटेक नर्सरी विकसित करने का निर्णय लिया था। इनमें पॉली हाउस बनाकर आधुनिक विधि से सिंचाई के जरिये इन फसलों की पौध तैयार की जानी थी। तैयार पौध एक या दो रुपये में किसानों को उपलब्ध कराई जाती। इससे किसानों की फसल 20 से 25 दिन पहले ही तैयार हो जाती और उन्हें अच्छा मुनाफा होता। इस काम में ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत समूह की महिलाओं को लगाया जाना था। इससे इन महिलाओं को भी रोजगार के अच्छे संसाधन उपलब्ध होते।
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इन्हें तैयार करने की जिम्मेदारी कृषि उत्पादन आयुक्त लखनऊ मनोज कुमार सिंह को दी गई। इन्होंने करीब चार माह पहले इस संबंध में आदेश जारी किए। शर्त थी कि नर्सरी का निर्माण जिला विज्ञान केंद्र या फिर उद्यान विभाग के ग्रामीण क्षेत्र में स्थित परिसर में किया जाए। इसके पीछे तर्क था कि यहां पहले से कई सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। जैसे बाउंड्रीवॉल, पानी, उत्तम किस्म की मिट्टी आदि। इससे नर्सरी को शुरू करने में न तो ज्यादा बजट खर्च करना पड़ेगा और न ही ज्यादा समय लगेगा।
लेकिन जिले में यह दोनों केंद्र शहरी क्षेत्र में हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इन दोनों के पास न तो कोई जमीन है और न ही इनका कोई केंद्र ही संचालित है। ऐसे में प्रोजेक्ट धरातल पर उतरने से पहले ही बीच में फंस गया। पिछले दिनों जिला उद्यान अधिकारियों की लखनऊ में कृषि उत्पादन आयुक्त के साथ हुई बैठक में इसी मुद्दे पर चर्चा भी हुई। तय हुआ कि इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए दूसरे विकल्प तैयार करने की जरूरत है।
निवाड़ीकला खुर्द और लाखापुर बन सकते हैं विकल्प
जिला स्तर से इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के प्रयास जारी हैं। जिला विकास अधिकारी की ओर से निवाड़ीकला खुर्द और लाखापुर में जमीन देखी गई है। एक नर्सरी के लिए एक हेक्टेयर जमीन की जरूरत है। इन दोनों जगहों पर एक-एक हेक्टेयर जमीन उपलब्ध है। मनरेगा के तहत इसी जमीन पर हाईटेक नर्सरी विकसित करने पर विचार चल रहा है।
कृषि विज्ञान केंद्र और जिला उद्यान केंद्र शहरी क्षेत्र में हैं। हाईटेक नर्सरी ग्रामीण क्षेत्र में विकसित की जानी है। एक नर्सरी के लिए एक हेक्टेयर जमीन की जरूरत है, जो दोनों विभागों के पास नहीं है। ऐसे में शासन स्तर से इस प्रोजेक्ट को अगला विकल्प न मिलने तक रोका गया है। हालांकि इस मामले में जिला प्रशासन की ओर से जमीन की तलाश चल रही है। - डॉ. सुनील कुमार, जिला उद्यान अधिकारी।
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इन हाईटेक नर्सरी की मदद से किसानों को मदद मिलनी थी। अभी किसान टमाटर, बैंगन, मिर्च, खरबूजा, तरबूज, तरोई, लौकी, कद्दू, शिमला मिर्च आदि की फसल करने से पहले पौध तैयार करते हैं। बीज बोने और पौध तैयार होने में 20 से 25 दिन लगते हैं। जो किसान अगेती फसल करना चाहते हैं उनके लिए 20 से 25 दिन का समय काफी अहम होता है। दरअसल, अगेती फसल जितनी जल्दी बाजार में आ जाती है, किसानों को उसके दाम उतने अच्छे मिलते हैं।
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किसानों की इस समस्या को दूर करने के लिए सरकार ने प्रदेश के हर जिले में हाईटेक नर्सरी विकसित करने का निर्णय लिया था। इनमें पॉली हाउस बनाकर आधुनिक विधि से सिंचाई के जरिये इन फसलों की पौध तैयार की जानी थी। तैयार पौध एक या दो रुपये में किसानों को उपलब्ध कराई जाती। इससे किसानों की फसल 20 से 25 दिन पहले ही तैयार हो जाती और उन्हें अच्छा मुनाफा होता। इस काम में ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत समूह की महिलाओं को लगाया जाना था। इससे इन महिलाओं को भी रोजगार के अच्छे संसाधन उपलब्ध होते।
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इन्हें तैयार करने की जिम्मेदारी कृषि उत्पादन आयुक्त लखनऊ मनोज कुमार सिंह को दी गई। इन्होंने करीब चार माह पहले इस संबंध में आदेश जारी किए। शर्त थी कि नर्सरी का निर्माण जिला विज्ञान केंद्र या फिर उद्यान विभाग के ग्रामीण क्षेत्र में स्थित परिसर में किया जाए। इसके पीछे तर्क था कि यहां पहले से कई सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। जैसे बाउंड्रीवॉल, पानी, उत्तम किस्म की मिट्टी आदि। इससे नर्सरी को शुरू करने में न तो ज्यादा बजट खर्च करना पड़ेगा और न ही ज्यादा समय लगेगा।
लेकिन जिले में यह दोनों केंद्र शहरी क्षेत्र में हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इन दोनों के पास न तो कोई जमीन है और न ही इनका कोई केंद्र ही संचालित है। ऐसे में प्रोजेक्ट धरातल पर उतरने से पहले ही बीच में फंस गया। पिछले दिनों जिला उद्यान अधिकारियों की लखनऊ में कृषि उत्पादन आयुक्त के साथ हुई बैठक में इसी मुद्दे पर चर्चा भी हुई। तय हुआ कि इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए दूसरे विकल्प तैयार करने की जरूरत है।
निवाड़ीकला खुर्द और लाखापुर बन सकते हैं विकल्प
जिला स्तर से इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के प्रयास जारी हैं। जिला विकास अधिकारी की ओर से निवाड़ीकला खुर्द और लाखापुर में जमीन देखी गई है। एक नर्सरी के लिए एक हेक्टेयर जमीन की जरूरत है। इन दोनों जगहों पर एक-एक हेक्टेयर जमीन उपलब्ध है। मनरेगा के तहत इसी जमीन पर हाईटेक नर्सरी विकसित करने पर विचार चल रहा है।
कृषि विज्ञान केंद्र और जिला उद्यान केंद्र शहरी क्षेत्र में हैं। हाईटेक नर्सरी ग्रामीण क्षेत्र में विकसित की जानी है। एक नर्सरी के लिए एक हेक्टेयर जमीन की जरूरत है, जो दोनों विभागों के पास नहीं है। ऐसे में शासन स्तर से इस प्रोजेक्ट को अगला विकल्प न मिलने तक रोका गया है। हालांकि इस मामले में जिला प्रशासन की ओर से जमीन की तलाश चल रही है। - डॉ. सुनील कुमार, जिला उद्यान अधिकारी।