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मगरमच्छ और घड़ियाल के लेकर कोई जागरूकता बोर्ड और पेटिंग नहीं
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चकरनगर (इटावा)। चंबल सेंक्चुअरी क्षेत्र में मगरमच्छों और घड़ियालों के प्रति जागरूकता न होना भी घटनाओं की वजह बन रहा है। पचनदा से लेकर कंसुआ तक 40 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में 40 जागरूकता बोर्ड लगाए गए हैं। इनमें तेंदुए और लकड़बग्घे से सावधान किया गया है। बोर्डों पर मगरमच्छ और घड़ियालों से सावधान नहीं किया गया है।
राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य खुला अभ्यारण्य है। इसके बावजूद इसमें सुरक्षा की दृष्टि से ठोस कदम नहीं उठाए हैं। वर्ष 1979 से इसे विलुप्त जीवों के संरक्षण के लिए संचालित किया गया था। अब यह अभयारण्य मानव जीवन के घातक होता जा रहा। चंबल नदी से मगरमच्छ और घड़ियाल आसपास के गांवों और तालाबों में पहुंच रहे हैं। चंबल नदी में पानी भरने और पीने आने वाले लोगों को जानवरों का मगरमच्छ व घड़ियाल शिकार कर लेते हैं। 22 दिनों में दो बच्चियों को मगरमच्छ खा चुके हैं। पहले भी कई हादसे हो चुके हैं फिर भी नदी के आसपास मगरमच्छ व घड़ियाल से सावधान रहने के बोर्ड नहीं लगाए गए हैं।
सेंचुरी रेंजर हरि किशोर शुक्ला का दावा है कि क्षेत्र में 24 से अधिक स्थानों पर वॉलपेंटिंग करवाई गई है। गांव के मुख्य स्थानों पर बोर्ड लगवा कर जागरूक किया गया है। गोष्ठियां भी की जाती हैं। डीएफओ दिवाकर श्रीवास्तव ने कहा कि चंबल सेंचुरी में तेंदुए और लकड़बग्घे को लेकर जागरूकता पर ज्यादा जोर दिया गया। अब घड़ियाल मगरमच्छ की जागरूकता के लिए भी बोर्डों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
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राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य खुला अभ्यारण्य है। इसके बावजूद इसमें सुरक्षा की दृष्टि से ठोस कदम नहीं उठाए हैं। वर्ष 1979 से इसे विलुप्त जीवों के संरक्षण के लिए संचालित किया गया था। अब यह अभयारण्य मानव जीवन के घातक होता जा रहा। चंबल नदी से मगरमच्छ और घड़ियाल आसपास के गांवों और तालाबों में पहुंच रहे हैं। चंबल नदी में पानी भरने और पीने आने वाले लोगों को जानवरों का मगरमच्छ व घड़ियाल शिकार कर लेते हैं। 22 दिनों में दो बच्चियों को मगरमच्छ खा चुके हैं। पहले भी कई हादसे हो चुके हैं फिर भी नदी के आसपास मगरमच्छ व घड़ियाल से सावधान रहने के बोर्ड नहीं लगाए गए हैं।
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सेंचुरी रेंजर हरि किशोर शुक्ला का दावा है कि क्षेत्र में 24 से अधिक स्थानों पर वॉलपेंटिंग करवाई गई है। गांव के मुख्य स्थानों पर बोर्ड लगवा कर जागरूक किया गया है। गोष्ठियां भी की जाती हैं। डीएफओ दिवाकर श्रीवास्तव ने कहा कि चंबल सेंचुरी में तेंदुए और लकड़बग्घे को लेकर जागरूकता पर ज्यादा जोर दिया गया। अब घड़ियाल मगरमच्छ की जागरूकता के लिए भी बोर्डों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
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