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पालिका ने निकवाया पानी, नाले का भेजेंगे प्रस्ताव
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जलभराव का निरीक्षण करने पहुंचे तहसीलदार सदर श्रीराम। संवाद
- फोटो : ETAWAH
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इटावा। सुुंदरपुर वार्ड के अड्डा श्यामलाल में सड़क पर घुटनों तक भरे गंदे पानी की खबर ‘अमर उजाला’ में प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद अधिकारी दौड़ पड़े। नगर पालिका के अधिकारियों ने पंप लगवाकर पानी निकलवाया। तहसीलदार ने भी मौके पर जाकर स्थिति देखी। लोगों ने अधिकारियों से कहा कि साहब! सिर्फ पानी निकलवाने से काम नहीं चलेगा। इसका स्थायी समाधान कराएं।
भरथना- बिधूना को जोड़ने वाले इस मार्ग से रोजाना करीब चार हजार वाहन सवारों का आवागमन होता है। चार पहिया वाहन चालक तो किसी तरह डर-डर कर करीब दो सौ मीटर की दूरी पार कर जाते हैं, लेकिन दो पहिया वाहन सवारों को सबसे अधिक परेशानी होती है। संभलकर और धीरे-धीरे चलने के बावजूद रोजाना कोई न कोई वाहन सवार फिसलकर पानी में गिर ही जाता है।
सबसे ज्यादा समस्या बुजुर्गों और बच्चों को होती है। उन्हें परिजन घर से अकेले निकलने तक नहीं देते हैं। नगर पालिका ने पानी निकलवाया। रविवार को सदर तहसीलदार श्रीराम यादव ने निरीक्षण किया। लोगों से जलनिकासी के समाधान को लेकर बातचीत की। तहसीलदार श्रीराम यादव ने बताया कि समाधान के लिए दो विकल्प हैं।
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पहला यह कि हाईवे पार डेढ़ किलोमीटर आगे नाला बनवा दिया जाए। दूसरा रेलवे लाइन के किनारे करीब 500 मीटर दूर पुलिया से जोड़ दिया जाए, जो विनीत विहार कॉलोनी को जाती है। बात स्थायी समाधान की करें तो चितभवन तक डेढ़ किलोमीटर तक बड़ा नाला बनवा दिया जाए। इसका प्रस्ताव बनाकर भेजेंगे। फिर नगर पालिका या पीडब्ल्यूडी को इसकी जिम्मेदारी दी जाएगी।
पालिका और डीएम को ज्ञापन देने पर भी कुछ नहीं हुआ
सुंदरपुर रेलवे फाटक के पास करीब 50 साल से रहने वाले बिल्डिंग मैटेरियल कारोबारी नरेंद्र सिंह कुशवाहा का कहना है कि पहले सड़क पर गहरे गड्ढे थे। सपा सरकार में सीमेंटेड सड़क और नाली बनी। पहले तो सब कुछ ठीक ठाक चलता रहा।
धीरे-धीरे मकानों की संख्या बढ़ने से नाली ओवरफ्लो होने लगी तो सड़क पर गंदा पानी भरने लगा। अब यह समस्या गंभीर हो गई है। इसके समाधान और नाला बनवाने के लिए कई बार नगर पालिका और डीएम को ज्ञापन दिया, लेकिन ध्यान किसी ने नहीं दिया।
गृहणी अर्चना कुशवाहा ने बताया समस्या कितनी ज्यादा गंभीर है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दुकानों और मकानों के बाहर बिकाऊ है का बोर्ड लोगों ने लगा रखा है। बताया इस मार्ग से सुंदरपुर वार्ड कें अड्डा पाय, नगला खादर, अड्डा टीला के अलावा कई अन्य गांवों के लोगों को मजबूरी में गंदे पानी से आना-जाना पड़ता है।
ये हो सकता है समाधान
समाधान क्या हो सकता है, इस बारे में अविनाश का कहना है फिलहाल सुंदरपुर फाटक से कछपुरा बंबा तक नाला बनवा दिया जाए। बजट पास होने पर आगे बढ़ाकर सेंगर नदी से जोड़ दिया जाए।
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भरथना- बिधूना को जोड़ने वाले इस मार्ग से रोजाना करीब चार हजार वाहन सवारों का आवागमन होता है। चार पहिया वाहन चालक तो किसी तरह डर-डर कर करीब दो सौ मीटर की दूरी पार कर जाते हैं, लेकिन दो पहिया वाहन सवारों को सबसे अधिक परेशानी होती है। संभलकर और धीरे-धीरे चलने के बावजूद रोजाना कोई न कोई वाहन सवार फिसलकर पानी में गिर ही जाता है।
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सबसे ज्यादा समस्या बुजुर्गों और बच्चों को होती है। उन्हें परिजन घर से अकेले निकलने तक नहीं देते हैं। नगर पालिका ने पानी निकलवाया। रविवार को सदर तहसीलदार श्रीराम यादव ने निरीक्षण किया। लोगों से जलनिकासी के समाधान को लेकर बातचीत की। तहसीलदार श्रीराम यादव ने बताया कि समाधान के लिए दो विकल्प हैं।
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पहला यह कि हाईवे पार डेढ़ किलोमीटर आगे नाला बनवा दिया जाए। दूसरा रेलवे लाइन के किनारे करीब 500 मीटर दूर पुलिया से जोड़ दिया जाए, जो विनीत विहार कॉलोनी को जाती है। बात स्थायी समाधान की करें तो चितभवन तक डेढ़ किलोमीटर तक बड़ा नाला बनवा दिया जाए। इसका प्रस्ताव बनाकर भेजेंगे। फिर नगर पालिका या पीडब्ल्यूडी को इसकी जिम्मेदारी दी जाएगी।
पालिका और डीएम को ज्ञापन देने पर भी कुछ नहीं हुआ
सुंदरपुर रेलवे फाटक के पास करीब 50 साल से रहने वाले बिल्डिंग मैटेरियल कारोबारी नरेंद्र सिंह कुशवाहा का कहना है कि पहले सड़क पर गहरे गड्ढे थे। सपा सरकार में सीमेंटेड सड़क और नाली बनी। पहले तो सब कुछ ठीक ठाक चलता रहा।
धीरे-धीरे मकानों की संख्या बढ़ने से नाली ओवरफ्लो होने लगी तो सड़क पर गंदा पानी भरने लगा। अब यह समस्या गंभीर हो गई है। इसके समाधान और नाला बनवाने के लिए कई बार नगर पालिका और डीएम को ज्ञापन दिया, लेकिन ध्यान किसी ने नहीं दिया।
गृहणी अर्चना कुशवाहा ने बताया समस्या कितनी ज्यादा गंभीर है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दुकानों और मकानों के बाहर बिकाऊ है का बोर्ड लोगों ने लगा रखा है। बताया इस मार्ग से सुंदरपुर वार्ड कें अड्डा पाय, नगला खादर, अड्डा टीला के अलावा कई अन्य गांवों के लोगों को मजबूरी में गंदे पानी से आना-जाना पड़ता है।
ये हो सकता है समाधान
समाधान क्या हो सकता है, इस बारे में अविनाश का कहना है फिलहाल सुंदरपुर फाटक से कछपुरा बंबा तक नाला बनवा दिया जाए। बजट पास होने पर आगे बढ़ाकर सेंगर नदी से जोड़ दिया जाए।

गंदे पानी से निकलता बाइक सवार, भीगने से बचता सब्जी विक्रेता। संवाद- फोटो : ETAWAH