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सेवानिवृति से 22 दिन पहले छुट्टी भर भेजे गये कुलपति डा राजकुमार
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सैफई (इटावा)। कोरोना की दूसरी लहर में पर्याप्त बजट होने के बावजूद चिकित्सा विश्वविद्यालय में मरीजों को भर्ती न करने और दवाओं आदि की व्यवस्था न करने की गाज कुलपति प्रो. डा. राजकुमार पर गिर गई है। शासन ने उन्हें कार्यकाल पूरा होने के 22 दिन पहले ही अवकाश पर भेज दिया है। प्रति क़ुलपति डा रमाकांत यादव को कार्यवाहक कुलपति बनाया गया है।
प्रो. डॉ. राजकुमार एक जून 2018 को सैफई चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति बनाए गए थे। उनका कार्यकाल 31 मई 2021 तक था। इसके पहले ही शासन ने उन्हें अवकाश पर भेज दिया। माना जा रहा है कि कोरोना की दूसरी लहर में मरीजों के इलाज में लापरवाही के कारण कुलपति पर कार्रवाई की गई है। चिकित्सा विश्वविद्यालय का ऑक्सीजन प्लांट दो वर्ष से खराब पड़ था।
ऑक्सीजन की कमी से मरीजों की मौत से हाहाकार मचा तो प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत की। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार की ओर से जारी आदेश में प्रति कुलपति डॉ. रमाकांत यादव अगले आदेश तक कुलपति का कार्यभार संभालने को कहा गया है। वर्ष 2018 में कुलपति का कार्यभार ग्रहण करने वाले डा. राजकुमार का कार्यकाल विवादों से घिरा रहा है।
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चिकित्सा विवि में कोरोना मरीजों को भर्ती न करने, दवाओं, पीपीईकिट, ग्लब्स, मास्क आदि की कमी और बदइंतजामी की शिकायतें भी शासन तक पहुंची थीं। सूत्रों के अनुसार पिछले महीने ही शासन ने पांच करोड़ 75 लाख रुपये का बजट दिया था। इसमें 50 लाख रुपये दवा, 1 करोड़ 25 लाख पीपीई किट और चार करोड़ टेस्ट किट के लिए थे। सामान न मिलने पर जूनियर रेजीडेंट डॉक्टरों ने हड़ताल तक करनी पड़ी थी। महामारी के समय इन्हीं अव्यवस्थाओं की वजह से शासन को कार्रवाई करनी पड़ी। निवर्तमान कुलपति प्रो. डॉ राजकुमार ने बताया कि वह कोरोना पाजिटिव हैं। अपने आवास पर आइसोलेट हैं, इसलिए शासन से अवकाश मांगा था।
सीटी स्कैन के लिए बाहर भेजे जा रहे मरीज
सैफई। सैफई चिकित्सा विश्वविद्यालय के मरीजों को सीटी स्कैन के लिए बाहर भेजा जा रहा है। विवि की सिटी स्कैन मशीन खराब बताई गई है। इटावा के मैनपुरी फाटक निवासी मरीज मिथलेश को परिवार के लोग स्ट्रेचर पर ट्रामा सेंटर से ले जा रहे थे। तीमारदारों को टोका गया तो उन्हें बताया कि विवि की सीटी स्केन मशीन खराब है। डॉक्टरों ने बाहर से सीटी स्कैन कराने के लिए कहा है। बाहर सीटी स्कैन कराने जा रहे हैं। (संवाद)
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प्रो. डॉ. राजकुमार एक जून 2018 को सैफई चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति बनाए गए थे। उनका कार्यकाल 31 मई 2021 तक था। इसके पहले ही शासन ने उन्हें अवकाश पर भेज दिया। माना जा रहा है कि कोरोना की दूसरी लहर में मरीजों के इलाज में लापरवाही के कारण कुलपति पर कार्रवाई की गई है। चिकित्सा विश्वविद्यालय का ऑक्सीजन प्लांट दो वर्ष से खराब पड़ था।
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ऑक्सीजन की कमी से मरीजों की मौत से हाहाकार मचा तो प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत की। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार की ओर से जारी आदेश में प्रति कुलपति डॉ. रमाकांत यादव अगले आदेश तक कुलपति का कार्यभार संभालने को कहा गया है। वर्ष 2018 में कुलपति का कार्यभार ग्रहण करने वाले डा. राजकुमार का कार्यकाल विवादों से घिरा रहा है।
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चिकित्सा विवि में कोरोना मरीजों को भर्ती न करने, दवाओं, पीपीईकिट, ग्लब्स, मास्क आदि की कमी और बदइंतजामी की शिकायतें भी शासन तक पहुंची थीं। सूत्रों के अनुसार पिछले महीने ही शासन ने पांच करोड़ 75 लाख रुपये का बजट दिया था। इसमें 50 लाख रुपये दवा, 1 करोड़ 25 लाख पीपीई किट और चार करोड़ टेस्ट किट के लिए थे। सामान न मिलने पर जूनियर रेजीडेंट डॉक्टरों ने हड़ताल तक करनी पड़ी थी। महामारी के समय इन्हीं अव्यवस्थाओं की वजह से शासन को कार्रवाई करनी पड़ी। निवर्तमान कुलपति प्रो. डॉ राजकुमार ने बताया कि वह कोरोना पाजिटिव हैं। अपने आवास पर आइसोलेट हैं, इसलिए शासन से अवकाश मांगा था।
सीटी स्कैन के लिए बाहर भेजे जा रहे मरीज
सैफई। सैफई चिकित्सा विश्वविद्यालय के मरीजों को सीटी स्कैन के लिए बाहर भेजा जा रहा है। विवि की सिटी स्कैन मशीन खराब बताई गई है। इटावा के मैनपुरी फाटक निवासी मरीज मिथलेश को परिवार के लोग स्ट्रेचर पर ट्रामा सेंटर से ले जा रहे थे। तीमारदारों को टोका गया तो उन्हें बताया कि विवि की सीटी स्केन मशीन खराब है। डॉक्टरों ने बाहर से सीटी स्कैन कराने के लिए कहा है। बाहर सीटी स्कैन कराने जा रहे हैं। (संवाद)