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ऑक्सीजन प्लांट के लिए सांसद ने दिए 20 लाख
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इटावा। कोविड की तीसरी लहर आने की संभावना को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को गाइडलाइन जारी कर दी है। इस प्रकार कोरोना से पीड़ित गंभीर बच्चों को ही अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत होगी। बाकी का होम आइसोलेशन में रखकर इलाज किया जा सकता है। गाइडलाइन के मुताबिक जिन बच्चों का
ऑक्सीजन लेवल 90 से नीचे गिरता है, उन्हें कोविड अस्पताल में भर्ती किया जाना चाहिए। गाइडलाइन में बच्चों को स्टेरायड देने की मनाही की है। सिर्फ गंभीर बच्चों को जरूरत पड़ने पर यह दवा देने की अनुमति दी जाएगी। इसके अलावा कोविड-19 के इलाज में इस्तेमाल हो रही रेमडेसिविर, आइवरमेक्टिन, फैवीपिराविर जैसी दवाओं को बच्चों को देने से मना किया गया है।
गाइडलाइन में बताया है कि जिन बच्चों का ऑक्सीजन लेवल 90 से कम है उन्हें गंभीर निमोनिया, एक्यूट रिसपाइटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम, सैप्टिक शाक, मल्टीआर्गन डिस्फक्शन सिंड्रोम जैसी बीमारियां हो सकती हैं। ऐसे मरीजों को फौरन किसी कोविड अस्पताल में भर्ती कराया जाए और जरूरत पड़े तो आईसीयू में शिफ्ट किया जाए। इन बच्चों को स्टेरायड दिए जा सकते हैं। कुछ बच्चे बुखार के साथ पेट दर्द, उल्टी व दस्त की समस्या के आ सकते हैं, उनका भी कोरोना मरीज के तौर पर इलाज किया जाना चाहिए। उनका स्टूल टेस्ट कराने पर पुष्ट हो जाएगा कि उन्हें कोरोना है या नहीं। कुछ बच्चों में मल्टी सिस्टम इन्फ्लैमटोरी सिंड्रोम भी हो सकता है जिसके लिए सतर्क रहने की जरूरत है।
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क्या हो सकते हैं लक्षण
ज्यादातर बच्चे लक्षण विहीन या हल्के-फुल्के लक्षण वाले होंगे।
उनमें बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, थकावट, सूंघने व टेस्ट की क्षमता में कमी आना, नाक बहना, मांसपेशियों में तकलीफ, गले में खराश जैसे लक्षण होंगे।
कुछ बच्चों में दस्त आना, उल्टी होना, पेट दर्द होना।
कुछ में मल्टी सिस्टम इंफलामेट्री सिंड्रोम होगा। ऐसे बच्चों को बुखार 38 सेंटीग्रेड से अधिक होगा। इन बच्चों में खांसी, नाक बहना व गले में खराश जैसे लक्षण भी हो सकते हैं।
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ऑक्सीजन लेवल 90 से नीचे गिरता है, उन्हें कोविड अस्पताल में भर्ती किया जाना चाहिए। गाइडलाइन में बच्चों को स्टेरायड देने की मनाही की है। सिर्फ गंभीर बच्चों को जरूरत पड़ने पर यह दवा देने की अनुमति दी जाएगी। इसके अलावा कोविड-19 के इलाज में इस्तेमाल हो रही रेमडेसिविर, आइवरमेक्टिन, फैवीपिराविर जैसी दवाओं को बच्चों को देने से मना किया गया है।
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गाइडलाइन में बताया है कि जिन बच्चों का ऑक्सीजन लेवल 90 से कम है उन्हें गंभीर निमोनिया, एक्यूट रिसपाइटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम, सैप्टिक शाक, मल्टीआर्गन डिस्फक्शन सिंड्रोम जैसी बीमारियां हो सकती हैं। ऐसे मरीजों को फौरन किसी कोविड अस्पताल में भर्ती कराया जाए और जरूरत पड़े तो आईसीयू में शिफ्ट किया जाए। इन बच्चों को स्टेरायड दिए जा सकते हैं। कुछ बच्चे बुखार के साथ पेट दर्द, उल्टी व दस्त की समस्या के आ सकते हैं, उनका भी कोरोना मरीज के तौर पर इलाज किया जाना चाहिए। उनका स्टूल टेस्ट कराने पर पुष्ट हो जाएगा कि उन्हें कोरोना है या नहीं। कुछ बच्चों में मल्टी सिस्टम इन्फ्लैमटोरी सिंड्रोम भी हो सकता है जिसके लिए सतर्क रहने की जरूरत है।
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क्या हो सकते हैं लक्षण
ज्यादातर बच्चे लक्षण विहीन या हल्के-फुल्के लक्षण वाले होंगे।
उनमें बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, थकावट, सूंघने व टेस्ट की क्षमता में कमी आना, नाक बहना, मांसपेशियों में तकलीफ, गले में खराश जैसे लक्षण होंगे।
कुछ बच्चों में दस्त आना, उल्टी होना, पेट दर्द होना।
कुछ में मल्टी सिस्टम इंफलामेट्री सिंड्रोम होगा। ऐसे बच्चों को बुखार 38 सेंटीग्रेड से अधिक होगा। इन बच्चों में खांसी, नाक बहना व गले में खराश जैसे लक्षण भी हो सकते हैं।