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युद्ध में सब कुछ नाश हो जाता है : शिवपाल
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इटावा। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने महाभारत के धृतराष्ट्र और शकुनि के चरित्र का जिक्र करते हुए युद्ध की बात कही। कहा कि युद्ध का परिणाम होता है कि सब नाश हो जाता है।
बृहस्पतिवार को प्रसपा अध्यक्ष सैफई स्थित एसएस मेमोरियल पब्लिक स्कूल में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की नीतियों से जनता के परेशान है। कहा कि उन्होंने पूर्व सीएम मुलायम सिंह से चरखा दांव सीखा है। 40 साल उनके साथ रहे हैं।
धोबी पाट व चरखा अदाओं से विरोधियों को जोड़ने का भी काम सीखा है, इसलिए चुनाव में चरखा दांव और धोबी पाट दोनों चलेंगे। कहा कि सामाजिक परिवर्तन रथ की कृष्ण की नगरी वृंदावन मथुरा से शुरुआत की।
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अब राम की नगरी में यात्रा का समापन करेंगे। उन्होंने किसी नेता का नाम लिए बिना कहा कि जुआ खेलना ठीक नहीं है। धृतराष्ट्र को देखना चाहिए था उस समय शकुनी से जुआ खेला था। मामला परिवार का था। जुआ खेलते तो दुर्योधन से खेलते, शकुनि से खेल गए जो चालबाज था। उससे जुआ नहीं खेलना चाहिए था।
अपने परिवार के मामले वह महाभारत के उदाहरण संकेतों से दे रहे थे। कहा कि परिवार में उस समय भी दुर्योधन को बड़े बुजुर्गों ने समझाया था। तो समझ लेना चाहिए था। फिर हुआ था सीधा युद्ध। युद्ध में सभी का नाश हुआ, सभी मारे गए।
शिवपाल ने कहा कि जनता मेरे साथ है, हमने जनता से एक वोट संग एक बड़ा नोट मांगा है, हमारे लिए इतना ही काफी है। सपा से गठबंधन के सवाल पर कहा कि राजनीति में संभावनाएं कभी खत्म नहीं होतीं, इसलिए हम गठबंधन कभी भी कर सकते हैं।
अभी भी हमारा प्रयास है। इस दौरान राष्ट्रीय महासचिव आदित्य यादव अंकुर समेत पार्टी के कई नेता मौजूद रहे।
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बृहस्पतिवार को प्रसपा अध्यक्ष सैफई स्थित एसएस मेमोरियल पब्लिक स्कूल में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की नीतियों से जनता के परेशान है। कहा कि उन्होंने पूर्व सीएम मुलायम सिंह से चरखा दांव सीखा है। 40 साल उनके साथ रहे हैं।
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धोबी पाट व चरखा अदाओं से विरोधियों को जोड़ने का भी काम सीखा है, इसलिए चुनाव में चरखा दांव और धोबी पाट दोनों चलेंगे। कहा कि सामाजिक परिवर्तन रथ की कृष्ण की नगरी वृंदावन मथुरा से शुरुआत की।
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अब राम की नगरी में यात्रा का समापन करेंगे। उन्होंने किसी नेता का नाम लिए बिना कहा कि जुआ खेलना ठीक नहीं है। धृतराष्ट्र को देखना चाहिए था उस समय शकुनी से जुआ खेला था। मामला परिवार का था। जुआ खेलते तो दुर्योधन से खेलते, शकुनि से खेल गए जो चालबाज था। उससे जुआ नहीं खेलना चाहिए था।
अपने परिवार के मामले वह महाभारत के उदाहरण संकेतों से दे रहे थे। कहा कि परिवार में उस समय भी दुर्योधन को बड़े बुजुर्गों ने समझाया था। तो समझ लेना चाहिए था। फिर हुआ था सीधा युद्ध। युद्ध में सभी का नाश हुआ, सभी मारे गए।
शिवपाल ने कहा कि जनता मेरे साथ है, हमने जनता से एक वोट संग एक बड़ा नोट मांगा है, हमारे लिए इतना ही काफी है। सपा से गठबंधन के सवाल पर कहा कि राजनीति में संभावनाएं कभी खत्म नहीं होतीं, इसलिए हम गठबंधन कभी भी कर सकते हैं।
अभी भी हमारा प्रयास है। इस दौरान राष्ट्रीय महासचिव आदित्य यादव अंकुर समेत पार्टी के कई नेता मौजूद रहे।