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बारिश ने बढ़ाई किसानों की चिंताएं, ठंडक भी बढ़ी
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माल गोदाम रोड पर बारिश के दौरान पसरा सन्नाटा फोटो संख्या 44: बकेवर में बारिश के दौरान आलू के खेत में
- फोटो : ETAWHA
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इटावा। बुधवार को शाम ढलने पर बारिश होने से गेहूं व आलू किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं, साथ ही ठंडक बढ़ गई। हालांकि बुधवार को बारिश होने की संभावना कई दिनों से जताई जा रही थी। सुबह हल्की बदली के बाद खिली धूप निकलने से लगा नहीं कि कुछ घंटों बाद बारिश हो भी सकती है। शाम होने से पूर्व अचानक से घिर आए बादल देखते ही देखते बरसने लगे। बारिश के दौरान वाहन सवारों को लाइटें जलाकर चलना पड़ा।
बारिश होने की वजह से एक बार फिर से ठंडक बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। गुरुवार को भी बारिश होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि बारिश से खड़ी सरसों के फूल झड़ने, गेहूूं व आलू की फसल को अधिक पानी लगने से नुकसान पहुंचने की आशंका है।
संवाद न्यूज बकेवर के अनुसार बुधवार को शाम साढे़ चार बजे से बकेवर, लखना, महेवा, अहेरीपुर निवाड़ीकला, लवेदी क्षेत्र में बूंदाबांदी होने से किसानों की माथे की लकीरों पर चिंता की रेखाएं उभरने लगीं थी। गेहूं के अलावा अन्य फसलों खासकर सरसों फसल व आलू की पिछेती फसल के लिए अधिक पानी बरसना नुकसान दायक हो सकता है।
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किसान सुबोध त्रिपाठी का कहना है कि सरसों की फसल में इस समय फूल निकला है जो पानी की बूंद से टूट कर गिर सकता है। इन्हौआ के आलू किसान राजू तिवारी ने बताया कि यदि दो दिन तेज पानी बरसा तो आलू की पिछेती फसल को रोग लगने की आशंका बढ़ जाएगी।
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बारिश होने की वजह से एक बार फिर से ठंडक बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। गुरुवार को भी बारिश होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि बारिश से खड़ी सरसों के फूल झड़ने, गेहूूं व आलू की फसल को अधिक पानी लगने से नुकसान पहुंचने की आशंका है।
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संवाद न्यूज बकेवर के अनुसार बुधवार को शाम साढे़ चार बजे से बकेवर, लखना, महेवा, अहेरीपुर निवाड़ीकला, लवेदी क्षेत्र में बूंदाबांदी होने से किसानों की माथे की लकीरों पर चिंता की रेखाएं उभरने लगीं थी। गेहूं के अलावा अन्य फसलों खासकर सरसों फसल व आलू की पिछेती फसल के लिए अधिक पानी बरसना नुकसान दायक हो सकता है।
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किसान सुबोध त्रिपाठी का कहना है कि सरसों की फसल में इस समय फूल निकला है जो पानी की बूंद से टूट कर गिर सकता है। इन्हौआ के आलू किसान राजू तिवारी ने बताया कि यदि दो दिन तेज पानी बरसा तो आलू की पिछेती फसल को रोग लगने की आशंका बढ़ जाएगी।