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जुहाना गांव को आज भी नहीं मिली सड़क, पुलिया का सहारा भी टूटा
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फोटो संख्या 06- जुहाना गांव को जाने वाला कच्चा दुर्गम रास्ता
- फोटो : ETAWAH
इटावा। बढपुरा ब्लाक का गांव जुहाना, जहां बारिश में पहुंचना किसी मुसीबत से कम नहीं है। यहां जरा से चूके तो आपकी जान जोखिम में पड़ सकती है। क्योंकि बारिश में गांव को जोड़ने वाली पुलिया की कच्ची सड़क बह गई है।
उसके दोनों ओर तालाब सा नजारा है। वहीं बीहड़ से धूम कर जाने वाला कच्चा रास्ता फिसलन भरा होने के चलते आप कभी भी फिसल कर गिर सकते हैं।
जिला मुख्यालय से महज 10 किमी की दूरी पर स्थित यह गांव आज भी विकास से कोसों दूर है। हालात ये हैं कि गांव आने के लिए एक संपर्क मार्ग तक नहीं बना है। छह माह पहले गांव वालों के आवागमन के लिए दो पुलियां बनाई गई थी। इन दोनों पुलियों का संपर्क मार्ग एक बारिश भी नहीं झेल सका।
गांव वालों ने बताया कि गांव आने जाने की लिए कई किलोमीटर बीहड़ के कच्चे और ऊंचे नीचे रास्तों से होकर जाना आना पड़ता है। बारिश में गांव का संपर्क शहर से पूरी तरह से कट जाता है। बड़ी मुश्किलों के बाद गांव को जोड़ने के लिये पुलिया बनी थी वो भी पहली बारिश में ही टूट गई।
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अभी तक नहीं बनी सड़क
यमुना नदी के किनारे बीहड़ में बसे जुहाना गांव में लगभग 200 मकान है। गांव की आबादी लगभग 900 है। इस गांव में जाने के लिये रास्ता तक नही है। गांव वाले भगवान भरोसे गांव में रहते है।
चारपाई में लिटाकर एंबुलेंस तक पहुंचाया जाता है
गांव के ज्ञान सिंह ने बताया कि यदि गांव में कोई बीमार पड़ जाता है या किसी गर्भवती महिला को अस्पताल लेकर जाना होता है, तो पांच किलोमीटर पैदल या चारपाई से गांव से बाहर लाया जाता है। इसके बाद ही एंबुलेंस या किसी अन्य वाहन से उसे अस्पताल पहुंचाया जाता है। कई बार तो गंभीर बीमारी से पीड़ित गरीब गांव में ही दम तोड़ देते हैं। वहीं कई बार से स्वास्थ्य कर्मी पैदल जाकर ग्रामीणों का इलाज करते हैं।
जल्द ही गांव का सर्वे कराया जाएगा। ये सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी तरह गांव का विकास हो और सड़क बनवाकर उसे मुख्यालय से जोड़ा जाए। - संतोष राय, मुख्य विकास अधिकारी
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उसके दोनों ओर तालाब सा नजारा है। वहीं बीहड़ से धूम कर जाने वाला कच्चा रास्ता फिसलन भरा होने के चलते आप कभी भी फिसल कर गिर सकते हैं।
जिला मुख्यालय से महज 10 किमी की दूरी पर स्थित यह गांव आज भी विकास से कोसों दूर है। हालात ये हैं कि गांव आने के लिए एक संपर्क मार्ग तक नहीं बना है। छह माह पहले गांव वालों के आवागमन के लिए दो पुलियां बनाई गई थी। इन दोनों पुलियों का संपर्क मार्ग एक बारिश भी नहीं झेल सका।
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गांव वालों ने बताया कि गांव आने जाने की लिए कई किलोमीटर बीहड़ के कच्चे और ऊंचे नीचे रास्तों से होकर जाना आना पड़ता है। बारिश में गांव का संपर्क शहर से पूरी तरह से कट जाता है। बड़ी मुश्किलों के बाद गांव को जोड़ने के लिये पुलिया बनी थी वो भी पहली बारिश में ही टूट गई।
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अभी तक नहीं बनी सड़क
यमुना नदी के किनारे बीहड़ में बसे जुहाना गांव में लगभग 200 मकान है। गांव की आबादी लगभग 900 है। इस गांव में जाने के लिये रास्ता तक नही है। गांव वाले भगवान भरोसे गांव में रहते है।
चारपाई में लिटाकर एंबुलेंस तक पहुंचाया जाता है
गांव के ज्ञान सिंह ने बताया कि यदि गांव में कोई बीमार पड़ जाता है या किसी गर्भवती महिला को अस्पताल लेकर जाना होता है, तो पांच किलोमीटर पैदल या चारपाई से गांव से बाहर लाया जाता है। इसके बाद ही एंबुलेंस या किसी अन्य वाहन से उसे अस्पताल पहुंचाया जाता है। कई बार तो गंभीर बीमारी से पीड़ित गरीब गांव में ही दम तोड़ देते हैं। वहीं कई बार से स्वास्थ्य कर्मी पैदल जाकर ग्रामीणों का इलाज करते हैं।
जल्द ही गांव का सर्वे कराया जाएगा। ये सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी तरह गांव का विकास हो और सड़क बनवाकर उसे मुख्यालय से जोड़ा जाए। - संतोष राय, मुख्य विकास अधिकारी

फोटो संख्या 07- जुहाना गांव को शहर से जोड़ने वाली पुलिया भी क्षतिग्रस्त- फोटो : ETAWAH