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145 दिन के बाद आज से खुलेंगे कक्षा 6 से 8 तक के विद्यालय
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फोटो संख्या 07- जितेंद्र त्रिपाठी
- फोटो : ETAWAH
इटावा। कोरोना की दूसरी लहर में खत्म होने के बाद कक्षा 6 से 8 तक के स्कूल 145 दिन बाद तमाम आशंकाओं के बाद आज से खुलेंगे। स्कूलों में फिर से रौनक लौट आएगी। हालांकि अभिभावकों ने बिना टीकाकरण के स्कूलों में बच्चों को बुलाए जाने को लेकर आपत्ति जताई है।
कोरोना की दूसरी लहर आने के बाद 31 मार्च से स्कूल बंद कर दिए गए थे। कक्षा 1 से 8 तक के विद्यालय 23 अगस्त से खोलने के निर्देश दिए थे।
लेकिन 23 को पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के निधन के कारण घोषित सार्वजनिक अवकाश के कारण 24 अगस्त मंगलवार से विद्यालय खुलेंगे।
कक्षा 1 से 5 तक के विद्यालयों को 1 सितंबर से खोला जाएगा। वहीं विद्यालयों को खोलने से पूर्व बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी प्रधानाध्यापकों को आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए हैं।
मंगलवार से जनपद के दो कस्तूरबा आवासीय बालिका विद्यालय, बेसिक शिक्षा के उच्च प्राथमिक विद्यालय, सहायता प्राप्त विद्यालय और प्राइवेट स्कूलों में 6 से 8 तक और इंटर कालेज में भी इन कक्षाओं के छात्रों के लिए विद्यालय खुल जाएंगे।
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लालू गुप्ता कहते हैं कि स्कूलों को बीच सत्र में खोला जाना निराशाजनक है। प्राइवेट स्कूल अनावश्यक रूप से चीजों को खरीदने और फीस के लिए दबाव बनाएंगे। जबकि अभी तीसरी लहर की संभावना व्यक्त की जा रही है।
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिलाध्यक्ष जितेंद्र त्रिपाठी का कहना है कि कोरोना की संभावित तीसरी लहर को देखते हुए पहले बच्चों का टीकाकरण कराया जाना आवश्यक है। इसके बाद बच्चों को बुलाया जाना बेहतर होता।
पंचायत चुनाव में सैंकड़ों शिक्षक साथियों को हम पहले ही खो चुके हैं। ऑनलाइन क्लास मोहल्ला पाठशाला आदि माध्यमों से शिक्षक छात्रों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़े हुए हैं।
मिडडे-मील से मिलेगी धनराशि
ऊसराहार। मिडडे-मील बनाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने निर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही खाना बनाने वाली रसोइया के लिए ग्लब्स और एप्रिन के लिए प्रधानाध्यापकों को 400 रुपये प्रति रसोइया मिडडे-मील के खाते में भेजा गया है। इसके साथ ही प्रति छात्र 12 रुपये की दर से कोविड गाइड लाइन के अनुसार संसाधन जुटाने के लिए भेजा गया है।
चकरनगर। बाढ़ ग्रस्त गांव के स्कूलों में समस्याओं का डेरा है। स्कूलों में समस्या ग्रस्त परिवार डेरा डाले है। इन हालातों में नौनिहालों को कैसे पढ़ाया जाएगा। यह एक सवाल बना है।
हरौली गांव के स्कूल में बाढ़ का पानी निकलने के बाद बेघर हुए परिवार वीरेंद्र बाथम, धर्म नारायण, बृजेश कुमार, वीरेंद्र सिंह, रामपाल सिंह, राजेश सिंह ,गौरीशंकर अपना आशियाना बनाए हुए हैं।
खिरीटी स्कूल के प्रधानाध्यापक अरुण कुमार बताते हैं बाढ़ का पानी भरने से स्कूल की समस्त सामग्री पानी में डूबने के कारण खराब हो गई है। स्कूल के चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा हुआ है।
पठन-पाठन की सामग्री फर्नीचर का सामान को सुखाकर बच्चों के प्रयोग लायक बनाने का प्रयास किया जा रहा है। स्कूल परिसर में लगा हैंडपंप गंदगी में डूबा पड़ा हुआ है जैसे पीने के पानी भी साफ नहीं निकल रहा है। विद्यालय को व्यवस्थित करने का प्रयास किया जा रहा है।
बीईओ चकरनगर अलकेश कुमार ने बताया कि क्षेत्र के 30 विद्यालय बाढ़ के कारण प्रभावित हुए है। इनमें लगभग 20 विद्यालय पूर्णतया बाढ़ में डूब गए थे। विद्यालयों की साफ-सफाई कराई जा रही है।
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कोरोना की दूसरी लहर आने के बाद 31 मार्च से स्कूल बंद कर दिए गए थे। कक्षा 1 से 8 तक के विद्यालय 23 अगस्त से खोलने के निर्देश दिए थे।
लेकिन 23 को पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के निधन के कारण घोषित सार्वजनिक अवकाश के कारण 24 अगस्त मंगलवार से विद्यालय खुलेंगे।
कक्षा 1 से 5 तक के विद्यालयों को 1 सितंबर से खोला जाएगा। वहीं विद्यालयों को खोलने से पूर्व बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी प्रधानाध्यापकों को आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए हैं।
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मंगलवार से जनपद के दो कस्तूरबा आवासीय बालिका विद्यालय, बेसिक शिक्षा के उच्च प्राथमिक विद्यालय, सहायता प्राप्त विद्यालय और प्राइवेट स्कूलों में 6 से 8 तक और इंटर कालेज में भी इन कक्षाओं के छात्रों के लिए विद्यालय खुल जाएंगे।
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लालू गुप्ता कहते हैं कि स्कूलों को बीच सत्र में खोला जाना निराशाजनक है। प्राइवेट स्कूल अनावश्यक रूप से चीजों को खरीदने और फीस के लिए दबाव बनाएंगे। जबकि अभी तीसरी लहर की संभावना व्यक्त की जा रही है।
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिलाध्यक्ष जितेंद्र त्रिपाठी का कहना है कि कोरोना की संभावित तीसरी लहर को देखते हुए पहले बच्चों का टीकाकरण कराया जाना आवश्यक है। इसके बाद बच्चों को बुलाया जाना बेहतर होता।
पंचायत चुनाव में सैंकड़ों शिक्षक साथियों को हम पहले ही खो चुके हैं। ऑनलाइन क्लास मोहल्ला पाठशाला आदि माध्यमों से शिक्षक छात्रों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़े हुए हैं।
मिडडे-मील से मिलेगी धनराशि
ऊसराहार। मिडडे-मील बनाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने निर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही खाना बनाने वाली रसोइया के लिए ग्लब्स और एप्रिन के लिए प्रधानाध्यापकों को 400 रुपये प्रति रसोइया मिडडे-मील के खाते में भेजा गया है। इसके साथ ही प्रति छात्र 12 रुपये की दर से कोविड गाइड लाइन के अनुसार संसाधन जुटाने के लिए भेजा गया है।
चकरनगर। बाढ़ ग्रस्त गांव के स्कूलों में समस्याओं का डेरा है। स्कूलों में समस्या ग्रस्त परिवार डेरा डाले है। इन हालातों में नौनिहालों को कैसे पढ़ाया जाएगा। यह एक सवाल बना है।
हरौली गांव के स्कूल में बाढ़ का पानी निकलने के बाद बेघर हुए परिवार वीरेंद्र बाथम, धर्म नारायण, बृजेश कुमार, वीरेंद्र सिंह, रामपाल सिंह, राजेश सिंह ,गौरीशंकर अपना आशियाना बनाए हुए हैं।
खिरीटी स्कूल के प्रधानाध्यापक अरुण कुमार बताते हैं बाढ़ का पानी भरने से स्कूल की समस्त सामग्री पानी में डूबने के कारण खराब हो गई है। स्कूल के चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा हुआ है।
पठन-पाठन की सामग्री फर्नीचर का सामान को सुखाकर बच्चों के प्रयोग लायक बनाने का प्रयास किया जा रहा है। स्कूल परिसर में लगा हैंडपंप गंदगी में डूबा पड़ा हुआ है जैसे पीने के पानी भी साफ नहीं निकल रहा है। विद्यालय को व्यवस्थित करने का प्रयास किया जा रहा है।
बीईओ चकरनगर अलकेश कुमार ने बताया कि क्षेत्र के 30 विद्यालय बाढ़ के कारण प्रभावित हुए है। इनमें लगभग 20 विद्यालय पूर्णतया बाढ़ में डूब गए थे। विद्यालयों की साफ-सफाई कराई जा रही है।

फोटो संख्या 08- लालू गुप्ता- फोटो : ETAWAH

फोटो संख्या 09- उप्रावि खिरीटी में बाढ़ के कारण पानी में डूबे फर्नीचर को सुखाया जा रहा है- फोटो : ETAWAH

फोटो संख्या 10- हरौली का स्कूल जहां बाढ़ प्रभावितों ने अपना आशियाना बना रखा है- फोटो : ETAWAH