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यूपी में लूट, दिल्ली में बिलिंग और अमेरिका में सौदा, ऐसे हुआ टेलीकॉम कंपनियों को लूटने वालों का पर्दाफाश

Mon, 04 Jan 2021 04:12 PM IST
कानपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: कानपुर ब्यूरो Updated Mon, 04 Jan 2021 04:12 PM IST
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Telecom companies equipment Looted in UP fake billing in Delhi and deal in US
यूपी पुलिस - फोटो : अमर उजाला
इटावा। टेलीकॉम कंपनियों से लूटे गए उपकरण को विदेश भेजने के लिए दिल्ली के नेहरु प्लेस स्थित इलेक्ट्रॉनिक मार्केट से फर्जी बिल और अन्य पेपर तैयार किए जा रहे थे। इसके बाद इसे कोरियर के जरिए अमेरिका भेजा जाता था। इसका मास्टरमाइंड राजेश पाल लंबे समय तक डीएचएल और फेडेक्स कोरियर सर्विस में नौकरी कर चुका था।
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दिल्ली के सरिता विहार निवासी राजेश पाल ने विदेशी कोरियर कंपनी डीएचएल और फेडेक्स से ही अपने करियर की शुरुआत की थी। गिरोह का दूसरा मास्टर माइंड चंदन पांडेय वोडाफोन में नौकरी करता था। करीब पांच साल पहले दोनों की मुलाकात हुई थी। राजेश पाल ने नौकरी छोड़कर खुद की कृष्णा एयर एक्सप्रेस नाम से कोरियर कंपनी शुरू की। लेकिन विदेश तक नेटवर्क बनाने और टेलीकॉम कंपनियों के लैन, आरएसपी कार्ड और राऊटर वहां तक पहुंचाने के लिए फेडेक्स और डीएचएल की फ्रेंचाइजी ले ली।
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मेरठ में पहली वारदात को दिया अंजाम
पुलिस की अबतक की पड़ताल में सामने आया कि चंदन और राजेश ने मिलकर 2016 में वोडाफोन के सर्वर से कार्ड लूट करवाए। लेकिन इसी घटना में चंदन पकड़ा गया और जेल जाने के साथ नौकरी से निकाला गया। जेल से बाहर आने के बाद उसने इसे धंधा बना लिया।
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टेलीकॉम सेक्टर के संबंधों को बनाया हथियार
टेलीकॉम सर्वर की सभी बारीकियों से वाकिफ चंदन की इस क्षेत्र के उच्च पदस्थ अधिकारियों से अच्छी जान पहचान थी। उसे ऐसे शख्स की तलाश थी जो सर्वर और उसमें लगे महंगे उपकरणों के बारे में जानकारी दे सके। उसने उत्तराखंड में तैनात जियो के एजीएम रमेश शर्मा से संपर्क साधा। कम समय में आसमान छूने की चाहत में रमेश भी गिरोह का सदस्य बन गया। इसके बाद वह देश भर में लगे जियो के सर्वर की लोकेशन बताता रहा और चंदन व राजेश गिरोह की बी पार्टी को ठेका देकर लूट करवाते रहे। पुलिस की अबतक की तफ्तीश में सामने आया कि लूट करने वाले गिरोह के सदस्यों को एक वारदात के लिए 30 लाख रुपये दिए जाते थे।

कोरियर की नौकरी से बनाया विदेशी नेटवर्क
पुलिस के मुताबिक मास्टरमाइंड राजेश पाल की लंबे समय तक कोरियर कंपनी में ऊंचे पद नौकरी करने की वजह से विदेशों तक खासी जान पहचान बन गई थी। इसी का फायदा उठाकर उसने अमेरिका में बायर खड़े किए थे। अंग्रेजी और फ्रेंच बोलने में माहिर चंदन पांडेय नए बायर्स को डील करता था। राजेश लूटे गए सामान के फर्जी बिल तैयार करने से लेकर कोरियर के हवाई और समुद्री मार्ग से उसे अमेरिका तक पहुंचाने की जिम्मेदारी संभालता था।

खुद के बनाए एप से करता था ट्रांजेक्शन
एसपी क्राइम ज्ञानेंद्र ने बताया कि राजेश पाल तकनीकी तौर पर बेहद जानकार है। साइबर क्राइम को लेकर पुलिस की सतर्कता को देखते हुए उसने खुद के नाम का एप बनाया था। वह ज्यादातर ट्रांजेक्शन अपने इसी पे-पाल एप से करता था। यही वजह है कि उसके लेनदेन को ट्रेस नहीं किया जा सका।


मुंबई तक फैला है गिरोह का नेटवर्क
पुलिस ने 31 दिसंबर को जिन दस आरोपियों को गिरफ्तार कर लूटे गए उपकरण बरामद किए उसमें कुछ ही इटावा और आगरा के जियो सर्वर के हैं। बाकी उपकरण कहां से और किसी टेलीकॉम कंपनी के सर्वर से लूटे गए हैं इसका पता अभी तक नहीं चल पाया है। पुलिस ने इसकी जानकारी के लिए निर्माता कंपनी सिस्को को उपकरणों की सूची और सीरियल नंबर भेजे हैं। छानबीन में सामने आया कि गिरोह का एक बड़ा नेटवर्क मुंबई में भी फैला है जो वहां से उपकरण लूटकर इसी गैंग को देता था।
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