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Etawah News: यूपी संग राजस्थान के अस्पतालों तक था डॉ. सर्राफ का नेटवर्क
Tue, 14 Nov 2023 11:45 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
Updated Tue, 14 Nov 2023 11:45 PM IST
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सैफई। आयुर्विज्ञान विवि के पेसमेकर घोटाले के आरोपी सर्जन डॉ. समीर सर्राफ का यूपी के साथ ही राजस्थान के अस्पतालों तक में नेटवर्क फैला था। वह वहां नाम बदलकर मरीजों का ऑपरेशन करता था। गिरफ्तारी के बाद मीडिया में सुर्खियां आने के बाद राजस्थान के अस्पतालों में शिकार बने मरीजों के परिजनों को उनका दर्द याद आ गया।
पेसमेकर घोटाले के आरोपी की गिरफ्तारी के बाद प्रदेश ही नहीं देश में आयुर्विज्ञान विवि सुर्खियों में आ गया। मीडिया में खबरें सुनने के बाद राजस्थान के भरतपुर जिले के गांव चकदौलतपुर के इंदल सिंह ने आरोपी डॉक्टर को पहचान लिया। चेहरा तो उसके पिता का इलाज करने वाला डॉक्टर ही था, लेकिन नाम कुछ और बताया जा रहा था। इस पर उसने लोगों से जानकारी जुटाई तो पता चला कि उक्त डॉक्टर ने नाम बदलकर आया था।
इंदल ने संवाद सहयोगी से फोन पर बात करते हुए बताया कि उसके पिता समंदर सिंह 1984 में फौज से रिटायर्ड होकर बीएसएनएल में गनमैन की नौकरी करने लगे थे। 17 मार्च 2023 को पिता के सीने में दर्द उठने के साथ उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई। इस पर वह परिजनों के साथ उन्हें गांव से 20 किलोमीटर दूर भरतपुर एक निजी अस्पताल में ले गया। यहां डॉक्टरों ने जल्द ऑपरेशन कराने की बात कही और इटावा के सैफई के एक सर्जन को बुलाने का आश्वासन दिया। अस्पताल की ओर से उनका नाम अमित कुमार गुप्ता बताया गया।
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बताया कि डॉक्टर ने सिर्फ तीस मिनट में रुपये जमा करने को कहा। बताया कि अन्यथा वह उसके पिता की जान नहीं बचा पाएगा। इंदल ने बताया कि उसके पिता के पास राजस्थान सरकार का चिरंजीवी योजना का कार्ड था। इस पर सरकार 20 से 25 लाख का मुफ्त इलाज देती थी। इसके बावजूद उनसे रुपये वसूले गए। आरोप है कि शाम को 5 बजकर 55 मिनट ऑपरेशन शुरू किया। शाम को 7 बजकर 30 मिनट पर ऑपरेशन के बाद पिता की हातल बिगड़ी तो उन्हें जमीन पर लिटाकर डॉक्टर फरार हो गया। लगभग दो घंटे बाद पिता ने दम तोड़ दिया।
डीन प्रो.आदेश ने मांगी सुरक्षा
सैफई। डीन प्रो. आदेश कुमार ने कुलपति को पत्र लेकर खुद की और अपने परिवार की जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा मांगी है। उन्होंने बताया कि जिस मामले में सर्जन डॉ. समीर सर्राफ गिरफ्तार हुए हैं, उनकी जांच के लिए बनाई गई पांच सदस्यीय टीम के अध्यक्ष थे। ऐसे में उनकी जान को खतरा हो सकता है। साथ ही उन्हें षड़यंत्र के तहत फंसाया भी जा सकता है।
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पेसमेकर घोटाले के आरोपी की गिरफ्तारी के बाद प्रदेश ही नहीं देश में आयुर्विज्ञान विवि सुर्खियों में आ गया। मीडिया में खबरें सुनने के बाद राजस्थान के भरतपुर जिले के गांव चकदौलतपुर के इंदल सिंह ने आरोपी डॉक्टर को पहचान लिया। चेहरा तो उसके पिता का इलाज करने वाला डॉक्टर ही था, लेकिन नाम कुछ और बताया जा रहा था। इस पर उसने लोगों से जानकारी जुटाई तो पता चला कि उक्त डॉक्टर ने नाम बदलकर आया था।
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इंदल ने संवाद सहयोगी से फोन पर बात करते हुए बताया कि उसके पिता समंदर सिंह 1984 में फौज से रिटायर्ड होकर बीएसएनएल में गनमैन की नौकरी करने लगे थे। 17 मार्च 2023 को पिता के सीने में दर्द उठने के साथ उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई। इस पर वह परिजनों के साथ उन्हें गांव से 20 किलोमीटर दूर भरतपुर एक निजी अस्पताल में ले गया। यहां डॉक्टरों ने जल्द ऑपरेशन कराने की बात कही और इटावा के सैफई के एक सर्जन को बुलाने का आश्वासन दिया। अस्पताल की ओर से उनका नाम अमित कुमार गुप्ता बताया गया।
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बताया कि डॉक्टर ने सिर्फ तीस मिनट में रुपये जमा करने को कहा। बताया कि अन्यथा वह उसके पिता की जान नहीं बचा पाएगा। इंदल ने बताया कि उसके पिता के पास राजस्थान सरकार का चिरंजीवी योजना का कार्ड था। इस पर सरकार 20 से 25 लाख का मुफ्त इलाज देती थी। इसके बावजूद उनसे रुपये वसूले गए। आरोप है कि शाम को 5 बजकर 55 मिनट ऑपरेशन शुरू किया। शाम को 7 बजकर 30 मिनट पर ऑपरेशन के बाद पिता की हातल बिगड़ी तो उन्हें जमीन पर लिटाकर डॉक्टर फरार हो गया। लगभग दो घंटे बाद पिता ने दम तोड़ दिया।
डीन प्रो.आदेश ने मांगी सुरक्षा
सैफई। डीन प्रो. आदेश कुमार ने कुलपति को पत्र लेकर खुद की और अपने परिवार की जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा मांगी है। उन्होंने बताया कि जिस मामले में सर्जन डॉ. समीर सर्राफ गिरफ्तार हुए हैं, उनकी जांच के लिए बनाई गई पांच सदस्यीय टीम के अध्यक्ष थे। ऐसे में उनकी जान को खतरा हो सकता है। साथ ही उन्हें षड़यंत्र के तहत फंसाया भी जा सकता है।