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अपराधी बेलगाम, क्राइम मैपिंग सिस्टम धड़ाम

Sat, 24 Jan 2015 12:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा Updated Sat, 24 Jan 2015 12:26 AM IST
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Unbridled criminals, crime mapping system bogus

आपराधिक वारदातों पर अंकुश लगाने के लिए क्राइम मैपिंग सिस्टम धड़ाम हो चुका है। तभी तो जिले में अपराधी बेलगाम हैं। जिले में लूट की वारदातें हो रही हैं और पुलिस अपराधियों को पकड़ना तो दूर वारदातों पर अंकुश तक नहीं लगा पा रही है। दहशत इस कदर हावी है कि लोग शाम ढलने के बाद घर से निकलने में कतराने लगे हैं। जनवरी महीने में अब तक लूट की 13 बढ़ी वारदातें हो चुकी हैं।

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अपराधों पर अंकुश लगाने और हाईटेक पुलिसिंग के लिए वर्ष 2014 के आखिर में अफसरों ने क्राइम मैपिंग सिस्टम को लागू किया। अफसरों और थानाध्यक्षों के साथ बैठक हुई और क्राइम कंट्रोल की रणनीति बनाई गई। वर्ष 2015 की शुरुआत में ही अपराधियों ने पुलिस की रणनीति ध्वस्त कर दी।
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जिले में खुलेआम लूटपाट की वारदातें होने से साबित हो गया कि अपराधियों के आगे मैपिंग सिस्टम पूरी तरह से फेल हो चुका है। जनवरी महीने में अब तक लूट की 13 बढ़ी वारदातें हो चुकी हैं। हर दिन हाइवे से लेकर जिले की सड़कों पर गुजरने वाले राहगीरों को लूटा जा रहा है।
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क्या है क्राइम मैपिंग सिस्टम
मैपिंग सिस्टम गूगल मैप पर आधारित है। इस तकनीकी के तहत बीते वर्षों में हुई हत्याओं, लूट, डकैती, चोरी, बलात्कार, छिनैती आदि वारदातों का रिकार्ड तैयार किया गया है। तैयार रिकार्ड के आधार पर थानों और क्राइम जोन एरिया चिह्नित किए गए हैं। अफसरों ने इस सिस्टम से रिसर्च किया है कि जिले में सबसे ज्यादा अपराध कहां, कब और किस तरह का होता है। इसी आधार पर थाने और क्राइम जोन चिह्नित करके वहां पुलिस पिकेट आदि बढ़ानी थी।


बकेवर का ग्राफ सबसे ऊपर
लुटेरों की सबसे ज्यादा निगाह हाइवे पर रहती है। इसी कारण से हाइवे सबसे ज्यादा असुरक्षित है। हाइवे पर वर्तमान समय में सबसे ज्यादा लूट की वारदातें बकेवर थाना क्षेत्र में हो रही हैं। हाइवे पर चल रहे निर्माण कार्यों का भी लुटेरे फायदा उठा रहे हैं। क्योंकि निर्माण कार्य के चलते जगह-जगह डायवर्जन आदि दिए गए हैं। ऐसी स्थिति में गुजरने वाले वाहन स्पीड नहीं बना पाते और पहले से तैयार लुटेरों के चंगुल में फंस जाते हैं।

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