इटावा में पंचमुखी हनुमान मंदिर के सेवादार की हत्या
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इटावा। फ्रेंड्स कॉलोनी थाने के गौरापुरा गांव में बृहस्पतिवार रात बदमाशों ने पंचमुखी हनुमान मंदिर में सेवादार की ईंट से कूंचकर हत्या कर दी। बदमाशों ने पुजारी पर भी हमला बोला। घायल पुजारी ने किसी तरह भागकर ग्राम प्रधान को घटना की जानकारी दी। सुबह मौके पर पहुंची पुलिस, फोरेंसिक टीम व डॉग स्क्वायड ने मौका मुआयना किया। सेवादार के भाई ने अज्ञात हमलावरों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। आशंका जताई जा रही है कि मंदिर की नौ बीघे जमीन के लिए बदमाश पुजारी की हत्या करने आए थे। सेवादार के भिड़ जाने से उसकी हत्या कर दी।
एसएसपी वैभव कृष्ण ने बताया कि पुलिस भूमि विवाद के अलावा अन्य बिंदुओं पर भी छानबीन कर रही है। उधर, सेवादार के भाई अरविंद ने मंदिर के पुजारी फागुन गिरि उर्फ लक्कड़ महाराज को भी जांच के दायरे में लेने की मांग की है। औरैया के सहायत थानांतर्गत बसंतपुर निवासी फागुन गिरि उर्फ लक्कड़ महाराज यहां पंचमुखी हनुमान मंदिर में काफी समय से पुजारी हैं।
यहीं कोतवाली क्षेत्र के नखासा मोहल्ले के पहलवान आशाराम यादव (60) सेवादार थे। दोनों रात करीब 8:30 बजे जब खाना बना रहे थे तभी सात-आठ बदमाश आ धमके। बदमाशों ने दोनों को लाठी-डंडों से पीटना शुरू कर दिया। इस बीच सेवादार आशाराम यादव बदमाशों से भिड़ गए और उसी अवस्था में मंदिर से थोड़ी दूर अमरूद के बाग तक पहुंचे।
वहां बदमाशों ने ईंट व किसी वजनी चीज से उन पर वार कर दिया। सिर कूंचे जाने से मौके पर ही उनकी मौत हो गई। इधर, पुजारी भागते हुए प्रधान अवधेश के यहां पहुंचा। पुजारी रात में प्रधान के घर पर ही रुक गया। प्रधान ने पुलिस को खबर दी। रात में भयवश कोई भी मंदिर नहीं गया। सुबह प्रधान, पुजारी व गांव के अन्य लोग मौके पर पहुंचे तो अमरूद के बाग में आशाराम मृत मिले।
पुलिस भी आ गई। थानाध्यक्ष भोलू सिंह भाटी ने उच्चाधिकारियों को जानकारी दी। एसएसपी वैभव कृष्ण, एएसपी जितेंद्र श्रीवास्तव, सीओ सिटी अंजनी कुमार चतुर्वेदी, डॉग स्क्वायड व फोरेंसिक टीम के साथ मौके पर पहुंचे। घायल पुजारी फागुनगिरि को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
कीमती जमीन के लिए तो नहीं हुई पहलवान की हत्या
इटावा। फ्रेंड्स कॉलोनी थाना क्षेत्र के गौरापुरा में गुरुवार रात को पंचमुखी हनुमान मंदिर पर सेवादार की सिर कुचलकर की गई हत्या के पीछे कीमती जमीन तो कारण नहीं है। हत्या का स्पष्ट कारण तो पता नहीं चल सका लेकिन इस बात की आशंका जताई जा रही है। एसएसपी ने बताया कि जमीन के विवाद के अलावा अन्य बिंदुओं को ध्यान में रखकर पुलिस जांच कर रही है।
शहर से सटे गौरापुरा गांव में दो दशक पहले एक बाबा लवकुश गिरी उर्फ ठडेश्वर गिरी महाराज आकर रहने लगे थे। तब गांव के प्रधान रहे लाला राम ने उन्हें आश्रम बनाने के लिए ग्राम समाज की करीब नौ बीघा जमीन दे दी थी। गांव के लोगों के सहयोग से वहां पर मंदिर का निर्माण कराया गया। मंदिर के पास ही अमरूद का बाग लगा दिया था। मंदिर में आसपास के लोग आते थे।
पिछले दिनों इटावा नगर का विस्तार हुआ। गौरापुरा गांव तक लोगों ने प्लॉट खरीदकर अपने मकान बनवाने शुरू कर दिए। इस कारण से वहां की जमीन की कीमत काफी बढ़ गई। मंदिर के आसपास के खेताें में प्लाटिंग हो चुकी है। लोगों की निगाह मंदिर की जमीन पर लगी थी। कुछ लोग उस जमीन को हथियाने की फिराक में थे। करीब छह माह पहले ठंडेश्वर गिरी महाराज ने समाधि ले ली थी।
उसके बाद मंदिर की देखरेख व पूजा-पाठ का काम वहां रह रहे फागुन गिरी ने संभाल ली थी। एक साल से मंदिर में पहलवान आसाराम यादव भी आने-जाने लगे थे। वह वहां पर कभी कभार रुक भी जाते थे । वह मंदिर में रहकर सफाई आदि का काम करते थे। गुरुवार रात को भी वह मंदिर में ही रुक गए। जब फागुन गिरी व आसाराम अपने लिए खाना बना रहे थे तभी छह सात लोग उधर से आ धमके और दोनों को मारना पीटना शुरू कर दिया।
चूंकि आसाराम पहलवानी करते रहे थे इस कारण वह बदमाशों ने भिड़ गए। इसी बीच मौका पाकर पुजारी फागुन गिरी वहां से भाग निकले। बदमाश आसाराम को मारपीट करते हुए अमरूद की बगिया में ले गए और उन्हें सिर कुचल कर हत्या कर दी। अब सवाल उठता है कि बदमाशों ने आसाराम की हत्या क्यों की? उनके नाम तो कुछ नहीं था वह तो केवल सेवादारी करने के लिए जाते थे। एसएसपी वैभव कृष्ण ने बताया कि पुलिस हर बिंदु को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। उनका कहना है कि पुलिस को कुछ अहम सुराग हाथ लगे हैं। मामले का जल्द खुलासा कर दिया जाएगा।
फागुन गिरी का पुलिस को सूचना न देना संदेहास्पद
जब बदमाशों ने फागुन गिरी व पहलवान आसाराम के साथ मारपीट की तो पहलवान बदमाशों से भिड़ गया लेकिन फागुन गिरी वहां से भाग निकले। फगुन गिरी के मुताबिक वह भाग कर सीधे प्रधान के घर पर पहुंचे और बदमाशों की मारपीट की सूचना प्रधान को दी। लेकिन न तो प्रधान ने और न ही फागुन गिरी ने इसकी सूचना पुलिस को देना मुनासिब समझा। वह तत्काल पुलिस को सूचना दे देते तो शायद पहलवान की जान बच सकती थी। फागुन गिरी ने बताया कि प्रधान ने इसकी सूचना गांव के सोनू को दी थी। सोनू का भी मंदिर में आना-जाना था। लेकिन पुलिस को सूचना न देना उनकी बात को संदेहास्पद बनाता है। शुक्रवार सुबह जब प्रधान व गांव के लोग पुजारी फागुन गिरी के साथ मंदिर पहुंचे तो उन्हें पहलवान का शव पड़ा मिला। इस संबंध में पहलवान के भाई अरविंद ने बताया कि पुजारी का बयान शक पैदा करता है। यदि वह रात के समय सूचना दे देते तो पहलवान की जान बच सकती थी। उसकी ग्राम प्रधान से बात हुई तो ग्राम प्रधान ने बताया कि फागुन गिरि आकर लेट गए। उन्होंने ऐसी कोई जानकारी नहीं दी। उनका कहना है कि यदि पुलिस फागुन गिरी से सख्ती के साथ पूछताछ करे तो पूरा मामला सामने आ जाएगा। उधर, पुलिस का कहना है कि फागुन गिरि से भी मामले में पूछताछ की जाएगी।