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फर्जी आईडी लगाकर बन जाता था परमिट

Mon, 19 Mar 2018 11:10 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/इटावा
अमर उजाला ब्यूरो/इटावा Updated Mon, 19 Mar 2018 11:10 PM IST
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Permit was created by fictitious ID
एआरटीओ कार्यालय की कर्मी बेबी का बंद पड़ा मकान - फोटो : अमर उजाला

एसएसपी वैभव कृष्ण को काफी पहले से जानकारी थी कि परिवहन विभाग में फर्जी कागजात बनाकर अवैध वसूली करने वाला गैंग काफी दिनों से सक्रिय है। इस पर उन्हाेंने विभाग के लोगों के फोन को सर्विलांस पर लगाया था। 9 मार्च को जानकारी मिली कि रविवार के दिन एक व्यक्ति फर्जी आईडी लगाकर परमिट बनबाने के लिए आने वाला है तो पुलिस ने छापा मार कार्रवाई कर रैकेट के सरगना को गिरफ्तार कर लिया।एसएसपी ने बताया कि 9 मार्च को भिंड निवासी ट्रक मालिक रमेश तोमर ने प्रदीप गुप्ता के मोबाइल पर बात की और अपने ट्रक का परमिट बनाने के लिए कहा। उसने कहा कि फर्जी आईडी पर परमिट बनना है तो प्रदीप तैयार हो गया। उसने रविवार को छुट्टी के दिन आने की बात कही। रविवार को वह कार्यालय पहुंचा और उसने कार्यालय को खुलवाकर कागजात तैयार करना श्ुारू कर दिया। तभी पुलिस ने छापा मारकर उसे धरदबोचा।

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लिपिक बेबी के घर चल रहा था समानान्तर कार्यालय
इटावा। परिवहन कार्यालय में परमिट लिपिक बेबी ऊषा काफी समय से उसी सीट पर तैनात है। वह फिरोजाबाद के शिकोहाबाद कस्बे की रहने वाली है। उसने इटावा के चौगुर्जी में मकान खरीद लिया है। उसके घर पर भी परिवहन विभाग का समानान्तर कार्यालय चल रहा था। भारी मात्रा में मिली नगदी और दफ्तर के कागजात व मुहरें इसकी सबूत थीं। पता चला है कि बेबी ने शादी नही की है। वह अकेली ही चौगुर्जी स्थित मकान में रहती है। मोहल्ले के लोगो ंने बताया कि उसका लोगों से कोई मिलना जुलना नहीं है । वह सुबह अपने कार्यालय जाती और शाम को लोैटकर आती । वह अपने काम से काम रखती है।
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61 बसों का मालिक है प्रदीप गुप्ता
एसएसपी ने बताया कि पूछताछ के दौरान जानकारी मिली कि प्रदीप गुप्ता व उसके निकट परिजनों के पास करीब 61 बसें हैं। जिनका विवरण उसके द्वारा उपलब्ध कराया गया। छानबीन के दौरान इस बात की जानकारी मिली है कि फर्जी चेचिस नंबर के आधार पर बसों का रजिस्ट्रेशन कराया गया है, उसकी गहराई से छानबीन की जा रही है। शहर के चार पहिया व दोपहिया वाहन एजेंसियों से बिकने वाले वाहनों के रजिस्ट्रेशन के नाम पर उसके पास एजेंसी मालिकों द्वारा महीने की बंधौई पहुंचाई जाती थी, जिसमें चार पहिया वाहन के रजिस्ट्रेशन पर 500 रुपया और दोपहिया वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर 150 रुपये प्रति वाहन उसका कमीशन होता था। शहर में करीब 400 चार पहिया और दो हजार दोपहिया वाहनों की बिक्री हो जाती है। इस हिसाब से उसकी हर महीने लाखों की कमाई थी। इसके अलावा फिटनेस के नाम पर भी अवैध वसूली करता था। इसके अलावा भी हल्के लाइसेंस बनवाने में 300 रुपये और हैवी लाइसेंस के लिए एक हजार रुपये प्रति लाइसेंस मिलता था।
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बंद रहा एआरटीओ दफ्तर, लोग लौटे
एआरटीओ कार्यालय के ताले सोमवार को नहीं खुले। कार्यालय के गेट पर पुलिस तैनात रही। इसकी वजह से ड्राइविंग लाइसेंस, परमिट, रजिस्ट्रेशन आदि कराने के लिए आए लोगों को लौटना पड़ा। छापे की जानकारी मिलने के बाद कोई कर्मचारी भी कार्यालय पहुंचा।

पूरे जिले के लोग एआरटीओ कार्यालय में रोजाना काम के लिए आते हैं लेकिन सोमवार जब लोग कार्यालय पहुंचे तो कार्यालय बंद दिखा। साथ में ही पुलिस फोर्स तैनात दिखी तो लोग चुपचाप लौट गए। जब उन्हें जानकारी मिली कि पुलिस का छापा पड़ा है और एआरटीओं के अलावा प्रदीप पकड़ा गया तो लोगों को कहते सुना गया कि चलो अच्छा हुआ।

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