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600 कछुआ कवच के साथ एक गिरफ्तार
अमर उजाला ब्यूरो/इटावा
Updated Wed, 04 Apr 2018 11:11 PM IST
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संयुक्त टीम की गिरफ्त में कछुआ तस्कर।
- फोटो : अमर उजाला
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इटावा। रेलवे स्टेशन के बाहर एसटीएफ व वन विभाग की टीम ने मंगलवार रात 600 कछुआ केलपी (कवच) के एक तस्कर को धर दबोचा है, जबकि उसका साथी भाग निकला। इनके पास से 35 हजार रुपया भी बरामद हुआ है। दोनों तस्कर पुर्वा एक्सप्रेस से कछुए का कवच कोलकाता ले जाने की तैयारी में थे। रेंजर एसएन यादव के मुताबिक एक कछुए से दो कवच तैयार होते हैं। यानी 600 कवच के लिए 300 कछुए का शिकार किया गया। पकड़े गए कवच की कीमत करीब 27 लाख बताई जा रही है। तस्कर को वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत जेल भेज दिया गया।
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इटावा में कछुआ केलपी तस्कर होने की सूचना पर एसटीएफ इंस्पेक्टर विमल कुमार गौतम व वन रेंजर एनएस यादव की टीम ने संयुक्त रूप से रेलवे स्टेशन पर छापा मारा। यहां स्टेशन के बाहर से मोहम्मद जसमुद्द्ीन को गिरफ्तार कर लिया। उसके बैग से कछुओं की केलपी बरामद हुईं। इसकी कीमत मार्केट में 27 लाख बताई जा रही है। पूछताछ के दौरान आरोपी जसमुद्दीन ने बताया कि वह पश्चिम बंगला के असीर हाजीवाड़ा थाना कालिया चक मालदा का रहने वाला है। उसने औरैया के युवक से कछुआ का (कवच)खरीदा था। इसके लिए उसने पौने दो लाख रुपये का भुगतान भी किया था। उसके बाद वह इटावा के कोकपुरा में अपने साथी किशन के साथ बाइक से रेलवे स्टेशन पहुंचा। जहां पुर्वा एक्सप्रेस से कोलकाता जाने के लिए खड़ा था। वन रेंजर एनएस यादव ने बताया कि उसका साथी किशन फरार हो गया, जिसकी तलाश की जा रही है। टीम में एसटीएफ के एसआई राय, राम सिंह, अरविंद्र सिंह, वन दरोगा प्रबल प्रताप सिंह, अनिल, संतोष सिंह और एक महिला शिवांगी सिंह भी शामिल थीं।
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शक्तिवर्धक दवाएं बनाने में प्रयोग होता है कवच
एसटीएफ के विमल कुमार गौतम ने बताया कि शक्तिवर्धक दवाइयों में कछुआ का कवच इस्तेमाल किया जाता है। कछुआ को मरने के बाद उसका कवच उतारा जाता है। उसकी खाल नहीं होती है।
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मालदा में दवा बनाने वालों को बेचता था झिल्ली
आरोपी ने बताया कि कछुआ की झिल्ली वह मालदा में दवा बनाने वालों को देता था, जिसकी उसको अच्छी कीमत मिलती थी। वह दवा कंपनियों को कछुआ की केलपी सप्लाई करता था।
कस्बों से जुड़े हैं तस्कर के तार
एसटीएफ के इंस्पेक्टर विमल गौतम ने बताया कि तस्कर के तार छोटे-छोटे कस्बों में नदी के किनारे रहने वाले लोगों से जुड़े हैं। वह कछुआ का शिकार करते हैं। इसके बाद कछुए के अंगों की सप्लाई करते हैं। इसकी उनको कीमत मिलती है।