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327 कछुए बरामद, चार तस्कर गिरफ्तार
Fri, 11 Jan 2019 11:29 PM IST
प्रतीक दुबे
अमर उजाला, इटावा
अमर उजाला, इटावा
Published by: प्रतीक दुबे
Updated Fri, 11 Jan 2019 11:29 PM IST
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वन विभाग व एसटीएफ द्वारा पकड़े कछुए।
- फोटो : amar ujala
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एसटीएफ व वन विभाग की संयुक्त टीम ने शुक्रवार तड़के चौबिया थाना क्षेत्र के चौपुला गांव के पास से चार कछुआ तस्करों को गिरफ्तार कर दस बोरों से 327 जिंदा कछुए बरामद किए हैं। ये कछुए कार से उत्तराखंड के रुद्रपुर ले जाए जा रहे थे। पुलिस ने कार भी जब्त कर ली है।
मुखबिर की सूचना पर एसटीएफ लखनऊ के निरीक्षक राजेश चंद्र त्रिपाठी और वन विभाग की टीम ने शुक्रवार सुबह चौबिया के चौपुला गांव के आसपास घेराबंदी कर दी। इस दौरान टीम ने कार को रुकने का इशारा किया तो चालक ने रफ्तार बढ़ा दी। टीम ने पीछा कर कार को रुकवा लिया और उसने सवार चार लोगों को पकड़ लिया। तलाशी में कार की डिकी से दस बोरों में 327 जिंदा कछुएं बरामद हुए। इसमें 322 कुछएं सुंदरी प्रजाति व पांच ब्लैक स्पाटिड टर्टल प्रजाति के हैं।
पकड़े गए लोगों की पहचान फ्रेंड्स कालोनी के कोकपुरा निवासी राम शरन प्रजापति पुत्र सिपाही लाल, किशन गोपाल पुत्र गंगा राम, सिविल लाइन के आलमपुर हौज निवासी रक्षपाल सिंह पुत्र मेघ सिंह और उत्तराखंड के रुद्रपुर (ऊधम सिंह नगर) के कृष्णा कालोनी ट्रांजिट कैंप निवासी खोखन मंडल पुत्र अनंत मंडल के रूप में हुई। पकड़े गए लोगों पर 1972 वन्य जीव अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। उन्हें जेल भेजा दिया गया है। कार को भी सीज कर दिया गया है।
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इटावा। एसटीएफ व वन विभाग की टीम ने शुक्रवार की सुबह चौपुला के पास छापा मारकर चार तस्करों को गिरफ्तार कर किया है। पूछताछ में इन लोगों ने बताया कि वे मैनपुरी व इटावा जिले से कछुओं को एकत्रित करते हैं और फिर उसे रुद्रपुर पहुंचाते हैं। उसके बाद वहां से उन्हें बाहर भेजा जाता है।
डीएफओ सत्य पाल सिंह ने बताया कि कछुआ तस्कर इटावा, मैनपुरी से कछुओं को रुद्रपुर ले जाते हैं वहां से उन्हें पश्चिम बंगाल भेजा जाता है। यहां से ये लोग पचास रुपये किलो के हिसाब से कछुआ खरीदते हैं। वहां पर उसे पांच से छह सौ रुपया प्रति किलो के हिसाब से बेचा जाता है। उन्होंने बताया कि कछुआ के कवच से शक्तिवर्धक दवाएं बनाई जाती हैं।
डीएफओ सत्यपाल सिंह ने बताया कि कछुआ तस्करी में लगे लोगों का नेटवर्क काफी बड़ा है। इससे पहले की भी टीम कछुआ तस्करों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। नेटवर्क में शामिल कुछ लोगों केे नाम भी प्रकाश में आए हैं। उन्होंने बताया कि तस्कर अब तस्करी के लिए लग्जरी कारों का इस्तेमाल करने लगे हैं। उन्होंने बताया कि पकड़ा गया कार चालक राम शरन कई बार खेप डाल चुका है। एक चक्कर के वह दस हजार रुपये लेता है।
डीएफओ ने बताया कि कछुआ पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने के लिए काफी कारगर है। कछुआ की तस्करी में लगे लोग पर्यावरण को बिगाड़ कर प्राणी मात्र के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि यदि उन्हें इस प्रकार से कोई कछुआ को पकड़ने व तस्करी में लिप्त लोगों के बारे में जानकारी मिले तो वह वन विभाग को अवश्य ही सूचना दे। जिससे ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो सके।
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मुखबिर की सूचना पर एसटीएफ लखनऊ के निरीक्षक राजेश चंद्र त्रिपाठी और वन विभाग की टीम ने शुक्रवार सुबह चौबिया के चौपुला गांव के आसपास घेराबंदी कर दी। इस दौरान टीम ने कार को रुकने का इशारा किया तो चालक ने रफ्तार बढ़ा दी। टीम ने पीछा कर कार को रुकवा लिया और उसने सवार चार लोगों को पकड़ लिया। तलाशी में कार की डिकी से दस बोरों में 327 जिंदा कछुएं बरामद हुए। इसमें 322 कुछएं सुंदरी प्रजाति व पांच ब्लैक स्पाटिड टर्टल प्रजाति के हैं।
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पकड़े गए लोगों की पहचान फ्रेंड्स कालोनी के कोकपुरा निवासी राम शरन प्रजापति पुत्र सिपाही लाल, किशन गोपाल पुत्र गंगा राम, सिविल लाइन के आलमपुर हौज निवासी रक्षपाल सिंह पुत्र मेघ सिंह और उत्तराखंड के रुद्रपुर (ऊधम सिंह नगर) के कृष्णा कालोनी ट्रांजिट कैंप निवासी खोखन मंडल पुत्र अनंत मंडल के रूप में हुई। पकड़े गए लोगों पर 1972 वन्य जीव अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। उन्हें जेल भेजा दिया गया है। कार को भी सीज कर दिया गया है।
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इटावा। एसटीएफ व वन विभाग की टीम ने शुक्रवार की सुबह चौपुला के पास छापा मारकर चार तस्करों को गिरफ्तार कर किया है। पूछताछ में इन लोगों ने बताया कि वे मैनपुरी व इटावा जिले से कछुओं को एकत्रित करते हैं और फिर उसे रुद्रपुर पहुंचाते हैं। उसके बाद वहां से उन्हें बाहर भेजा जाता है।
डीएफओ सत्य पाल सिंह ने बताया कि कछुआ तस्कर इटावा, मैनपुरी से कछुओं को रुद्रपुर ले जाते हैं वहां से उन्हें पश्चिम बंगाल भेजा जाता है। यहां से ये लोग पचास रुपये किलो के हिसाब से कछुआ खरीदते हैं। वहां पर उसे पांच से छह सौ रुपया प्रति किलो के हिसाब से बेचा जाता है। उन्होंने बताया कि कछुआ के कवच से शक्तिवर्धक दवाएं बनाई जाती हैं।
डीएफओ सत्यपाल सिंह ने बताया कि कछुआ तस्करी में लगे लोगों का नेटवर्क काफी बड़ा है। इससे पहले की भी टीम कछुआ तस्करों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। नेटवर्क में शामिल कुछ लोगों केे नाम भी प्रकाश में आए हैं। उन्होंने बताया कि तस्कर अब तस्करी के लिए लग्जरी कारों का इस्तेमाल करने लगे हैं। उन्होंने बताया कि पकड़ा गया कार चालक राम शरन कई बार खेप डाल चुका है। एक चक्कर के वह दस हजार रुपये लेता है।
डीएफओ ने बताया कि कछुआ पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने के लिए काफी कारगर है। कछुआ की तस्करी में लगे लोग पर्यावरण को बिगाड़ कर प्राणी मात्र के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि यदि उन्हें इस प्रकार से कोई कछुआ को पकड़ने व तस्करी में लिप्त लोगों के बारे में जानकारी मिले तो वह वन विभाग को अवश्य ही सूचना दे। जिससे ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो सके।