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हत्या में पिता-पुत्र को 10-10 वर्ष की सजा
Thu, 28 Mar 2019 11:51 PM IST
प्रतीक दुबे
इटावा, अमर उजाला ब्यूरो
इटावा, अमर उजाला ब्यूरो
Published by: प्रतीक दुबे
Updated Thu, 28 Mar 2019 11:51 PM IST
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- फोटो : amar ujala
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जिला सत्र न्यायाधीश दिलीप सिंह यादव ने शहर के फ्रेंड्स कालोनी के चर्चित हत्या के मामले में दोषी पाए गए पिता-पुत्र को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा उन्हें एक-एक लाख रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया गया।
जिला शासकीय अधिवक्ता शिवकुमार शुक्ला ने बताया कि 28 जनवरी 2016 को वादी देवेश यादव निवासी अशोकनगर ने फ्रेंड्स कालोनी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई कि 28 जनवरी को देर शाम करीब आठ बजे अपने सगे भाई आशीष व पड़ोसी मनोज के साथ फर्रुखाबाद क्रासिंग की ओर जा रहे थे तभी ओम वाटिका के पास आयुष व उसके पिता संतोष कुमार आ गए। दोनों ने हमें रोक लिया। फिर गालियां देते हुए रंगदारी में दस हजार रुपये मांगे। रुपये देने से मना किया तो पिता संतोष ने हाथ में राअफल लिए अपने पुत्र आयुष को गोली मार देने को कहा। आयुष ने उसके भाई आशीष के सीने में गोली मार दी। जब मनोज ने बचाने का प्रयास किया तो उसे भी गोली मार दी। घायल अवस्था में आशीष व मनोज को अस्पताल पहुंचाया गया। वहां पर डॉक्टरों ने आशीष मृत घोषित कर दिया।
विवेचना के उपरांत पुलिस ने मामला सुनवाई कोर्ट में दाखिल किया। मामले की सुनवाई जिला सत्र न्यायाधीश दिलीप सिंह यादव ने की। गवाहों के बयान व पक्ष विपक्ष के वकीलों की जिरह सुनने के उपरांत न्यायाधीश दिलीप सिंह यादव ने पिता संतोष व पुत्र आयुष को दोषी करार दिया। उन्होंने दोनों को दस दस वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई साथ ही एक एक लाख रुपए के अर्थदंड से दंडित किया।
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जिला शासकीय अधिवक्ता शिवकुमार शुक्ला ने बताया कि 28 जनवरी 2016 को वादी देवेश यादव निवासी अशोकनगर ने फ्रेंड्स कालोनी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई कि 28 जनवरी को देर शाम करीब आठ बजे अपने सगे भाई आशीष व पड़ोसी मनोज के साथ फर्रुखाबाद क्रासिंग की ओर जा रहे थे तभी ओम वाटिका के पास आयुष व उसके पिता संतोष कुमार आ गए। दोनों ने हमें रोक लिया। फिर गालियां देते हुए रंगदारी में दस हजार रुपये मांगे। रुपये देने से मना किया तो पिता संतोष ने हाथ में राअफल लिए अपने पुत्र आयुष को गोली मार देने को कहा। आयुष ने उसके भाई आशीष के सीने में गोली मार दी। जब मनोज ने बचाने का प्रयास किया तो उसे भी गोली मार दी। घायल अवस्था में आशीष व मनोज को अस्पताल पहुंचाया गया। वहां पर डॉक्टरों ने आशीष मृत घोषित कर दिया।
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विवेचना के उपरांत पुलिस ने मामला सुनवाई कोर्ट में दाखिल किया। मामले की सुनवाई जिला सत्र न्यायाधीश दिलीप सिंह यादव ने की। गवाहों के बयान व पक्ष विपक्ष के वकीलों की जिरह सुनने के उपरांत न्यायाधीश दिलीप सिंह यादव ने पिता संतोष व पुत्र आयुष को दोषी करार दिया। उन्होंने दोनों को दस दस वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई साथ ही एक एक लाख रुपए के अर्थदंड से दंडित किया।
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