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Etawah News: लगातार आंसू निकलने और आंख रगड़ने से हो सकता मोतियाबिंद
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इटावा। ऑनलाइन पढ़ाई और डिजिटल कामकाज से आंखों के मर्ज बढ़ रहे हैं। आंखों की मांसपेशियां कमजोर होने से जल्दी आंसू निकलने लगते हैं। ऐसे में आंखों को मलना मोतियाबिंद का कारण बन सकता है।
जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 150 नेत्र रोगी आ रहे हैं। इनमें लगभग 40 प्रतिशत युवा हैं। वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. आनंद उपाध्याय ने बताया कि कोराना काल से डिजिटल दुनिया का प्रभाव बढ़ा है जो आंखों पर असर डाल रहा है। पढ़ाई से लेकर ऑफिस के कामकाज कई घंटों तक मोबाइल और लैपटॉप पर करने से आंखों की मांसपेशियां जल्दी कमजोर हो रही हैं।
इस वजह से आंखों से आंसू आना, जलन होने जैसी समस्याएं हो रही हैं। मांसपेशियां कमजोर होने के बाद लोगों के सिर में दर्द होने लगता है। आंखों से ज्यादा आंसू निकलना और आंख को रगड़ने से कार्निया (आंख की बाहरी झिल्ली) खराब हो जाती है। सर्दी के मौसम में हवा चलने पर आंसू निकलने, जलन की शिकायत होने पर मोतियाबिंद हो सकता है। बताया कि कम दिखाई पड़ना, आंख के नीचे की पुतली का लेंस सफेद नजर आए तो नेत्र चिकित्सक से सलाह जरूर लें।
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एक फीट की दूरी से पढ़ें और उपकरण का उपयोग करें
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. आनंद उपाध्याय ने बताया कि किताबें पढ़ने, किसी भी डिजिटल उपकरण उपयोग करने में कम से कम एक फीट की दूरी रखनी चाहिए। ऐसा करने से आंखों पर जोर कम पड़ता है और मांसपेशियां जल्दी कमजोर नहीं होतीं।
शिविर में सोमवार को होगी नेत्र रोगियों की जांच
डाॅ. आनंद उपाध्याय ने बताया कि जिला अस्पताल में कक्ष नंबर 109 में सोमवार को सुबह आठ बजे से नेत्र परीक्षण शिविर आयोजित होगा। शिविर में परीक्षण के बाद चयनित मोतियाबिंद के मरीजों का अत्याधुनिक फेको व एसआईसीएस पद्धति से लेंस प्रत्यारोपण (मोतियाबिंद ऑपरेशन) निशुल्क किया जाएगा। जो मरीज आंख की समस्या से परेशान हैं, वह शिविर में परीक्षण के लिए रजिस्ट्रेशन कराएं। चयनित मरीजों के मोतियाबिंद ऑपरेशन मंगलवार को होंगे।
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जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 150 नेत्र रोगी आ रहे हैं। इनमें लगभग 40 प्रतिशत युवा हैं। वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. आनंद उपाध्याय ने बताया कि कोराना काल से डिजिटल दुनिया का प्रभाव बढ़ा है जो आंखों पर असर डाल रहा है। पढ़ाई से लेकर ऑफिस के कामकाज कई घंटों तक मोबाइल और लैपटॉप पर करने से आंखों की मांसपेशियां जल्दी कमजोर हो रही हैं।
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इस वजह से आंखों से आंसू आना, जलन होने जैसी समस्याएं हो रही हैं। मांसपेशियां कमजोर होने के बाद लोगों के सिर में दर्द होने लगता है। आंखों से ज्यादा आंसू निकलना और आंख को रगड़ने से कार्निया (आंख की बाहरी झिल्ली) खराब हो जाती है। सर्दी के मौसम में हवा चलने पर आंसू निकलने, जलन की शिकायत होने पर मोतियाबिंद हो सकता है। बताया कि कम दिखाई पड़ना, आंख के नीचे की पुतली का लेंस सफेद नजर आए तो नेत्र चिकित्सक से सलाह जरूर लें।
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एक फीट की दूरी से पढ़ें और उपकरण का उपयोग करें
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. आनंद उपाध्याय ने बताया कि किताबें पढ़ने, किसी भी डिजिटल उपकरण उपयोग करने में कम से कम एक फीट की दूरी रखनी चाहिए। ऐसा करने से आंखों पर जोर कम पड़ता है और मांसपेशियां जल्दी कमजोर नहीं होतीं।
शिविर में सोमवार को होगी नेत्र रोगियों की जांच
डाॅ. आनंद उपाध्याय ने बताया कि जिला अस्पताल में कक्ष नंबर 109 में सोमवार को सुबह आठ बजे से नेत्र परीक्षण शिविर आयोजित होगा। शिविर में परीक्षण के बाद चयनित मोतियाबिंद के मरीजों का अत्याधुनिक फेको व एसआईसीएस पद्धति से लेंस प्रत्यारोपण (मोतियाबिंद ऑपरेशन) निशुल्क किया जाएगा। जो मरीज आंख की समस्या से परेशान हैं, वह शिविर में परीक्षण के लिए रजिस्ट्रेशन कराएं। चयनित मरीजों के मोतियाबिंद ऑपरेशन मंगलवार को होंगे।