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डॉक्टर पर रिपोर्ट का पत्र लिखने वाले चिकित्सा अधीक्षक को हटाया
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इटावा। पेशेंट किचन टेंडर प्रक्रिया मामले की जांच रिपोर्ट आने के बाद उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान संस्थान सैफई में अधिकारियों के बीच खींचतान की स्थिति है। दोषी ठहराए गए चिकित्सा अधीक्षक ने एक पुराने मामले में एक असिस्टेंट प्रोफेसर पर एफआईआर के लिए सैफई थाने में तहरीर दी। इधर रजिस्ट्रार ने चिकित्सा अधीक्षक को हटाने का पत्र जारी कर दिया।
पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. आदेश कुमार के पास चिकित्सा अधीक्षक का भी प्रभार था। डॉ. आदेश ने 24 दिसंबर को सैफई थानाप्रभारी के नाम एक पत्र लिखा। जिसमें कॉडियोलॉजी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. समीर सर्राफ पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग की थी। पत्र में लिखा डॉ. सर्राफ ने लगभग एक करोड़ रुपये की अनावश्यक खरीद की, इसके अलावा उन्होंने मरीजों को नियम विरुद्ध महंगे पेसमेकर लगवाए, आयुष्मान भारत योजना के तहत भर्ती हुए मरीजों से भी पैसे वसूले। बता दें कि डॉ. सर्राफ को इस मामले में पहले ही निलंबित किया जा चुका है। आदेश ने यह पत्र डाक से भेजा था, जो 28 दिसंबर को थानाप्रभारी को मिला। थाना प्रभारी ने कहा कि पत्र मिला है, जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
वहीं इस पत्र के सामने आने के बाद रजिस्ट्रार ने चिकित्सा अधीक्षक को हटाने का पत्र जारी कर दिया। लिखा कि डा. आदेश को चिकित्सा अधीक्षक के अतिरिक्त प्रभार से तत्काल प्रभाव से मुक्त कर मुक्त किया जाता है। उनके स्थान पर जनरल सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डा. एसके सिंह को चिकित्सा अधीक्षक का प्रभार दिया गया। डॉ. आदेश को एक अन्य मामले में हुई अनियमितता में जांच कमेटी ने दोषी पाया था। ये मामला रोगियों को खाना बांटने वाली संस्था के नियम विरुद्ध कार्यकाल को बढ़ाने से जुड़ा है। इस मामले में हाल ही में जांच रिपोर्ट आई थी। उसमें विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार समेत 14 लोगों को दोषी पाया गया था। शासन ने विश्वविद्यालय प्रशासन को इन सभी पर कार्रवाई करने के लिए कहा था।
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चिकित्सा अधीक्षक को पेशेंट किचन टेंडर मामले में दोषी पाए जाने पर हटाया गया है। इसके अलावा अन्य लोगों से भी अतिरिक्त प्रभार लिया गया है। डॉ. समीर सर्राफ मामले से इसका कोई संबंध नहीं है।
सुरेश चंद शर्मा, कुलसचिव उत्तप्रदेश आयुर्विज्ञान संस्थान सैफई।
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पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. आदेश कुमार के पास चिकित्सा अधीक्षक का भी प्रभार था। डॉ. आदेश ने 24 दिसंबर को सैफई थानाप्रभारी के नाम एक पत्र लिखा। जिसमें कॉडियोलॉजी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. समीर सर्राफ पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग की थी। पत्र में लिखा डॉ. सर्राफ ने लगभग एक करोड़ रुपये की अनावश्यक खरीद की, इसके अलावा उन्होंने मरीजों को नियम विरुद्ध महंगे पेसमेकर लगवाए, आयुष्मान भारत योजना के तहत भर्ती हुए मरीजों से भी पैसे वसूले। बता दें कि डॉ. सर्राफ को इस मामले में पहले ही निलंबित किया जा चुका है। आदेश ने यह पत्र डाक से भेजा था, जो 28 दिसंबर को थानाप्रभारी को मिला। थाना प्रभारी ने कहा कि पत्र मिला है, जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
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वहीं इस पत्र के सामने आने के बाद रजिस्ट्रार ने चिकित्सा अधीक्षक को हटाने का पत्र जारी कर दिया। लिखा कि डा. आदेश को चिकित्सा अधीक्षक के अतिरिक्त प्रभार से तत्काल प्रभाव से मुक्त कर मुक्त किया जाता है। उनके स्थान पर जनरल सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डा. एसके सिंह को चिकित्सा अधीक्षक का प्रभार दिया गया। डॉ. आदेश को एक अन्य मामले में हुई अनियमितता में जांच कमेटी ने दोषी पाया था। ये मामला रोगियों को खाना बांटने वाली संस्था के नियम विरुद्ध कार्यकाल को बढ़ाने से जुड़ा है। इस मामले में हाल ही में जांच रिपोर्ट आई थी। उसमें विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार समेत 14 लोगों को दोषी पाया गया था। शासन ने विश्वविद्यालय प्रशासन को इन सभी पर कार्रवाई करने के लिए कहा था।
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चिकित्सा अधीक्षक को पेशेंट किचन टेंडर मामले में दोषी पाए जाने पर हटाया गया है। इसके अलावा अन्य लोगों से भी अतिरिक्त प्रभार लिया गया है। डॉ. समीर सर्राफ मामले से इसका कोई संबंध नहीं है।
सुरेश चंद शर्मा, कुलसचिव उत्तप्रदेश आयुर्विज्ञान संस्थान सैफई।