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आंधी में छत गिरने से बच्चे की मौत, माता और पिता घायल

Fri, 29 May 2020 09:39 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 29 May 2020 09:39 PM IST
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Child dies, parents injured in roof collapse
फोटो संख्या 09: मकान के मलवे के पास खड़े गांव के लोग। - फोटो : ETAWHA
लवेदी के धौरखा गांव में आंधी से दो हादसे हुए। एक गरीब मजदूर परिवार के ऊपर पत्थर की पटिया से पटी कच्ची छत गिरने से तीन साल के बच्चे की मौत और माता-पिता घायल हो गए।
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वहीं एक अन्य मकान की दीवार व छप्पर गिरने से मां-बेटी घायल हो गई। चारों घायल जिला अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं।
बृहस्पतिवार देर शाम करीब साढ़े सात बजे आंधी-पानी आने से लवेदी थाना क्षेत्र के धौरखा गांव निवासी मजदूर जितेंद्र दोहरे के कमरे की छत भरभरा कर गिर पड़ी। छत का पटान लोहे के गाटर पर पत्थर की पटिया रख के मिट्टी के भराव से किया गया था।
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जितेंद्र अपनी पत्नी व बेटे के साथ पिता दिनेश के बगल में ही एक कमरे के घर में रह रहा है। इसी कमरे की छत से बिल्कुल सट कर पिता के कमरे के छत की ईंटों से बनी चहारदीवारी खड़ी थी।
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आंधी से एक तरफ की चहारदीवार जितेंद्र की छत पर गिरी। मलबा के वजन व धमक से उसकी छत भरभराकर गिर पड़ी। इसमें दबने से जितेंद्र, उसकी पत्नी रिंकी और तीन साल बेटा अनुराग गंभीर रूप से घायल हो गए।
इसी दौरान गांव के ही सर्वेश दोहरे के घर की बाहरी दीवार धराशायी हो गई। इस दीवार के दोनों ओर छप्पर रखे हुए थे। घर के अंदर की तरफ रखे छप्पर के नीचे सर्वेश की 19 साल की बेटी संगीता व पत्नी पिंकी लेटी हुई थी।
मलबे में दबने से मां-बेटी दोनों घायल हो गईं। ग्रामीणों ने आनन फानन दोनों हादसों में घायल लोगों को बाहर निकाला और दो ऑटो रिक्शा से जिला अस्पताल पहुंचाया। मासूम अनुराग की रास्ते में ही मौत हो गई। जिला अस्पताल में डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।
सूचना पर एसडीएम भरथना इंद्रजीत सिंह, तहसीलदार गजराज सिंह, कानूनगो दिनेश चंद्र मिश्रा व लेखपाल मौके पर पहुुंचे। एसडीएम ने बताया कि पीडब्ल्यूडी से घर गिरने के नुकसान का आकलन कराया जा रहा है। पीड़ित परिवार की दैवीय आपदा के तहत निर्धारित आर्थिक मदद की जाएगी।
धौरखा गांव से आगरा-कानपुर हाईवे तक के पौन किमी की दूरी आमतौर पर ऑटो आदि से 5-10 मिनट में तय हो जाती है। बुधवार रात को यह फासला तय करने में घंटा भर लग गया। आंधी पानी की वजह से गांव के समीप इस संपर्क मार्ग पर कई पेड़ उखड़ कर सड़क पर गिर गए।
इनसे रास्ता अवरुद्ध हो गया। ग्रामीण और परिजन जब दो ऑटो से पांच घायलों को जिला अस्पताल ले जा रहे थे। तो उन्हें रास्ते में पड़े पेड़ों को हटाने की कवायद करनी पड़ी। आननफानन कुल्हाड़ी लाकर ग्रामीणों ने टूटे पड़े पेड़ की डालियों को काटा और ऑटो के निकलने की जगह बनाई।

इसमें वक्त बर्बाद हुआ। सभी घायल जब जिला अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टर ने मासूम अनुराग को मृत घोषित कर दिया। ग्रामीणों ने बताया कि हादसे के बाद अनुराग जीवित था। रास्ते में वक्त बर्बाद होने से उसकी जान चली गई। हालांकि गांव के ही कुछ लोग ऑटो चलाकर अपना परिवार पालते हैं। इसलिए घायलों को ऑटो से लाने की सहूलियत मिल गई थी।
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